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महाराष्ट्र

IAS Tukaram Munde Exposes Hospital Bills: 11.50 रुपये का IV सेट 325 में क्यों? मेडिकल कंज्यूमेबल्स की कीमतों पर बड़ा सवाल

अस्पताल में इलाज कराने के दौरान मरीज के हाथ में जो भारी-भरकम बिल आता है, उसमें कई ऐसी चीजें शामिल होती हैं जिनकी असली खरीद कीमत (ट्रेड प्राइस) शायद ही किसी मरीज को पता होती है. अब महाराष्ट्र के वरिष्ठ IAS अधिकारी तुकाराम मुंडे ने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट के जरिए मेडिकल कंज्यूमेबल्स की कीमत और उनकी ट्रेड प्राइस के बीच के चौंकाने वाले अंतर पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं. उन्होंने महाराष्ट्र के एक सर्वे का हवाला देते हुए बताया कि महज 11.50 रुपये के IV इन्फ्यूजन सेट की MRP 325 रुपये तक वसूली जा रही है.

💉 2. सिरिंज और कैथेटर की कीमतों में भी भारी अंतर, ट्रेड प्राइस से कई गुना ज्यादा वसूला जा रहा है दाम

सिर्फ IV सेट ही नहीं, बल्कि तुकाराम मुंडे के पोस्ट में दिए गए अन्य उदाहरण भी हैरान करने वाले हैं. रिपोर्ट के अनुसार, 6 रुपये 75 पैसे में मिलने वाली सिरिंज की MRP 57 रुपये 20 पैसे और 29 रुपये 41 पैसे में खरीदे गए कैथेटर की MRP 310 रुपये तक दर्ज की गई. खुले बाजार में जहां ग्राहकों के पास विकल्प होते हैं, वहीं अस्पताल में भर्ती मरीज के पास इलाज के दौरान इन चीजों की कीमत जांचने या दूसरे ब्रांड से तुलना करने का कोई मौका नहीं होता और खर्च सीधे बिल में जुड़ जाता है.

🔄 3. निर्माता से लेकर अस्पताल तक कैसे बढ़ती है कीमत, मरीज और अस्पताल के बीच बना रहता है बड़ा ‘इनफॉर्मेशन गैप’

मेडिकल सप्लाई की इस लंबी चेन में सामान निर्माता से निकलकर डिस्ट्रीब्यूटर और सप्लायर के रास्ते अस्पताल तक पहुंचता है, जिसमें कीमत बदलती रहती है. लेकिन अंत में भुगतान करने वाले मरीज को यह कभी पता नहीं चल पाता कि अस्पताल ने वह सामान असल में कितने में खरीदा है और बिल में उसकी कितनी कीमत लगाई गई है. मरीज और अस्पताल के बीच का यह सूचना अंतराल (इनफॉर्मेशन गैप) मरीजों की जेब पर भारी पड़ रहा है.

⚖️ 4. दवाओं पर है प्राइस कंट्रोल, लेकिन अधिकतर मेडिकल कंज्यूमेबल्स और डिवाइस पर कीमत की कोई सीमा तय नहीं

भारत में दवाओं की कीमतों के नियमन के लिए ‘Drugs (Prices Control) Order, 2013’ और नेशनल फार्मास्युटिकल प्राइसिंग अथॉरिटी (NPPA) जैसी व्यवस्थाएं मौजूद हैं, लेकिन ज्यादातर मेडिकल डिवाइस और कंज्यूमेबल्स पर कीमतें तय करने के कड़े नियम लागू नहीं हैं. इसी को ध्यान में रखते हुए Department of Pharmaceuticals और NPPA से ट्रेड खरीद मूल्य व घोषित MRP के बीच के इस बड़े अंतर को पाटने के लिए स्पष्ट दिशा-निर्देश बनाने की सिफारिश की गई है.

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