हथियार लाइसेंस रद्द करने पर पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट का बड़ा फैसला: तुरंत खतरा साबित न होना नहीं है पर्याप्त आधार

चंडीगढ़: पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसले में स्पष्ट किया है कि यदि किसी लाइसेंस धारक को हथियार लाइसेंस जारी करते समय उसकी पात्रता और उसकी जान-माल के खतरे को अच्छी तरह परखा गया था, तो बाद में वह व्यक्ति यदि अपनी जान और संपत्ति को ‘तत्काल खतरे’ में होने का ठोस सबूत पेश करने में असफल रहता है, तो केवल इसी अकेले आधार पर उसका हथियार लाइसेंस रद्द नहीं किया जा सकता।
अदालत ने हथियार लाइसेंस रद्द करने और कानूनी अपील खारिज करने के पुराने आदेशों को पूरी तरह से रद्द कर दिया है। इसके साथ ही, मामला जींद के जिला मजिस्ट्रेट के पास दोबारा भेज दिया गया है। हाईकोर्ट ने जिला मजिस्ट्रेट को यह निर्देश दिए हैं कि वे सभी संबंधित पहलुओं पर नए सिरे से विचार करें और याचिकाकर्ता को सुनवाई का उचित अवसर देने के बाद कानून के अनुसार नया फैसला लें। यह महत्वपूर्ण फैसला जस्टिस कुलदीप तिवारी की पीठ ने एक याचिका पर सुनवाई करते हुए सुनाया है।
🏛️ जिला मजिस्ट्रेट और कमिश्नर के आदेश को दी गई थी चुनौती
अदालत में जींद के जिला मजिस्ट्रेट के 21 मार्च 2023 के उस आदेश को चुनौती दी गई थी, जिसके तहत याचिकाकर्ता का हथियार लाइसेंस कथित दुरुपयोग, गैर-जिम्मेदाराना और लापरवाही भरे व्यवहार तथा उसकी जान-माल को तत्काल खतरा नहीं होने के आधार पर रद्द कर दिया गया था। इसके बाद याचिकाकर्ता ने इस फैसले के खिलाफ कानूनी अपील की थी, जिसे कमिश्नर ने 26 जून 2024 को खारिज कर दिया था।
जिला मजिस्ट्रेट के आदेश की गहराई से जांच करते हुए जस्टिस तिवारी ने पाया कि यह मुख्य रूप से दो आधारों पर टिका था—पहला यह कि याचिकाकर्ता अपनी जान और संपत्ति को किसी खतरे का ऐसा सबूत पेश नहीं कर सका जिसके लिए लाइसेंसी हथियार रखना जरूरी हो, और दूसरा यह कि लाइसेंसी हथियार के कथित दुरुपयोग को लेकर उसके खिलाफ एफआईआर दर्ज हुई थी।
🔍 कोर्ट की मुख्य टिप्पणियां और कानूनी स्थिति
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लाइसेंस जारी करने की प्रक्रिया: अदालत ने कहा कि याचिकाकर्ता की जान और संपत्ति को खतरे का मुद्दा हथियार लाइसेंस जारी करते समय संबंधित अथॉरिटी को देखना चाहिए था, और पूरी तरह पात्र पाए जाने के बाद ही उसे लाइसेंस जारी किया गया था। बाद में यह साबित न कर पाना कि उसे तत्काल खतरा था, लाइसेंस रद्द करने का पर्याप्त आधार नहीं बन सकता।
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लंबित मुकदमे का पहलू: राज्य सरकार की ओर से दलील दी गई थी कि याचिकाकर्ता ने अपना लाइसेंसी हथियार किसी अन्य व्यक्ति को सौंप दिया था, जिसने एक शादी समारोह में खुलेआम हवा में गोली चलाई और उसका वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ। इस पर जस्टिस तिवारी ने स्पष्ट किया कि इस घटना में कोई भी व्यक्ति घायल नहीं हुआ था, संबंधित एफआईआर का मुकदमा अभी अदालत में लंबित है, और याचिकाकर्ता पर लगाए गए आरोपों को अभियोजन पक्ष द्वारा सबूतों के जरिए साबित किया जाना अभी बाकी है।
याचिकाकर्ता के वकील ने अदालत को आश्वस्त किया कि उनका मुवक्किल भविष्य में हथियार लाइसेंस की किसी भी शर्त का उल्लंघन नहीं करेगा और किसी अन्य व्यक्ति को अपने लाइसेंसी हथियार का इस्तेमाल करने की अनुमति भी नहीं देगा।





