Mumbai Train Blasts 2006: हवाना बैठक और अमेरिकी दबाव को लेकर निशिकांत दुबे ने कांग्रेस को घेरा, राहुल गांधी से मांगा जवाब

भारतीय जनता पार्टी के सांसद निशिकांत दुबे ने बुधवार को जुलाई 2006 में हुए मुंबई ट्रेन बम धमाकों के बाद की स्थितियों का हवाला देते हुए कांग्रेस नेतृत्व पर तीखा निशाना साधा है. सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर एक पोस्ट के जरिए उन्होंने पिछली यूपीए सरकार के कूटनीतिक रुख की तुलना मौजूदा सरकार के सख्त रुख से की. दुबे ने आरोप लगाया कि कांग्रेस नीत गठबंधन ने निर्णायक सैन्य कार्रवाई करने के बजाय अमेरिकी कूटनीतिक दबाव के आगे घुटने टेक दिए थे और हवाना बैठक में देश की संप्रभुता से जुड़े बड़े फैसले लेने की तैयारी कर ली थी.
🇮🇳 2. मुंबई धमाकों के बाद पाकिस्तान को मुंहतोड़ जवाब देने के बजाय बातचीत का रास्ता चुना, विकिलीक्स के खुलासों का दिया हवाला
दुबे ने 16 सितंबर 2006 को हवाना में तत्कालीन प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह और पाकिस्तान के राष्ट्रपति परवेज मुशर्रफ के बीच हुई द्विपक्षीय बैठक का जिक्र करते हुए इसे विदेशी दबाव का नतीजा बताया. जुलाई 2006 में मुंबई की लोकल ट्रेनों में हुए सिलसिलेवार धमाकों में लगभग 200 लोगों की जान चली गई थी और देश में पाकिस्तान के खिलाफ जबरदस्त आक्रोश था. हालांकि, विकिलीक्स के खुलासों का हवाला देते हुए भाजपा सांसद ने आरोप लगाया कि यूपीए नेतृत्व व्यापक समझौतों के तहत कारगिल, पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (PoK) और सर क्रीक के मामले में पाकिस्तान को रियायतें देने के लिए तैयार था.
🇺🇸 3. वाशिंगटन में राष्ट्रपति बुश को सौंपी गई थी बैठकों की जानकारी, परमाणु समझौते पर भी उठाए सवाल
निशिकांत दुबे ने 22 सितंबर 2006 को वाशिंगटन में अमेरिकी राष्ट्रपति जॉर्ज डब्ल्यू बुश और दक्षिण एशियाई नेताओं के बीच हुई बैठकों के ऐतिहासिक रिकॉर्ड का जिक्र किया. उन्होंने दावा किया कि द्विपक्षीय बातचीत की पूरी जानकारी भारत-अमेरिका परमाणु समझौते के तहत अमेरिकी राष्ट्रपति को सौंपी गई थी. उनका कहना था कि इस कूटनीति के जरिए देश की रणनीतिक प्राथमिकताओं से समझौता किया गया और बातचीत की आड़ में संवेदनशील मुद्दों पर ढिलाई बरती गई.
🗣️ 4. राहुल गांधी से मांगा गया जवाब, ‘ऑपरेशन सिंदूर’ और 2006 के फैसलों की तुलना करने की दी चुनौती
दोनों दौर की कार्यशैली की तुलना करते हुए निशिकांत दुबे ने कांग्रेस नेता राहुल गांधी से साल 2006 की कूटनीतिक बैठकों और मौजूदा सरकार द्वारा पहलगाम आतंकी हमले के बाद चलाए गए ‘ऑपरेशन सिंदूर’ जैसी सख्त कार्रवाई के बीच अंतर पर जवाब मांगा है. उन्होंने कहा कि राहुल गांधी को देश की जनता को यह समझाना चाहिए कि पूर्व की सरकारों में आतंकवाद के खिलाफ नरम रुख क्यों अपनाया गया था, जबकि वर्तमान सरकार सीमा पार आतंकवाद का मुंहतोड़ जवाब दे रही है.





