Punjab Drug Control Staff Shortage: पंजाब में फार्मा नशे पर लगाम लगाने के लिए सिर्फ 51 ड्रग इंस्पेक्टर तैनात, 36 हजार से ज्यादा मेडिकल स्टोर्स की निगरानी मुश्किल

चंडीगढ़: पंजाब में फार्मा नशे और गैर-कानूनी दवाइयों की बिक्री को लेकर एक अहम खबर सामने आई है, जो राज्य के लोगों के लिए गहरी चिंता का विषय है. दरअसल, राज्य में 36,112 रिटेल और थोक दवा विक्रेताओं पर कड़ी नजर रखने, दवाइयों की गुणवत्ता की जांच करने तथा प्रतिबंधित दवाइयों की अनधिकृत बिक्री रोकने के लिए केवल 51 ड्रग कंट्रोल अधिकारी ही तैनात हैं. इतने सीमित स्टाफ के कारण फार्मा नशे पर प्रभावी रोक लगाने को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं. सबसे बड़ी बात यह है कि पिछले 6 वर्षों के दौरान ड्रग कंट्रोल विभाग में एक भी नई भर्ती नहीं की गई है.
📊 क्षेत्रवार अधिकारियों की तैनाती और पिछले 6 सालों में मारे गए छापे
अधिकारियों की तैनाती की स्थिति पर नजर डालें तो लुधियाना में 6, अमृतसर में 5, जबकि जालंधर, मोहाली और पटियाला में 4-4 ड्रग कंट्रोल अधिकारी तैनात हैं. दूसरी तरफ, फतेहगढ़ साहिब, कपूरथला और पठानकोट जैसे कई महत्वपूर्ण जिलों में केवल 1-1 अधिकारी ही काम संभाल रहा है. हालांकि, 11 क्षेत्रीय लाइसेंसिंग अथॉरिटीज भी निगरानी कार्यों से जुड़ी हुई हैं, लेकिन अधिकारियों की भारी कमी के कारण नियमित निरीक्षण करना एक बहुत बड़ी चुनौती बना हुआ है. इसके बावजूद विभाग ने 1 अप्रैल, 2020 से 30 सितंबर, 2026 के बीच कुल 16,788 छापे मारे हैं और लाइसेंस प्राप्त तथा बिना लाइसेंस वाले ठिकानों से 20.64 करोड़ रुपये की दवाइयां जब्त की हैं, हालांकि इन सभी जब्त दवाइयों को सीधे तौर पर फार्मा नशे से जुड़ा हुआ नहीं माना जा सकता.
🩺 IMA के पूर्व अध्यक्ष की प्रतिक्रिया और निगरानी बढ़ाने की जरूरत
इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (IMA), पंजाब के पूर्व अध्यक्ष डॉ. सुनील कटारिया के अनुसार, इतने सीमित अधिकारियों के लिए हजारों मेडिकल दुकानों का नियमित निरीक्षण कर पाना व्यावहारिक रूप से बेहद मुश्किल है क्योंकि अधिकारियों को निरीक्षण के अलावा प्रशासनिक और अन्य जिम्मेदारियां भी निभानी पड़ती हैं. ऐसे में संयुक्त टीमों का गठन करके निगरानी को और अधिक मजबूत करने तथा प्रतिबंधित दवाइयों की अवैध बिक्री के खिलाफ सख्त से सख्त कार्रवाई करने की बेहद आवश्यकता है.





