Palamu News: मेदिनीनगर में दो महिलाओं और नवजात की मौत के बाद बड़ा एक्शन, लापरवाही पर प्राइवेट हॉस्पिटल सील और FIR दर्ज

पलामू: झारखंड के पलामू जिले के मेदिनीनगर स्थित पांकी रोड पर संचालित एक निजी अस्पताल (प्राइवेट हॉस्पिटल) पर जिला प्रशासन ने भारी लापरवाही का संज्ञान लेते हुए बड़ी और सख्त कार्रवाई की है। अस्पताल को सील करने से पूर्व इसके लाइसेंस को आधिकारिक रूप से निलंबित (सस्पेंड) कर दिया गया था। बीते शुक्रवार की रात और शनिवार की सुबह इस निजी अस्पताल में प्रसव के दौरान दो महिलाओं की मौत हो गई थी, साथ ही एक नवजात शिशु की भी जान चली गई थी। इस दिल दहला देने वाली घटना के बाद अस्पताल की कार्यशैली और चिकित्सा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े हो गए थे, जिसके मद्देनजर एक उच्च स्तरीय जांच कमेटी का गठन किया गया था।
प्रशिक्षु आईएएस और सदर एसडीओ के नेतृत्व में पहुंची प्रशासनिक टीम ने की अस्पताल सील करने की कार्रवाई
घटना की गंभीरता को देखते हुए प्रशिक्षु आईएएस ऋतिक मेहता और सदर अनुमंडल पदाधिकारी (SDO) संजय पांडेय के नेतृत्व में एक प्रशासनिक टीम ने मौके पर पहुंचकर सख्त कदम उठाया और अस्पताल को पूरी तरह से सील कर दिया। इस बीच, पूरे मामले में अस्पताल प्रबंधन की आपराधिक लापरवाही के खिलाफ मेदिनीनगर टाउन थाने में आधिकारिक रूप से प्राथमिकी (FIR) दर्ज कर ली गई है। मूल रूप से गढ़वा जिले के रहने वाले मृतका के पति ने अस्पताल के डॉक्टरों और प्रबंधन पर गंभीर लापरवाही बरतने का आरोप लगाते हुए मेदिनीनगर टाउन थाने में लिखित आवेदन दिया था, जिसके आधार पर यह कार्रवाई की गई है।
टाउन थाना प्रभारी ने दी जानकारी, सब-इंस्पेक्टर सुबोध कुमार को सौंपी गई है पूरे मामले की जांच
इस पूरे प्रकरण के संबंध में जानकारी देते हुए मेदिनीनगर टाउन थाना प्रभारी ज्योतिलाल रजवार ने बताया कि मृतका के परिजनों की शिकायत पर प्राइवेट अस्पताल प्रबंधन के विरुद्ध प्रासंगिकी धाराओं में एफआईआर दर्ज कर ली गई है। इस संवेदनशील मामले की गहन और निष्पक्ष जांच का जिम्मा सब-इंस्पेक्टर सुबोध कुमार को सौंपा गया है, जो हर एक पहलू की बारीकी से पड़ताल कर रहे हैं।
जांच कमेटी की रिपोर्ट में पुष्टि के बाद जिला प्रशासन ने उठाया कड़ा कदम
गौरतलब है कि पलामू जिला प्रशासन ने निजी अस्पताल में एक साथ तीन लोगों (दो महिलाओं और एक नवजात) की मौत के बाद बेहद सख्त रुख अपनाया था। मामले की तह तक जाने के लिए सिविल सर्जन द्वारा एक पांच सदस्यीय विशेष जांच कमेटी का गठन किया गया था। जांच के दौरान कई तकनीकी और चिकित्सीय बिंदुओं पर अस्पताल प्रबंधन की भारी लापरवाही उजागर हुई और इसकी पुष्टि होने के बाद जिला प्रशासन ने त्वरित कार्रवाई करते हुए अस्पताल पर ताला जड़ दिया।





