Amritsar Stubble Burning News: अमृतसर में पराली जलाने के मामलों में भारी उछाल, पंजाब में बना नंबर वन जिला

एक तरफ जहां जिला प्रशासन की तरफ से किसानों को पराली न जलाने के लिए जागरूक करने के वास्ते जागरूकता वैन चलाई जा रही हैं और किसानों से अपील की जा रही है कि वे पराली को आग के हवाले न करें, बल्कि इसे खेतों में मिलाकर मिट्टी की उपजाऊ शक्ति को बचाए रखें; वहीं दूसरी तरफ धान की कटाई के शुरुआती हफ्तों में ही अमृतसर जिला पराली जलाने के मामलों में पूरे पंजाब में नंबर वन स्थान पर आ गया है। पिछले दो हफ्तों के दौरान जिले में पराली जलाने के 59 मामले सामने आ चुके हैं। खास बात यह है कि प्रशासन की तरफ से इन मामलों में अभी तक एक भी एफ.आई.आर. दर्ज नहीं की गई है, हालांकि एक-एक लाख रुपये के जुर्माने और नोटिस जरूर जारी किए गए हैं। पिछले साल प्रशासन ने पराली जलाने वाले किसानों पर दर्जनों एफआईआर दर्ज की थीं, लेकिन माना जा रहा है कि चुनावी सीजन के चलते इस बार प्रशासन नरमी बरत रहा है।
✈️ केंद्र सरकार का फ्लाइंग स्क्वॉड और प्रशासनिक व्यस्तता
पंजाब में पराली जलाने की घटनाओं को बेहद गंभीरता से लेते हुए केंद्र सरकार के प्रदूषण नियंत्रण विभाग की तरफ से एक फ्लाइंग स्क्वॉड का गठन किया गया है, जिसके तहत सभी जिलों के डिप्टी कमिश्नरों को अपने-अपने क्षेत्र की प्रतिदिन की रिपोर्ट सौंपनी होगी।
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एसआईआर (SIR) और जनगणना की ड्यूटी: इन दिनों विभिन्न विभागों के अधिकारी और कर्मचारी एसआईआर तथा अन्य प्रशासनिक ड्यूटियों में व्यस्त हैं, और इसके तुरंत बाद जनगणना का कार्य भी शुरू होने वाला है। यही वजह है कि प्रशासनिक अधिकारी पराली जलाने के मामलों पर उतना कड़ा फोकस नहीं कर पा रहे हैं जितनी अपेक्षा की जा रही थी।
📊 अन्य जिलों का हाल और खतरनाक होता AQI
आंकड़ों पर नजर डालें तो पिछले साल भी अमृतसर जिला ही पराली जलाने के मामलों में शीर्ष पर था:
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तरनतारन जिला: 28 मामलों के साथ दूसरे नंबर पर है।
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फिरोजपुर जिला: 5 मामलों के साथ तीसरे और गुरदासपुर 4 मामलों के साथ चौथे स्थान पर है।
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इसके अलावा मोगा, पटियाला और संगरूर में अभी तक दो-दो मामले सामने आए हैं, जिनके आने वाले दिनों में बढ़ने की पूरी संभावना है।
पराली जलाने से निकलने वाले जहरीले धुएं के कारण जिले का एयर क्वालिटी इंडेक्स (AQI) खतरनाक स्तर पर पहुंच गया है। वर्तमान में जिले के अलग-अलग इलाकों में औसत AQI 155 से 208 के बीच दर्ज किया जा रहा है, जबकि सामान्य दिनों में यह 50 से नीचे होना चाहिए। चूंकि अभी पराली जलाने की शुरुआत ही हुई है, ऐसे में आने वाले दिनों में प्रदूषण का स्तर और अधिक खतरनाक होने की आशंका जताई जा रही है।





