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मूक-बधिर दिव्यांगों के बीच पूर्व विधायक कुणाल षाड़ंगी ने बांटे फेस शील्ड,इसलिए नहीं दिया कवर मास्‍क

जमशेदपुर।  हम अपनी सारी समस्याएं, सुख-दुख अपनी जबान से बताते हैं। खुशियां-गम प्रकट करते हैं, लेकिन क्या हमने ये कभी सोचा है कि जो बेजुबान हैं, बोल और सुन नहीं सकते उनकी भी तो भावनाएं होती हैं। ला-ग्रैविटी टी कैफे में अब महज होम डिलीवरी होती है। कर्मचारी मांग के हिसाब से भोजन बनाकर डिलीवरी करते हैं। स्थिति सामान्य होने और लॉकडाउन पूरी तरह से खुलने की उम्मीद में संघर्षरत इन बेजुबानों के स्वास्थ्य और कोरोना संक्रमण से सुरक्षा को देखते हुए झारखंड के बहरागोड़ा विधानसभा क्षेत्र के पूर्व विधायक कुणाल षाड़ंगी ने फेस शील्ड वितरित किया।

फेस शील्ड क्यों, कवर-मास्क क्‍यों नहीं ?

कुणाल ने बताया कि फेस शील्ड इसलिए क्योंकि इन्हें साइन लैंग्वेज में बात करने और लिप-रीडिंग करने में आसानी हो। कवर मास्क से इन्हें संवाद करने में अत्यंत कठिनाई होती है और बेजुबान लोग दूसरों से संवाद नहीं कर पातें। ला-ग्रैविटी चलाने वाले अविनाश दुग्गर के अनुसार लॉकडाउन के इस दौर में आने वाले समय में होटल-रेस्तरां खुलने की उम्मीद के बीच फिलहाल चल रहे होम डिलीवरी के सीमित कार्य में खास सावधानी की जरूरत है। उन्हें इस बात का संतोष है कि अब फेस शील्ड के साथ बेहतर तरीके से होम डिलीवरी का कार्य उनके कर्मचारी कर पाएंगे।

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