Hazaribagh Budhiya Mata Temple: हजारीबाग के इस अनोखे मंदिर में नहीं है कोई प्रतिमा या पिंडी, दीवार की पूजा करने दूर-दूर से आते हैं भक्त

हजारीबाग: मां दुर्गा के कई रूप हैं, कहीं मां का चरण, कहीं नयन तो कहीं ज्वाला के रूप में उनकी आराधना की जाती है, लेकिन हजारीबाग के इचाक स्थित एक मंदिर में मां के पूरी तरह निराकार रूप की पूजा होती है. इस मंदिर की सबसे बड़ी खासियत यह है कि यहां न तो कोई देवी की प्रतिमा है और न ही कोई पिंडी, बल्कि भक्त सीधे मंदिर की दीवार की पूजा करते हैं. इस मंदिर से लोगों की आस्था इतनी गहरी है कि दूर-दराज के इलाकों से बड़ी संख्या में श्रद्धालु माता का आशीर्वाद लेने के लिए यहां पहुंचते हैं.
📜 200 साल पुरानी परंपरा और हैजा महामारी से जुड़ी है बुढ़िया माता मंदिर की कहानी
हजारीबाग के इचाक प्रखंड के बनसटांड़ में स्थित बुढ़िया माता मंदिर में नवरात्र के दौरान विशेष पूजा-अर्चना की जाती है. इस मंदिर में दीवार पर एक आकृति उभरी हुई है, और हर साल सप्तमी के दिन उस पर विशेष रूप से सिंदूर और घी अर्पित करने की पुरानी प्रथा है. इस मंदिर के साथ एक प्राचीन किवदंती जुड़ी हुई है, जिसके अनुसार वर्ष 1668 में इचाक में हैजा भयंकर महामारी के रूप में फैल गया था, तब एक बूढ़ी माता इचाक बाजार में प्रकट हुईं और महामारी को दूर करने के लिए मिट्टी देकर उसे गांव से दूर रखने को कहा. कुछ ही देर में माता वहां से अंतर्ध्यान हो गईं और धीरे-धीरे वह भयानक महामारी समाप्त हो गई. मान्यता है कि माता की दी हुई वही मिट्टी आगे चलकर दीवार के रूप में स्थापित हो गई, जिसकी पिछले 200 सालों से लगातार पूजा की जा रही है.
🙏 भक्तों की अटूट आस्था: सच्चे मन से मांगने पर पूरी होती है हर मुराद
यहाँ आने वाले श्रद्धालुओं का कहना है कि जो भी भक्त सच्चे मन से माता के दरबार में अपनी मन्नत मांगता है, मां उसकी हर इच्छा जरूर पूरी करती हैं. इस मंदिर की महिमा इतनी अपरंपार है कि यहाँ सिर्फ हजारीबाग ही नहीं, बल्कि आसपास के दूसरे राज्यों से भी लोग खिंचे चले आते हैं. यहाँ आने वाले भक्त मानते हैं कि इस पावन मंदिर की महिमा का बखान करना ठीक वैसी ही है जैसे ‘उगते सूरज को दीया दिखाने’ के समान है. अपनी अटूट श्रद्धा और विश्वास के चलते सालभर यहाँ भक्तों का तांता लगा रहता है, लेकिन शारदीय नवरात्र के दिनों में यहाँ का माहौल पूरी तरह भक्तिमय हो जाता है.





