Kharar Maharaja Ajj Sarovar: खरड़ के ऐतिहासिक ‘महाराजा अज सरोवर’ के लिए केंद्र से ₹93.94 करोड़ मंजूर, 40 साल बाद मिली सफलता

खरड़: पंजाब के खरड़ स्थित अत्यंत ऐतिहासिक और धार्मिक महत्व वाले ‘महाराजा अज सरोवर’ के कायाकल्प और पुनर्विकास (Redevelopment) के लिए केंद्र सरकार ने 93.94 करोड़ रुपये के बड़े बजट को औपचारिक मंजूरी दे दी है।
इस वित्तीय स्वीकृति के साथ ही सरोवर के संरक्षण के लिए पिछले करीब 40 वर्षों से निरंतर चले आ रहे जनसंघर्ष और प्रयासों को ऐतिहासिक सफलता मिली है।
परियोजना की मंजूरी से महाराजा अज सरोवर को धार्मिक, ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और अंतरराष्ट्रीय पर्यटन के नक्शे पर एक प्रमुख केंद्र के रूप में विकसित करने का मार्ग पूरी तरह प्रशस्त हो गया है।
🎉 ‘4 दशकों के समर्पण और विश्वास की जीत’: विकास कमेटी ने जताया केंद्र और पंजाब सरकार का आभार
परियोजना स्वीकृति पर स्थानीय नागरिकों का उत्साह और धन्यवाद प्रस्ताव:
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चार दशकों का संघर्ष सफल: श्री राम मंदिर अज सरोवर विकास कमेटी के पदाधिकारियों ने केंद्र सरकार के इस निर्णय पर गहरा हर्ष व्यक्त करते हुए कहा कि यह केवल एक निर्माण परियोजना नहीं, बल्कि खरड़वासियों के 40 वर्षों के समर्पण, सेवा और अटूट विश्वास की विजय है।
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विश्व स्तरीय पर्यटन केंद्र बनेगा: कमेटी पदाधिकारियों ने रेखांकित किया कि इस कायाकल्प से ऐतिहासिक सरोवर को वर्ल्ड क्लास टूरिज्म हब और पंजाब के मुख्य प्रवेश द्वार के रूप में स्थापित करने की संभावनाएं बेहद प्रबल हो गई हैं।
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नेतृत्व का जताया आभार: विकास कमेटी ने पंजाब के राज्यपाल गुलाब चंद कटारिया, मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान, केंद्रीय पर्यटन मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत और केंद्र सरकार के प्रति विशेष आभार व्यक्त किया, जिनके सक्रिय समन्वय से परियोजना स्वीकृत हुई।
📜 26 मार्च 2026 को राज्यपाल ने दिया था भरोसा: डीपीआर तैयार कर केंद्र को भेजी गई थी रिपोर्ट
परियोजना की प्रशासनिक प्रक्रिया और स्वीकृति की रूपरेखा:
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समारोह में पहुंचे थे राज्यपाल: कमेटी पदाधिकारियों ने बताया कि पंजाब के राज्यपाल गुलाब चंद कटारिया 26 मार्च 2026 को श्री राम मंदिर में आयोजित मूर्ति स्थापना एवं प्राण-प्रतिष्ठा समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए थे, जहां उन्होंने सरोवर के विकास का दृढ़ आश्वासन दिया था।
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सक्रियता से बनी DPR: इसके उपरांत मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान के सीधे दिशा-निर्देश पर पंजाब सरकार के प्रशासनिक अधिकारियों ने एक विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (DPR) तैयार कर केंद्रीय पर्यटन मंत्रालय को प्रेषित की।
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कई चरणों की समीक्षा के बाद मुहर: दोनों सरकारों के बीच बहुस्तरीय तकनीकी विचार-विमर्श और समीक्षा के बाद अंततः इस बहुप्रतीक्षित परियोजना को अंतिम प्रशासनिक और वित्तीय स्वीकृति प्रदान कर दी गई।
🛕 133 कनाल क्षेत्र में विस्तृत है पावन सरोवर: भगवान श्री राम के दादा महाराजा अज से जुड़ा है इतिहास
सरोवर की ऐतिहासिक, धार्मिक और पुरातात्विक पृष्ठभूमि:
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रघुकुल से सीधा संबंध: लगभग 133 कनाल के विशाल भूभाग में फैला ‘महाराजा अज सरोवर’ सनातन आस्था का अनूठा केंद्र है। मान्यता के अनुसार यह पवित्र स्थल मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्री राम चंद्र जी के दादा, चक्रवर्ती सम्राट महाराजा अज की तपस्थली और स्मृति से जुड़ा हुआ है।
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त्रिवेणी संगम की विरासत: ब्रिटिश हुकूमत के ऐतिहासिक रिकॉर्ड्स में भी उल्लेख मिलता है कि यहां से हिंदू, बौद्ध और जैन परंपराओं से संबंधित महत्वपूर्ण पुरातात्विक अवशेष प्राप्त हुए थे।
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संरक्षण के पुराने आदेश: इन दुर्लभ ऐतिहासिक साक्ष्यों को दृष्टिगत रखते हुए तत्कालीन प्रशासन ने भी इस पूरे परिसर के विशेष संरक्षण और देखरेख के लिए आधिकारिक निर्देश जारी किए थे।
🛠️ साल 1986 से जारी था जनसहयोग का अभियान: जनभागीदारी से बने थे घाट और मंदिर
सरोवर पुनरुद्धार की जनयात्रा:
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1986 में शुरू हुआ अभियान: वर्ष 1986 में स्थानीय प्रबुद्ध नागरिकों ने एकजुट होकर सरोवर के संरक्षण और जीर्णोद्धार के लिए व्यापक जनअभियान की नींव रखी थी।
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घाटों का निर्माण: जनसहयोग और कारसेवा के माध्यम से सरोवर के प्राचीन घाटों का पुनरुद्धार किया गया तथा श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए भव्य श्री राम भवन की स्थापना की गई।
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पूर्वजों को समर्पित मंदिर: स्थानीय भक्तों और दानदाताओं के सहयोग से भगवान श्री राम और उनके पूज्य पूर्वजों को समर्पित एक भव्य और दर्शनीय मंदिर का निर्माण भी इस परिसर में संपन्न कराया गया।
🌊 सरोवर में स्वच्छ जल की बहाली सबसे अहम: कुदरती स्रोतों के पुनर्जीवन की मांग
पारिस्थितिकी तंत्र और भविष्य के पर्यटन की चुनौतियां:
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शहरीकरण से सूखे प्राकृतिक जल स्रोत: कमेटी के सदस्यों ने आशा व्यक्त की है कि सिविल निर्माण कार्यों के साथ-साथ सरोवर में नियमित व स्वच्छ जल की पर्याप्त आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए भी ठोस जल प्रबंधन किया जाएगा।
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इकोलॉजिकल बहाली जरूरी: क्षेत्र में तेज अनियंत्रित कंक्रीट निर्माण और शहरीकरण के कारण सरोवर के प्राकृतिक जल स्रोतों पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ा है।
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राष्ट्रीय स्तर का पर्यटन स्थल बनने की क्षमता: यदि सरोवर में स्वच्छ जल का निरंतर प्रवाह सुनिश्चित कर इसके मूल पारिस्थितिक (Ecological) स्वरूप को बहाल कर दिया जाए, तो यह धरोहर अपनी धार्मिक महत्ता के साथ-साथ पंजाब के सबसे शांत और मनोरम पर्यावरण-पर्यटन स्थलों में शुमार होगी।





