Delhi Air Pollution News: प्रदूषण के स्रोतों का लगेगा सटीक पता, दिल्ली में लॉन्च हुई Real-Time Source Apportionment और AIRWISE तकनीक

दिल्ली: देश की राजधानी दिल्ली में लगातार गंभीर बनी वायु प्रदूषण की समस्या से प्रभावी तरीके से निपटने और इसके प्रमुख कारणों की सटीक पहचान करने के लिए वैज्ञानिकों ने आधुनिक तकनीकों पर आधारित एक उन्नत प्रणाली तैयार की है। केंद्रीय मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) डॉ. जितेंद्र सिंह ने इस बात की जानकारी देते हुए बताया कि इस नई प्रणाली का मुख्य फोकस प्रदूषण के स्रोतों का वास्तविक समय (रियल-टाइम) में आकलन करने और वायु गुणवत्ता का सटीक पूर्वानुमान लगाने पर आधारित है।
रियल-टाइम सोर्स अपॉर्शनमेंट तकनीक से PM2.5 के स्रोतों की पहचान
दिल्ली एयरोसोल प्रयोगशाला द्वारा प्रस्तुत किए गए आंकड़ों और पोस्टरों के अनुसार, पीएम 2.5 (PM2.5) प्रदूषण में विभिन्न कारकों के योगदान को समझने के लिए रियल-टाइम सोर्स अपॉर्शनमेंट तकनीक का व्यापक उपयोग किया जा रहा है। इस तकनीकी प्रक्रिया के तहत एयरोसोल की रासायनिक संरचना, कार्बनयुक्त कणों और अन्य सूक्ष्म तत्वों का बारीकी से विश्लेषण किया जाता है। इसकी मदद से वाहनों से निकलने वाले धुएं, बायोमास जलाने, कोयला दहन, औद्योगिक इकाइयों से होने वाले उत्सर्जन, सड़क की धूल और कचरा जलाने जैसे प्रमुख प्रदूषण स्रोतों की आसानी से पहचान की जा सकती है। केंद्रीय मंत्री ने यह महत्वपूर्ण जानकारी आईआईटीएम (IITM) दिल्ली में अटल लैबोरेटरी के उद्घाटन समारोह के दौरान साझा की।
AIRWISE प्रणाली किस प्रकार करती है सहायता?
इस दिशा में दूसरी बड़ी पहल ‘AIRWISE’ (Air Quality Warning and Integrated Decision Support System for Emissions) प्रणाली के रूप में सामने आई है। इस उन्नत तकनीक को भारतीय उष्णकटिबंधीय मौसम विज्ञान संस्थान (IITM) द्वारा भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के साथ मिलकर संयुक्त रूप से विकसित किया गया है। यह अत्याधुनिक प्रणाली प्रदूषण के पूर्वानुमान लगाने, उत्सर्जन के स्रोतों का सही आकलन करने और समय रहते उचित नियंत्रण कदम उठाने में बेहद मददगार साबित होती है।
400 मीटर की ऊंचाई से वायु गुणवत्ता का पूर्वानुमान
AIRWISE प्रणाली लगभग 400 मीटर की ऊंचाई पर वायु गुणवत्ता के पूर्वानुमान के साथ-साथ स्थानीय स्तर पर प्रदूषण के स्तर का सटीक आकलन प्रस्तुत करती है। इस प्रणाली का मुख्य उद्देश्य प्रशासनिक तंत्र को वायु प्रदूषण में संभावित बढ़ोतरी के बारे में समय से पहले सतर्क करना है, ताकि अधिकारी प्रदूषण के मुख्य स्रोतों के आधार पर त्वरित और लक्षित कार्रवाई कर सकें।
प्रदूषण नियंत्रण के लिए वैज्ञानिक नीतियों का निर्माण
पर्यावरण विशेषज्ञों का मानना है कि प्रदूषण के स्रोतों की सटीक और वैज्ञानिक जानकारी मिलने से वाहनों, उद्योगों, सड़क की धूल और पराली या अन्य जैविक कचरे को जलाने से होने वाले हानिकारक उत्सर्जन के खिलाफ बेहद लक्षित कदम उठाए जा सकते हैं। इससे दिल्ली-एनसीआर क्षेत्र की वायु गुणवत्ता में सुधार लाने के लिए पूरी तरह से वैज्ञानिक आंकड़ों पर आधारित प्रभावी नीतियां बनाने में मदद मिलेगी। इन प्रणालियों की सफलता अब इस बात पर निर्भर करेगी कि प्रशासन इन पुख्ता आंकड़ों के आधार पर कितनी समयबद्ध और सख्त कार्रवाई अमल में लाता है।





