Machiwara News: सहकारिता विभाग की नई पॉलिसी से किसानों की बढ़ी मुश्किलें, कर्ज के लिए जमीन गिरवी रखने की शर्त

माछीवाड़ा साहिब क्षेत्र में सहकारिता विभाग द्वारा खेतीबाड़ी सहकारी सभाओं से कर्ज (Loan) लेने वाले किसानों के लिए एक नई और सख्त पॉलिसी लागू की गई है, जिसके चलते किसानों की चिंताएं काफी बढ़ गई हैं। सहकारिता विभाग की ओर से खेतीबाड़ी सभाओं को भेजे गए नए पत्रों के अनुसार, पहले किसानों को कर्ज लेने के लिए अपनी जमीन गिरवी नहीं रखनी पड़ती थी, लेकिन अब यदि कोई किसान 2 लाख रुपये से अधिक का कर्ज लेगा तो उसे अपनी जमीन गिरवी रखनी होगी और फर्द पर लिमिट लोन की एंट्री दर्ज करवानी होगी। इसके अलावा, पहले जहां 1 लाख रुपये का लिमिट लोन लेने के लिए किसानों को हिस्से के तौर पर 3 हजार रुपये जमा करवाने होते थे, उसे अब दोगुना कर छोटे किसानों के लिए 6 हजार रुपये और बड़े किसानों के लिए 9 हजार रुपये की अनिवार्य शर्त लागू कर दी गई है।
💰 बढ़ी ब्याज दरें और सब्सिडी को लेकर नई शर्तें
सहकारिता विभाग के पुराने नियमों के मुकाबले नए नियमों में किसानों के लिए आर्थिक बोझ काफी बढ़ा दिया गया है:
-
ब्याज दर में बढ़ोतरी: पहले कर्ज लेने वाले किसानों को कम ब्याज दर पर सब्सिडी मिलती थी, लेकिन नए नियमों के तहत 3 लाख रुपये से अधिक का कर्ज लेने वाले किसानों को निजी बैंकों से भी अधिक यानी 11 प्रतिशत तक ब्याज देना होगा।
-
सब्सिडी पर नियम: एक अन्य शर्त के अनुसार, यदि किसी छोटे किसान ने पहले से ही किसी अन्य बैंक से 3 लाख रुपये से अधिक का सब्सिडी वाला कर्ज लिया हुआ है, तो उसे खेतीबाड़ी सहकारी सभा से कर्ज लेते समय दोबारा सब्सिडी का लाभ नहीं मिलेगा और वह केवल एक ही जगह पर सब्सिडी का फायदा ले सकेगा।
📋 पुराने और नए सभी किसानों पर लागू होगी नई पॉलिसी
खेतीबाड़ी विभाग से जुड़े अधिकारियों ने जानकारी दी है कि सहकारिता विभाग के आदेशानुसार, जिन पुराने किसानों ने पहले से लिमिट लोन लिया हुआ है, उनके नए लिमिट लोन भी अब इसी नई पॉलिसी के हिसाब से ही तैयार किए जाएंगे। इसके अलावा, यदि कोई नया किसान भी खेतीबाड़ी सभा से लोन लेना चाहता है, तो उसे भी इन्हीं कड़े नियमों का पालन करना होगा।
आंकड़ों के मुताबिक, खेतीबाड़ी सभाओं से 2 लाख रुपये तक का लोन लेने वाले किसानों की संख्या काफी कम है, जबकि अधिकांश किसानों ने इससे अधिक का कर्ज ले रखा है। ऐसे में नई पॉलिसी के लागू होने से इन सभी किसानों पर न केवल अतिरिक्त ब्याज और हिस्सों का आर्थिक बोझ पड़ेगा, बल्कि उनकी जमीन भी विभाग के पास गिरवी रखवाई जाएगी, जिससे किसानों में रोष और चिंता का माहौल है।





