Ranchi Cyber Crime: बैंक ऑफ इंडिया के फर्जी ऐप से 70 वर्षीय बुजुर्ग से 4.90 लाख की ठगी, 6 आरोपियों पर FIR दर्ज

रांची (झारखंड): शातिर साइबर अपराधियों ने बैंक ऑफ इंडिया (BOI) का कूटरचित फर्जी मोबाइल ऐप और बैंक का आधिकारिक लोगो इस्तेमाल कर एक 70 वर्षीय वरिष्ठ नागरिक को अपने जाल में फंसा लिया।
शातिरों ने बुजुर्ग के बैंक खाते में सेंध लगाकर करीब 4,90,000 रुपये की अवैध निकासी कर ली। इस गंभीर वित्तीय धोखाधड़ी को लेकर रांची साइबर क्राइम थाना में कुल छह नामजद आरोपियों के विरुद्ध सुसंगत धाराओं में प्राथमिक प्राथमिकी दर्ज की गई है।
📋 क्या है पूरा मामला: रातू रोड शाखा के खाताधारक बने धोखाधड़ी का शिकार
शिकायत और दर्ज धाराओं का विवरण:
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पीड़ित की पहचान: मामले को लेकर 70 वर्षीय बुजुर्ग कवल किशोर प्रसाद ने रांची साइबर क्राइम थाने में विधिवत लिखित शिकायत दी है।
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बैंक खाता: शिकायतकर्ता का खाता बैंक ऑफ इंडिया की रांची स्थित रातू रोड शाखा में संचालित है, जहां से अज्ञात साइबर गिरोह ने 4.90 लाख रुपये उड़ा लिए।
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सख्त धाराओं में केस दर्ज: साइबर पुलिस ने इस मामले में भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 318(4), 319(2), 336(3), 338 और 340(2) तथा आईटी एक्ट की धारा 66(C) व 66(D) के तहत अपराध दर्ज किया है।
📲 फेसबुक पर आया था फर्जी ऐप का लिंक: हूबहू लगा बैंक ऑफ इंडिया का लोगो
साइबर जालसाजी की शुरुआत:
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सोशल मीडिया नोटिफिकेशन: ठगी की शुरुआत 3 सितंबर को हुई, जब पीड़ित बुजुर्ग के मोबाइल पर सोशल मीडिया (फेसबुक) के माध्यम से बैंक ऑफ इंडिया से संबंधित एक ऐप इंस्टॉल करने का नोटिफिकेशन प्राप्त हुआ।
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बैंक का आधिकारिक लोगो: बुजुर्ग को लगा कि यह सूचना बैंक की ओर से भेजी गई है। जब उन्होंने लिंक पर क्लिक किया, तो ऐप पर बैंक का आधिकारिक लोगो नजर आया, जिससे वह भ्रमित होकर उसे वास्तविक बैंकिंग ऐप समझ बैठे।
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निजी डेटा की प्रविष्टि: ऐप में उनसे नाम, मोबाइल नंबर और प्राथमिक विवरण भरने को कहा गया, जिसके बाद साइबर अपराधियों ने उनसे सीधे फोन पर संपर्क साधना शुरू कर दिया।
📹 वीडियो कॉल पर खुद को बताया बैंककर्मी: झांसा देकर उड़ा ली पूरी रकम
ठगी की मॉडस ऑपरेंडी:
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वीडियो कॉल पर भरोसा: बातचीत के दौरान आरोपियों ने बुजुर्ग को तकनीकी उलझनों में फंसाया। एक शातिर ने वीडियो कॉल कर खुद को बैंक का जिम्मेदार प्रतिनिधि बताया ताकि कोई संदेह न रहे।
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ओटीपी व संदेश हासिल किए: आरोपियों ने भरोसा दिलाया कि खाते की आवश्यक सुरक्षा प्रक्रिया पूरी की जा रही है। इसी बहाने उन्होंने मोबाइल पर आए गोपनीय संदेशों और बैंकिंग क्रेडेंशियल्स की जानकारी हासिल कर ली।
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खाता होल्ड कराया: जानकारी मिलते ही अपराधियों ने खाते से रकम निकाल ली। ठगी का अहसास होते ही पीड़ित ने तत्काल शाखा पहुंचकर अपना खाता होल्ड करवाया।
📞 1930 पर दर्ज कराई शिकायत: इंस्पेक्टर आकाश कुमार सिंह को सौंपी गई जांच
प्रशासनिक व कानूनी कार्रवाई:
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हेल्पलाइन पर रिपोर्ट: खाते से अवैध निकासी होते ही पीड़ित ने राष्ट्रीय साइबर अपराध हेल्पलाइन नंबर 1930 पर कॉल कर शिकायत दर्ज करवाई।
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जांच अधिकारी नियुक्त: हेल्पलाइन पर दर्ज विवरण के आधार पर रांची साइबर क्राइम थाने में नियमित केस दर्ज किया गया।
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तफ्तीश शुरू: पूरे प्रकरण के गहन अनुसंधान और तकनीकी विश्लेषण की जिम्मेदारी तेजतर्रार पुलिस इंस्पेक्टर आकाश कुमार सिंह को सौंपी गई है।
👥 6 आरोपियों के खिलाफ नामजद एफआईआर: अंतरराज्यीय सिंडिकेट के संकेत
आरोपियों की सूची:
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नामजद आरोपी: पुलिस ने प्राथमिकी में धन संगी, लालून हलवा, एमडी सदाम, सचिन कुमार वर्मा, सुशील कुमार रोहित और रोंकांतेज्जा शहाई को नामजद आरोपी बनाया है।
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अज्ञात ठिकाने: एफआईआर में दर्ज कई आरोपियों के मूल पते अज्ञात हैं, जिनकी कॉल डिटेल रिकॉर्ड (CDR) और आईपी एड्रेस के आधार पर तलाश की जा रही है।
💳 अलग-अलग खातों और अमेजन पे में भेजी गई राशि: ट्रांजेक्शन ट्रेल की जांच
रुपयों की बंदरबांट और बैंक खाते:
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ईपीएफओ और अन्य खाते: वित्तीय जांच में सामने आया है कि ठगी की गई रकम को सचिन कुमार वर्मा, सुशील कुमार रोहित और रोहिकांत से जुड़े ईपीएफओ व अन्य बैंक खातों में ट्रांसफर किया गया।
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डिजिटल वॉलेट का इस्तेमाल: इसके अतिरिक्त तेजा शभत के खाते और अमेज़न पे (Amazon Pay) वॉलेट के जरिए भी लेन-देन किया गया है।
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सिंडिकेट का खुलासा: इन खातों की वित्तीय गतिविधियों (Financial Trail) से पुलिस को साइबर गिरोह के अंतरराज्यीय नेटवर्क तक पहुंचने में मदद मिल रही है।
⚠️ फर्जी ऐप के जरिए ठगी का नया ट्रेंड: बैंकिंग ग्राहकों के लिए चेतावनी
साइबर सुरक्षा और सावधानी:
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आधुनिक तरीका: इस मामले में साइबर अपराधियों ने केवल वॉइस कॉल के जरिए झांसा देने के बजाय फर्जी ऐप और बैंक के लोगो का इस्तेमाल कर पीड़ित का मनोवैज्ञानिक विश्वास जीता।
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अनजान लिंक से बचें: सोशल मीडिया पर आने वाले किसी भी स्पॉन्सर्ड लिंक, अनजान नोटिफिकेशन या व्हाट्सएप पर भेजे गए एपीके (APK) फाइल से कभी भी बैंकिंग ऐप डाउनलोड न करें।
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आधिकारिक प्लेटफॉर्म: बैंकिंग से जुड़े सभी एप्लीकेशन केवल गूगल प्ले स्टोर या एप्पल ऐप स्टोर से ही डाउनलोड करें और बैंक कभी भी वीडियो कॉल पर गोपनीय जानकारी नहीं मांगता।





