Manendragarh News: मनेंद्रगढ़ में 44 लाख की लागत से बन रही नाली बनी जी का जंजाल, दो महीने से अधूरा पड़ा है निर्माण

एमसीबी: छत्तीसगढ़ के मनेंद्रगढ़ शहर के वार्ड नंबर 16 में नगर पालिका द्वारा करीब 44 लाख रुपए की बड़ी लागत से नाली का निर्माण कार्य करवाया जा रहा है। लेकिन यह नाला स्थानीय रहवासियों के लिए सुविधा के बजाय लगातार एक बड़ी परेशानी और डर का सबब बनता जा रहा है। पिछले करीब दो महीने से यह निर्माण कार्य बीच में ही अधूरा लटका हुआ है, और 100 मीटर से अधिक लंबी इस नाली को कई स्थानों पर पूरी तरह खुला छोड़ दिया गया है। स्थिति यह है कि जिन लोगों के घरों के ठीक सामने यह नाली खुली पड़ी है, वहां हर पल किसी बड़े हादसे का गंभीर डर बना रहता है। स्थानीय नागरिकों का आरोप है कि इस नाली निर्माण के दौरान पूर्व में भी कई छोटी-मोटी दुर्घटनाएं हो चुकी हैं, इसके बावजूद जिम्मेदार अधिकारियों और ठेकेदार द्वारा सुरक्षा के कोई पुख्ता इंतजाम नहीं किए गए हैं।
⚠️ घर के सामने खुली नाली और बाहर निकली सरिया, हर कदम पर मंडरा रहा हादसों का खतरा
क्षेत्रीय लोगों के मुताबिक, जब से निर्माण कार्य शुरू हुआ है तब से नाली कई जगहों पर अधूरी ही छोड़ी गई है। कहीं गहरे गड्ढे खुले पड़े हैं तो कहीं लोहे की नुकीली सरिया बाहर झांक रही है। सबसे ज्यादा विकट परेशानी उन परिवारों को उठानी पड़ रही है, जिनके मकानों के ठीक मुहाने पर नाली का निर्माण चल रहा है। लोगों का कहना है कि घर से बाहर कदम रखते ही सामने खुली नाली होने के कारण छोटे बच्चों और बुजुर्गों को बेहद सावधानी के साथ चलना पड़ता है। बारिश के मौसम में हालात और भी ज्यादा खतरनाक हो जाते हैं, क्योंकि जलभराव के कारण नाली की वास्तविक गहराई और उसमें छिपी लोहे की सरिया बिल्कुल स्पष्ट दिखाई नहीं देती है।
🦟 गंदा पानी और कचरा जमा होने से फैली दुर्गंध, मच्छरों के पनपने से बढ़ा बीमारियों का खतरा
निर्माण कार्य अधूरा रहने के कारण नाली के भीतर पानी की समुचित निकासी की कोई व्यवस्था नहीं हो पाई है। कई स्थानों पर गंदा पानी और कचरा सड़ने लगा है, जिससे आसपास के पूरे इलाके में भयंकर दुर्गंध फैल रही है। लंबे समय से एक ही जगह पानी जमा रहने के कारण खतरनाक मच्छरों के तेजी से पनपने का खतरा भी कई गुना बढ़ गया है। लोगों का कहना है कि नाली की डिजाइन या ढलान ऐसी है कि पूरा पानी आगे नहीं निकल पाता, बल्कि आधा पानी वहीं सड़ता रहता है जिसमें मच्छर पनप रहे हैं। यदि समय रहते इस नाली का निर्माण पूरा नहीं कराया गया और पानी की निकासी सुचारू नहीं की गई, तो आने वाले दिनों में यह क्षेत्र किसी बड़ी बीमारी की चपेट में आ सकता है।
🚨 पहले भी शहर में हो चुके हैं दर्दनाक हादसे, फिर भी नहीं चेत रहा प्रशासन
मनेंद्रगढ़ शहर में पहले भी खुली और असुरक्षित नालियां लोगों के लिए जानलेवा साबित हो चुकी हैं। शहर में पूर्व में भी खुली नाला या नाली में गिरने से एक बुजुर्ग महिला की अकाल मौत होने की दर्दनाक घटना सामने आ चुकी है। इन सब भयानक हादसों के बावजूद शहर के कई हिस्सों में आज भी नालियां बिना किसी बैरिकेडिंग के खुली पड़ी हैं। ऐसे में वार्ड नंबर 16 में घरों के ठीक सामने लंबे समय से खुली पड़ी नाली और बाहर निकली लोहे की सरिया को लेकर रहवासियों की चिंता और डर पूरी तरह स्वाभाविक एवं जायज है।
🏛️ जिम्मेदारों के दावों के बीच सुरक्षा इंतजामों पर सवाल, नोटिस पर नोटिस दे रहा प्रशासन
एक तरफ जहां नगर पालिका अध्यक्ष बारिश का मौसम खत्म होने के बाद निर्माण कार्य को पूरा करवाने की बात कह रहे हैं, वहीं मुख्य नगरपालिका अधिकारी (CMO) लापरवाह ठेकेदार को लगातार नोटिस जारी करने की बात दोहरा रहे हैं। लेकिन जमीनी हक़ीक़त यह है कि आज भी आम नागरिकों के घरों के सामने नाली खुली पड़ी है और उसमें बाहर निकली लोहे की सरिया किसी भी वक्त एक बड़े और गंभीर हादसे का कारण बन सकती है। स्थानीय लोगों का कहना है कि नगर पालिका को सिर्फ ठेकेदार से निर्माण पूरा कराने की चिंता नहीं होनी चाहिए, बल्कि जब तक काम पूरा नहीं होता तब तक लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की नैतिक जिम्मेदारी भी प्रशासन की ही है। नगरपालिका के अधिकारियों का कहना है कि नाली का निर्माण कार्य जारी है और ठेकेदार को सीसी कार्य के लिए पहले ही तीन बार नोटिस दिए जा चुके हैं। अब ठेकेदार को अंतिम बार नोटिस दिया जाएगा और काम न होने पर परिषद के सामने मामला रखकर नियमानुसार आगामी कार्रवाई की जाएगी।
🤝 वार्डवासियों ने की पुख्ता सुरक्षा घेरे और अधूरे काम को जल्द पूरा करने की मांग
परेशान वार्डवासियों ने नगर पालिका प्रशासन को अल्टीमेटम देते हुए कड़े शब्दों में मांग की है कि इस अधूरे नाली निर्माण को युद्धस्तर पर जल्द पूरा किया जाए, खुली नाली के आसपास सुरक्षा के लिए घेराबंदी (बैरिकेडिंग) की जाए, बाहर निकली हुई खतरनाक सरिया को सुरक्षित किया जाए और जल निकासी के पुख्ता इंतजाम किए जाएं। अब यह देखना बेहद दिलचस्प और अहम होगा कि नगर पालिका प्रशासन इस गंभीर समस्या का समाधान किसी अनहोनी या दुर्घटना के होने से पहले कर पाता है या फिर हमेशा की तरह किसी हादसे के बाद ही जिम्मेदारी तय करने की रस्म अदायगी शुरू की जाती है।




