Bhopal News: मध्य प्रदेश के नगरीय निकायों में 1134 करोड़ की सरकारी खरीद घोटाला, लोकायुक्त जांच और FIR की तैयारी

भोपाल: मध्य प्रदेश के विभिन्न नगरीय निकायों के भीतर 1,134 करोड़ रुपये की भारी-भरकम सरकारी खरीद के नाम पर सामने आए बड़े पैमाने के वित्तीय घोटालों और गड़बड़ियों पर अब कानूनी शिकंजा कसने लगा है। बाजार से कई गुना अधिक दरों पर सामान खरीदने और सरकारी खजाने के दुरुपयोग के पुख्ता मामलों को देखते हुए लोकायुक्त संगठन ने इस पूरे प्रकरण का स्वतः संज्ञान ले लिया है। इसके अलावा, आधुनिक ‘ई-नगर पालिका’ सॉफ्टवेयर और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) टूल की मदद से उजागर हुई इन तमाम अनियमितताओं के बाद अब दोषी पाए जाने वाले सरकारी अधिकारियों और निजी सप्लायरों के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत एफआईआर (FIR) दर्ज करने की पुख्ता तैयारियां शुरू कर दी गई हैं। विभागीय स्तर पर चली कार्रवाई के तहत अब तक कुल 392 अधिकारियों पर शिकंजा कसा जा चुका है, जिनमें से 7 भ्रष्ट अधिकारियों को उनकी सेवाओं से बर्खास्त भी किया जा चुका है।
सामग्री की खरीद से लेकर भुगतान तक की प्रक्रिया की होगी गहराई से जांच
प्राप्त जानकारी के अनुसार, कुछ समय पूर्व नगरीय विकास एवं आवास विभाग की ओर से नगरीय निकायों की कार्यप्रणाली को लेकर एक विस्तृत प्रेजेंटेशन दिया गया था। इस रिपोर्ट में यह खुलासा हुआ कि अनियंत्रित और महंगी खरीद की वजह से शासन के खजाने को लगभग 250 करोड़ रुपये का सीधा नुकसान उठाना पड़ा है। विभाग के अपर मुख्य सचिव संजय दुबे ने इस संबंध में जानकारी देते हुए बताया कि ‘ई-नगर पालिका’ और GeM पोर्टल के आंकड़ों का मिलान करने वाले एआई टूल ने खरीद की दरों में भारी-भरकम अंतर को उजागर किया है। उदाहरण के तौर पर, एक निकाय के भीतर जो कचरा संग्रहण वाहन दो लाख रुपये की कीमत में खरीदा गया था, वही वाहन दूसरे निकाय में मामूली डस्टबिन जोड़कर पूरे 6 लाख रुपये की भारी कीमत पर खरीदे जाने का हैरान करने वाला मामला सामने आया। इसी तरह फिनाइल, एलईडी स्ट्रीट लाइट्स और अन्य सफाई उपकरणों की खरीद में भी तय दरों से कहीं ज्यादा भुगतान किए जाने की गंभीर शिकायतें प्राप्त हुई हैं। अब इन सभी मामलों में टेंडर प्रक्रिया से लेकर अंतिम भुगतान तक के हर एक चरण की बारीक जांच की जाएगी।
अब तक 392 अधिकारियों पर हुई प्रशासनिक कार्रवाई, सात किए गए सेवा से बर्खास्त
इन गंभीर वित्तीय अनियमितताओं के मामलों में राज्य शासन ने अब तक सख्त कदम उठाते हुए कुल 392 अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई पूरी कर ली है। इनमें से 135 अकेले मुख्य नगर पालिका अधिकारी (CMO) स्तर के जिम्मेदार अधिकारी शामिल हैं। प्रशासनिक सूत्रों के अनुसार, इस कार्रवाई के अंतर्गत दोषी कर्मियों की वेतन वृद्धि रोकने, उनका डिमोशन (पदावनति) करने, वित्तीय नुकसान की रिकवरी करने और बर्खास्तगी जैसे कड़े कदम उठाए गए हैं। अब तक कुल 7 अधिकारियों को भ्रष्टाचार के आरोप में नौकरी से बाहर का रास्ता दिखाया जा चुका है। वहीं, अवैध और मनमाने भुगतानों के मामलों में लिप्त अधिकारियों व कर्मचारियों से लगभग तीन से चार करोड़ रुपये की राशि की वसूली भी की जा चुकी है। इसके साथ ही, नियमों को ताक पर रखकर गलत दरों पर घटिया सामग्री की आपूर्ति करने वाले 80 से अधिक ठेकेदारों और सप्लायरों के खिलाफ भी शिकंजा कसा गया है।
लोकायुक्त संगठन खंगालेगा टेंडर से लेकर भुगतान तक का पूरा पुराना रिकॉर्ड
अब लोकायुक्त संगठन ने इस मामले में आक्रामक रुख अपनाते हुए नगरीय विकास विभाग से संबंधित सभी निकायों के भीतर हुई खरीद-फरोख्त का पूरा रिकॉर्ड तलब करना शुरू कर दिया है। इस विस्तृत जांच के दौरान मुख्य रूप से यह परखा जाएगा कि संबंधित सामग्री किस तय दर पर खरीदी गई थी, टेंडर के नियम और शर्तें किसने तैयार की थीं और उस पर भुगतान की आधिकारिक स्वीकृति किस स्तर के अधिकारी द्वारा दी गई थी। इस जांच के दायरे में सीएमओ, स्थानीय खरीद समितियां, तकनीकी इंजीनियर और माल सप्लाई करने वाले ठेकेदार सीधे तौर पर आ सकते हैं। प्रारंभिक तौर पर यह भी आशंका जताई जा रही है कि टेंडर प्रक्रिया में किसी खास और चुनिंदा सप्लायर को अनुचित लाभ पहुंचाने के लिए ही जानबूझकर ऐसी शर्तें जोड़ी गई थीं। फिलहाल, जब्त किए गए दस्तावेजों और रिकॉर्ड्स की तकनीकी जांच पूरी होने के बाद इसमें संलिप्त सभी चेहरों के खिलाफ कानूनी शिकंजा कसने की प्रक्रिया तेजी से आगे बढ़ाई जाएगी।





