Palamu Bangiya Durga Bari: पलामू के इस प्रसिद्ध पंडाल में सोने-चांदी के जेवरात से होता है मां दुर्गा का शृंगार, 112 साल पुराना है इतिहास

पलामू: जिले के बंगीय दुर्गा बाड़ी में स्थापित मां दुर्गा की प्रतिमा पूरे प्रमंडल भर में बेहद प्रसिद्ध है, जहाँ मां के अलौकिक दर्शन के लिए हर साल हजारों की संख्या में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ती है. दरअसल, बंगीय दुर्गा बाड़ी में मां दुर्गा की प्रतिमा का शृंगार बेहद भव्य और अनोखे तरीके से किया जाता है, जिसमें मुख्य रूप से शुद्ध सोने और चांदी के बहुमूल्य जेवरात का इस्तेमाल किया जाता है. इस आकर्षक शृंगार को पूरा करने में करीब तीन से चार घंटे का लंबा समय लगता है.
📜 112 साल पुराना है यहाँ की पूजा का इतिहास, भक्तों द्वारा दान किए गए गहनों से सजती हैं माता
पूजा समिति के सदस्य खुद मां का यह विशेष शृंगार करते हैं और उन्हें एक अत्यंत भव्य व दिव्य स्वरूप प्रदान करते हैं. माता के शृंगार में उपयोग होने वाले ये सभी सोने-चांदी के आभूषण श्रद्धालुओं द्वारा दान में दिए गए हैं. परंपरा के अनुसार, जब भी भक्तों की मनोकामनाएं पूरी होती हैं, तो वे अपनी श्रद्धा के अनुसार मां को सोने-चांदी के जेवर दान करते हैं, और उन्हीं आभूषणों से हर साल माँ का शृंगार किया जाता है. इस वर्ष 2026 में मां दुर्गा की प्रतिमा की ऊंचाई में करीब ढाई फीट की वृद्धि की गई है. आपको बता दें कि इस बंगीय दुर्गा बाड़ी की पूजा का गौरवशाली इतिहास पूरे 112 वर्ष पुराना है, और पलामू प्रमंडल में सबसे पहले भव्य तरीके से यहीं से दुर्गा पूजा की शुरुआत हुई थी.
🙏 भक्तों की अटूट आस्था और अध्यक्ष सैकत चटर्जी के विचार
बंगीय दुर्गा बाड़ी पूजा समिति के अध्यक्ष सैकत चटर्जी ने बताया कि धार्मिक रूप से ऐसा कोई नियम नहीं है कि केवल सोने-चांदी के जेवरात से ही मां का शृंगार किया जाए, बल्कि यह सब भक्तों की अटूट आस्था का परिणाम है कि वे मन्नत पूरी होने पर आभूषण दान करते हैं. इन सभी दान किए गए जेवरात को सुरक्षित रखकर मां के लिए सुंदर आभूषण तैयार किए गए हैं. समिति के पार्थ पतिन गुप्ता ने कहा कि इन स्वर्णिम और रजत आभूषणों से मां का शृंगार करने के बाद एक अलग ही आध्यात्मिक अनुभूति होती है और माता का बेहद अलौकिक रूप निखरकर सामने आता है, जिसे निहारने के लिए दूर-दराज से लोग यहाँ पहुँचते हैं.





