धनबाद SNMMCH सहित सरकारी मेडिकल कॉलेजों में रोबोटिक सर्जरी की तैयारी, स्वास्थ्य विभाग को भेजा प्रस्ताव

धनबाद (झारखंड): चिकित्सा विज्ञान के क्षेत्र में अत्याधुनिक तकनीकों के तेजी से बढ़ते प्रयोग के बीच झारखंड की सरकारी स्वास्थ्य व्यवस्था को आधुनिक बनाने की दिशा में बड़ी पहल शुरू हुई है।
राज्य के सरकारी मेडिकल कॉलेजों में रोबोटिक सर्जरी की सुविधा उपलब्ध कराने की योजना बनाई जा रही है। स्वास्थ्य, चिकित्सा शिक्षा एवं परिवार कल्याण विभाग के प्रधान सचिव अजय कुमार सिंह के निर्देश पर मेडिकल कॉलेजों से विस्तृत कार्ययोजना मांगी गई थी। इसी क्रम में धनबाद के शहीद निर्मल महतो मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल (SNMMCH) ने अपना औपचारिक प्रस्ताव स्वास्थ्य विभाग को भेज दिया है। यदि इसे स्वीकृति मिलती है, तो यह राज्य के सरकारी स्वास्थ्य तंत्र में मील का पत्थर साबित होगा।
🏥 राज्य के किसी सरकारी अस्पताल में नहीं है यह सुविधा: निजी क्षेत्रों में भी सीमित विकल्प
वर्तमान स्थिति और पहल की आवश्यकता:
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सरकारी स्तर पर पहली पहल: SNMMCH के अधीक्षक डॉ. डी.के. गिंदौरिया के अनुसार वर्तमान में झारखंड के किसी भी सरकारी मेडिकल संस्थान में रोबोटिक सर्जरी उपलब्ध नहीं है, जबकि निजी क्षेत्र में भी यह सुविधा एक-दो गिने-चुने अस्पतालों तक सीमित है।
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मरीजों का पलायन रुकेगा: जटिल और अत्याधुनिक ऑपरेशनों के लिए राज्य के मरीजों को वेल्लोर, दिल्ली, कोलकाता या अन्य महानगरों का रुख करना पड़ता है। सरकारी अस्पताल में यह व्यवस्था शुरू होने से मरीजों के आउट-माइग्रेशन और अतिरिक्त आर्थिक बोझ में भारी कमी आएगी।
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एक करोड़ आबादी को लाभ: यह मेडिकल कॉलेज प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से लगभग एक करोड़ की आबादी को स्वास्थ्य सेवाएं मुहैया कराता है, जिसे इस सुपर-स्पेशियलिटी तकनीक का सीधा लाभ मिलेगा।
👨⚕️ डॉक्टर के नियंत्रण में रहता है रोबोट: 3D विजन और 360 डिग्री रोटेशन से सटीक ऑपरेशन
रोबोटिक सर्जरी की तकनीकी कार्यप्रणाली:
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सर्जन का पूर्ण नियंत्रण: रोबोटिक सर्जरी का अर्थ यह कतई नहीं है कि रोबोट स्वतंत्र रूप से ऑपरेशन करता है। पूरा नियंत्रण अनुभवी सर्जन के हाथों में होता है; रोबोट डॉक्टर की सर्जिकल शुद्धता (Precision) को बढ़ाने वाले माध्यम के रूप में कार्य करता है।
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3D विजन और सूक्ष्म चीरा: इस प्रणाली में सर्जन को 3D हाई-डेफिनिशन व्यू मिलता है। रोबोटिक आर्म्स 360 डिग्री तक मुड़ सकते हैं, जिससे शरीर के उन अत्यंत संकरे व जटिल हिस्सों में भी सर्जरी संभव हो जाती है जहां सामान्य उपकरण या मानवीय हाथ आसानी से नहीं पहुंच सकते।
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कम रक्तस्राव और त्वरित रिकवरी: यह मिनिमली इनवेसिव (सूक्ष्म चीरा) प्रक्रिया है, जिससे मरीज के शरीर पर छोटा चीरा लगता है, रक्तस्राव बहुत कम होता है और मरीज कुछ ही दिनों में स्वस्थ होकर सामान्य जीवन में लौट आता है।
📋 मरीज का चयन और मेडिकल स्टाफ का विशेष प्रशिक्षण: सुरक्षा प्राथमिकता
प्रक्रिया के मानक और तैयारियां:
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फिटनेस और जांच जरूरी: हर मरीज रोबोटिक सर्जरी के लिए उपयुक्त नहीं होता। इसके लिए मरीज की हृदय गति (Cardiac Function), फेफड़ों की कार्यक्षमता और एनेस्थीसिया को सहन करने की क्षमता का विस्तृत परीक्षण किया जाता है। जो मरीज लैप्रोस्कोपिक सर्जरी के लिए फिट होते हैं, वे सामान्यतः इसके लिए भी उपयुक्त माने जाते हैं।
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विशेषज्ञ डॉक्टरों की ट्रेनिंग: पारंपरिक सर्जरी के माहिर डॉक्टरों और नर्सिंग स्टाफ को रोबोटिक कंसोल और उपकरणों के संचालन का गहन व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया जाएगा, जिसकी व्यवस्था मशीन प्रदाता कंपनियों और तकनीकी विशेषज्ञों के सहयोग से होगी।
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पारदर्शिता और सहमति: मरीज और परिजनों को पूर्व में ही स्पष्ट किया जाएगा कि आवश्यकता पड़ने पर या किसी जटिलता की स्थिति में सर्जरी को ओपन प्रोसीजर में बदला जा सकता है।
💰 निजी अस्पतालों से 80-90% कम होगा खर्च: आयुष्मान भारत योजना में जोड़ने की कवायद
उपचार की लागत और आमजन को राहत:
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न्यूनतम खर्च पर विश्वस्तरीय इलाज: निजी कॉर्पोरेट अस्पतालों में रोबोटिक सर्जरी लाखों रुपये की लागत में होती है। सरकारी अस्पताल में केवल बुनियादी उपभोग्य सामग्रियों (Consumables) का ही मामूली शुल्क लिया जा सकता है, जो निजी अस्पतालों की तुलना में महज 10 से 20 प्रतिशत तक ही होगा।
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आयुष्मान भारत से जोड़ने की योजना: सरकार इस बात पर भी विचार कर रही है कि रोबोटिक सर्जरी के पैकेजों को आयुष्मान भारत योजना में सम्मिलित किया जाए, जिससे गरीब और मध्यमवर्गीय परिवारों को यह अत्याधुनिक उपचार पूरी तरह निशुल्क मिल सके।





