Jharkhand High Court News: JPSC सिविल सेवा परीक्षा रद्द होने के खिलाफ याचिका पर सोमवार को फिर होगी सुनवाई

झारखंड लोक सेवा आयोग (JPSC) की 11वीं से 13वीं संयुक्त सिविल सेवा परीक्षा-2023, फूड सेफ्टी ऑफिसर (FSO) और चाइल्ड डेवलपमेंट प्रोजेक्ट ऑफिसर (CDPO) की नियुक्ति प्रक्रिया को राज्य सरकार द्वारा रद्द किए जाने के निर्णय के खिलाफ दायर याचिकाओं पर झारखंड हाईकोर्ट में सुनवाई शुरू हो गई है। जस्टिस दीपक रौशन की अदालत में शुक्रवार को इस मामले पर लंबी सुनवाई हुई, जिसमें याचिकाकर्ताओं, राज्य सरकार और हस्तक्षेपकर्ता की ओर से पक्ष रखते हुए कई महत्वपूर्ण दलीलें पेश की गईं। मामले की गंभीरता को देखते हुए अदालत ने अब इस पर अगली सुनवाई सोमवार को दोपहर 2:15 बजे तय की है।
🔍 याचिकाकर्ताओं के वकीलों ने सरकार के फैसले पर उठाए गंभीर सवाल
सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ताओं के अधिवक्ताओं (इंद्रजीत सिन्हा, अमृतांश वत्स और प्रेरणा झुनझुनवाला) ने दलील दी कि इन परीक्षाओं में सफल अभ्यर्थियों के खिलाफ न तो कोई एफआईआर दर्ज हुई है और न ही किसी प्रकार के पैसों के लेनदेन का कोई ठोस सबूत (मनी ट्रेल) सामने आया है। वकीलों ने तर्क दिया कि केवल टीडीपीएल (TDPL) की संलिप्तता की आशंका और बिना किसी ठोस CID साक्ष्य के पूरी चयन प्रक्रिया को रद्द करना पूरी तरह अनुचित है। यह भी कहा गया कि परिणाम और परीक्षा रद्द करने का अधिकार राज्य सरकार के पास नहीं बल्कि आयोग के पास होता है, और जल्दबाजी में लिया गया यह फैसला अभ्यर्थियों के हितों के खिलाफ है।
🏛️ राज्य सरकार और हस्तक्षेपकर्ता का पक्ष, सोमवार को होगी अगली सुनवाई
राज्य सरकार की ओर से अपर महाधिवक्ता अच्युत केशव ने याचिका की मेंटेनेबिलिटी पर सवाल उठाते हुए कहा कि जांच में बड़े पैमाने पर गड़बड़ी के संकेत मिले हैं, जहाँ दागी और बेदाग अभ्यर्थियों को अलग करना संभव नहीं है। वहीं, हस्तक्षेपकर्ता के वकील ने JPSC द्वारा एसओपी (SOP) का पालन नहीं किए जाने का मुद्दा उठाया। अब इस हाई-प्रोफाइल मामले में सोमवार को महाधिवक्ता रोहिताश्य रॉय राज्य सरकार की तरफ से अपना पक्ष रखेंगे, जिसके बाद अदालत आगे का निर्णय लेगी।
