Mata Maurvi Shaktipeeth Sikar: 120 फीट ऊंचा शिखर और आधुनिक डिजिटल गैलरी, खाटू श्याम की माता का बनेगा विशाल मंदिर

राजस्थान के सीकर जिले में स्थित विश्व प्रसिद्ध खाटू श्याम बाबा के दरबार में रोजाना देश-विदेश से लाखों भक्त पहुंचते हैं। इसी कड़ी में अब सीकर के पिपराली स्थित लखीपुरा में आस्था और आध्यात्म का एक नया और भव्य अध्याय शुरू होने जा रहा है। यहाँ लगभग दो हेक्टेयर जमीन पर खाटू श्याम बाबा की माता मौरवी का विशाल शक्तिपीठ बनाया जाएगा। इस मंदिर की सबसे बड़ी और अनोखी विशेषता यह होगी कि यहाँ माता मौरवी के साथ उनके 14 वर्षीय पुत्र बर्बरीक (खाटू श्याम बाबा) का पूरा देह स्वरूप (संपूर्ण प्रतिमा) स्थापित किया जाएगा, जो उनके शीश दान से पहले के माता-पुत्र संबंधों, संस्कारों और शौर्य की गाथा को बयां करेगा।
💎 500 करोड़ की लागत और 120 फीट ऊंचा होगा मुख्य शिखर: आधुनिक डिजिटल गैलरी और वैदिक संस्कार शाला का होगा निर्माण
इस भव्य परियोजना पर कुल 500 करोड़ रुपये की लागत आएगी। मंदिर का मुख्य शिखर 120 फीट ऊंचा होगा, और नवंबर महीने में इसका भूमि पूजन संपन्न होगा। ब्रह्मलीन संत श्रीचंद महाराज द्वारा दान की गई इस जमीन पर बनने वाले इस परिसर में केवल मंदिर ही नहीं, बल्कि आधुनिक डिजिटल गैलरी, वैदिक संस्कार शाला, औषधीय उद्यान और चैरिटेबल ट्रस्ट का विशाल हब भी तैयार किया जाएगा। वर्तमान में जयपुर के सिविल लाइंस में माता मौरवी की विशेष अखंड ज्योति प्रज्वलित कर दी गई है, जिसे मंदिर निर्माण पूरा होने के बाद लखीपुरा शक्तिपीठ में स्थापित किया जाएगा। इस ऐतिहासिक परियोजना से यूके, यूएस, ऑस्ट्रेलिया और सिंगापुर समेत 10 देशों और 18 राज्यों के 111 शहरों के प्रतिनिधि जुड़ रहे हैं।
📈 शेखावाटी में 40% बढ़ेगा धार्मिक पर्यटन: स्थानीय उद्योगों और रोजगार को मिलेगा बड़ा बढ़ावा
खाटूधाम, सालासर और जीणमाता के त्रिकोण के बीच इस नए शक्तिपीठ के जुड़ जाने से शेखावाटी क्षेत्र में धार्मिक पर्यटन में करीब 40 प्रतिशत की बढ़ोतरी होने की संभावना है, जिससे स्थानीय होटल, हैंडीक्राफ्ट, ट्रांसपोर्ट और कुटीर उद्योगों को अभूतपूर्व बढ़ावा मिलेगा। उल्लेखनीय है कि खाटूधाम में केवल बाबा के शीश की पूजा की जाती है, जबकि लखीपुरा के इस शक्तिपीठ में माता मौरवी के साथ वीर बर्बरीक की पूर्ण देह की प्रतिमा के दर्शन हो सकेंगे। महाभारत युद्ध के समय माता मौरवी द्वारा अपने पुत्र को दिए गए वचन—”जो पक्ष हार रहा हो, उसी का साथ देना”—के कारण ही बाबा श्याम ‘हारे का सहारा’ कहलाए और उन्होंने भगवान कृष्ण को अपना शीश दान किया था।





