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ब्रेन ट्यूमर और बम को मात देने वाला ITBP का जवान हादसे में हारा जिंदगी की जंग

जींद : आई.टी.बी.पी. के जींद के जिस जवान राजेंद्र मिश्रा ने 4 साल पहले ब्रेन ट्यूमर और कुछ समय पहले मुंह में फंसे हैंड ग्रेनेड को मात दे दी थी, वह जवान शनिवार रात जींद-रोहतक नैशनल हाइवे पर किनाना के पास सड़क हादसे में जिंदगी की जंग हार गया। किनाना के पास शनिवार रात सड़क हादसे में जींद के अमरहेड़ी रोड़ निवासी आई.टी.बी.पी. जबान राजेन्द्र मिश्रा की मौत हो गई।

राजेन्द्र मिश्रा 10 साल पहले आई.टी.बी.पी. में भर्ती हुआ था। आई.टी.बी.पी. में भर्ती होने से पहले वह जींद में तांगा चौक स्थित सन्नी गारमैंटस की दुकान पर काम करता था। उसके पिता महेश जींद के डीईओ ऑफिस में कर्मचारी हैं। आई.टी.बी.पी. में भर्ती होने के बाद उसे लगभग 4 साल पहले ब्रेन ट्यूमर हुआ था। राजेंद्र मिश्रा ने ब्रेन ट्यूमर को मात दे दी थी और उसने आई.टी.बी.पी. के कमांडों कोर्स में दाखिल ले लिया था। आई.टी.बी.पी. के कंमाडो कोर्स के दौरान एक दिन राजेंद्र मिश्रा के मुंह में हैंड ग्रेनेड उस समय फंस गया था, जब वह अभ्यास के दौरान हैंड ग्रेनेड की माऊथ पिन को खींचकर उसे फैंकने का प्रयास कर रहा था। तब भी उसकी जान मुश्किल से बची थी।

कमांडिंग ऑफिसर ने उसे कमांडो कोर्स बीच में छोड़ देने का ऑफर दिया था, लेकिन अलग ही माटी के बने राजेंद्र मिश्रा ने कमांडो कोर्स छोड़ने से मना कर दिया था। इतने मजबूत जिगर वाला आई.टी.बी.पी. का यह जवान राजेंद्र मिश्रा शनिवार रात किनाना के पास सड़क हादसे में जिंदगी की जंग हार गया।  वह रोहतक से जिस कार में अपने घर के लिए निकला था, उस कार को किनाना के पास सामने से आ रहे ट्रक ने टक्कर मार दी थी। इसमें राजेंद्र मिश्रा की मौके पर ही मौत हो गई थी।

मरते दम तक वर्दी में था राजेंद्र मिश्रा
आई.टी.बी.पी. जबान राजेंद्र मिश्रा को अपनी आई.टी.बी.पी. की खाकी रंग की वर्दी से कितना लगाव था, इसका अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि शनिवार रात जब सड़क हादसे में उसकी मौत हुई, तब भी वह आई.टी.बी.पी.  की अपनी खाकी वर्दी में ही था। राजेंद्र मिश्रा अपने 4 भाइयों में सबसे बड़े से छोटा था। अविवाहित राजेंद्र मिश्रा की सड़क हादसे में मौत से पूरे परिवार ही नहीं, जींद के अमरहेड़ी रोड पर मातम छा गया। रविवार दोपहर उसके अंतिम संस्कार में सैंकड़ों लोग उमड़ पड़े थे। हर शख्स की आंख इस जवान की मौत से नम थी। नम आंखों से पुलिस सम्मान के साथ आई.टी.बी.पी.  जवान का अंतिम संस्कार किया गया। सन्नी गारमैंटस के सुनील वश्ष्ठि ने कहा कि राजेंद्र मिश्रा बहुत मेहनती और पढ़ने में होशियार था। अपनी मेहनत और होशियारी से ही उसने आई.टी.बी.पी.  में 10 साल पहले नौकरी पाई थी। दुकान पर काम करते समय भी राजेंद्र मिश्रा अपने काम को अपना इमान समझकर करता था।

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