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मध्यप्रदेश

MP Fisheries Scheme: एमपी में मछली पालन बनेगा बड़ा उद्योग, 4 बड़े बांधों में शुरू होगा ‘केज कल्चर’, जानें डिटेल्स

Bhopal: मध्य प्रदेश में अब मत्स्य विभाग सिर्फ मछुआरों की रोजी-रोटी का साधन नहीं, बल्कि प्रदेश की आर्थिक तरक्की का बड़ा जरिया बनने जा रहा है। राज्य सरकार ने प्रदेश के 4 प्रमुख बांधों में ‘केज कल्चर’ (जाल के पिंजरों) के जरिए मछली पालन करने की योजना बनाई है। अगले 3 सालों में निवेश के जरिए 1 लाख केज स्थापित किए जाएंगे। इसके साथ ही एक्वापोनिक्स, हाइड्रोपोनिक्स और ग्रीनहाउस तकनीक से सब्जियों का भी उत्पादन होगा। सरकार का लक्ष्य मछली उत्पादन को 4.50 लाख टन से बढ़ाकर 11 लाख टन करना है। इस क्षेत्र में सरकार को अब तक 40 हजार करोड़ रुपये के निवेश प्रस्ताव मिल चुके हैं।

मछली पालन को मिला MSME और उद्योग का दर्जा

राजधानी भोपाल में आयोजित राष्ट्रीय मत्स्य सम्मेलन में इस परंपरागत व्यवसाय को बड़े उद्योग में बदलने पर मंथन हुआ। मुख्यमंत्री मोहन यादव ने ऐलान किया कि अब प्रदेश में मत्स्य पालन को फूड प्रोसेसिंग और MSME (सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम) सेक्टर से जोड़ा जाएगा। इससे मछली से जुड़े उत्पाद तैयार कर उनका निर्यात किया जा सकेगा। इसके अलावा, मत्स्य पालन को अब अन्य बड़े उद्योगों की तरह ही सरकारी सुविधाएं, प्रोत्साहन और भारी छूट प्रदान की जाएंगी।

निवेशकों को आकर्षित करने के लिए सरकार की खास रियायतें

इस सेक्टर में बड़े निवेश को बढ़ावा देने के लिए राज्य सरकार ने ‘फिशरीज लैंड लोकेशन गाइडलाइन’ जारी की है। इसके तहत निवेशकों को बांध के नजदीक कलेक्टर गाइडलाइन दर के मात्र 2 फीसदी वार्षिक किराए पर जमीन उपलब्ध कराई जाएगी। इसके साथ ही बांध के पास अस्थायी रूप से स्टोरेज, पैकिंग, सोलर यूनिट और ऑफिस पार्किंग जैसी ‘केजेस लिंक फैसिलिटी’ भी मिलेगी। एमएसएमई और एमपीआईडीसी (MPIDC) के तहत उद्योग लगाने की सुविधाएं, टेस्टिंग लेबोरेटरी और एक्वाकल्चर सपोर्ट भी मुहैया कराया जाएगा।

3 साल में 11 लाख टन उत्पादन का रखा गया लक्ष्य

मध्य प्रदेश के मुख्य सचिव अशोक वर्णवाल ने बताया कि वर्तमान में प्रदेश का मछली उत्पादन 4.50 लाख टन है। सरकार ने आधुनिक तकनीक अपनाकर अगले 3 साल में इसे 11 लाख टन तक पहुंचाने का लक्ष्य तय किया है। इस बढ़ोतरी से राज्य की अर्थव्यवस्था में अगले तीन सालों में सीधे तौर पर 5 हजार करोड़ रुपये जुड़ेंगे, जिसका सबसे बड़ा फायदा स्थानीय मछुआरों और इस व्यवसाय से जुड़े लोगों को मिलेगा।

भारत में तेजी से बढ़ रहा है मछली निर्यात

कार्यक्रम में केंद्रीय मंत्री राजीव रंजन सिंह ने देश की ‘ब्लू इकोनॉमी’ की तस्वीर साझा करते हुए बताया कि भारत मछली उत्पादन में दुनिया में दूसरे स्थान पर है। देश का कुल उत्पादन 95 लाख टन से बढ़कर 198 लाख टन हो गया है, जबकि निर्यात 30,213 करोड़ रुपये से उछलकर 62,408 करोड़ रुपये तक पहुंच गया है। वहीं, केंद्रीय राज्य मंत्री एसपी सिंह बघेल ने बताया कि देश के कुल उत्पादन में इनलैंड फिशरीज (अंतर्देशीय मत्स्य पालन) का 75 फीसदी योगदान है, जिसमें मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश, बिहार और छत्तीसगढ़ जैसे राज्य तेजी से आगे बढ़ रहे हैं।

प्रदेश के 4 बड़े बांधों से बदलेगी तस्वीर, मोती भी उगेगा

मध्य प्रदेश के इंदिरा सागर, बरगी, बाणसागर और बारना डैम में आधुनिक केज कल्चर विकसित किया जाएगा। इसके जरिए 4 लाख मीट्रिक टन अतिरिक्त मछली उत्पादन का लक्ष्य है। इंदिरा सागर जलाशय को पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर तैयार किया जा रहा है। इसके साथ ही राज्य सरकार ने ‘एकीकृत मत्स्य पालन’ योजना भी बनाई है, जिसमें मछली पालन के साथ-साथ मोती उत्पादन, मखाना, कमल, सिंघाड़ा और कुक्कुट पालन को भी जोड़ा जाएगा। एक्वापोनिक्स तकनीक के जरिए औषधीय पौधे, फूल और सब्जियां भी उगाई जाएंगी।

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