झारखंड के दिल की बीमारी से पीड़ित बच्चों का मुफ्त इलाज करेगी हेमंत सरकार, 10 लाख तक का खर्च उठाएगी सरकार

रांची: झारखंड के भीतर जन्मजात हृदय रोग (हार्ट डिजीज) से पीड़ित गरीब और जरूरतमंद परिवारों के बच्चों के उपचार का संपूर्ण खर्च अब राज्य सरकार द्वारा वहन किया जाएगा. इसके तहत बच्चों की प्रारंभिक स्वास्थ्य जांच से लेकर जटिल ऑपरेशन, आवश्यक दवाइयां, अस्पताल में रहने-खाने और आने-जाने की यात्रा तक की तमाम सुविधाएं पूरी तरह से निःशुल्क मुहैया कराई जाएंगी. इस कल्याणकारी योजना के अंतर्गत सरकार प्रत्येक बच्चे के इलाज पर 5 लाख से लेकर 10 लाख रुपए तक की राशि खर्च करेगी. गत शुक्रवार को स्वास्थ्य मंत्री डॉ. इरफान अंसारी ने राजधानी रांची स्थित रिम्स (RIMS) ऑडिटोरियम में स्वास्थ्य विभाग तथा केरल के कोच्चि स्थित प्रसिद्ध अमृता हॉस्पिटल के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित ‘गिफ्ट ऑफ लाइफ’ कार्यक्रम का औपचारिक शुभारंभ किया. इस अवसर पर आयोजित विशेष स्वास्थ्य शिविर के दौरान जन्म से लेकर 18 वर्ष आयु वर्ग तक के कुल 380 बच्चों के स्वास्थ्य की गहन स्क्रीनिंग की गई.
विशेषज्ञ चिकित्सकों द्वारा की गई जांच, कोच्चि के अमृता हॉस्पिटल में होगा निःशुल्क ऑपरेशन
आयोजित शिविर में देश और राज्य के प्रतिष्ठित हृदय रोग विशेषज्ञ चिकित्सकों ने बच्चों के दिल की जांच की. जिन बच्चों में जन्मजात हृदय रोग की पुष्टि पाई जाएगी, उन्हें आगे के उन्नत उपचार और सर्जरी के लिए विशेष रूप से कोच्चि स्थित अमृता हॉस्पिटल भेजा जाएगा. इस पूरी प्रक्रिया का संपूर्ण वित्तीय भार राज्य सरकार उठाएगी, जिसका मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि किसी भी परिवार की आर्थिक तंगी या गरीबी के कारण उनके लाडले का इलाज बीच में न रुके.
रिम्स में भी जल्द विकसित होगी हृदय रोग के इलाज की स्थाई सुविधा, मंत्री ने दिए निर्देश
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए स्वास्थ्य मंत्री डॉ. इरफान अंसारी ने कहा कि जन्मजात हृदय रोग से पीड़ित बच्चों का जीवन बचाना सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल है. उन्होंने अपने विधायक कार्यकाल को याद करते हुए साझा किया कि कैसे उस समय बड़ी संख्या में अभिभावक बच्चों के इलाज के लिए गुहार लेकर आते थे और तब उन्हें मजबूरी में दूसरे राज्यों का रुख करना पड़ता था. अब विभाग की यह पुनीत जिम्मेदारी है कि राज्य के किसी भी अभिभावक को अपने बच्चे के इलाज के लिए दर-दर न भटकना पड़े. मंत्री ने विभागीय अधिकारियों को निर्देश दिया कि रिम्स में ही जन्मजात हृदय रोग के संपूर्ण और अत्याधुनिक इलाज की स्थाई व्यवस्था विकसित की जाए. इसके लिए योग्य विशेषज्ञ डॉक्टरों की तैनाती, आधुनिक चिकित्सा उपकरणों और जरूरी आधारभूत संरचना को जल्द धरातल पर उतारा जाएगा. उन्होंने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के मार्गदर्शन में प्रदेश के अंतिम व्यक्ति तक बेहतरीन स्वास्थ्य सुविधाएं पहुंचाने के संकल्प को दोहराया.
जनप्रतिनिधियों से की गई अपील, समाज के अंतिम छोर तक के बच्चों को योजना से जोड़ने का आह्वान
स्वास्थ्य मंत्री ने प्रदेश के सभी सांसदों, विधायकों, जिला परिषद सदस्यों, मुखियाओं और अन्य स्थानीय जनप्रतिनिधियों से यह विशेष अपील की है कि वे अपने-अपने क्षेत्रों में जन्मजात हृदय रोग से ग्रस्त बच्चों की पहचान करें और इसकी सूचना तुरंत स्वास्थ्य विभाग को दें. उन्होंने कहा कि कई ऐसे बेसहारा परिवार हैं जो चाहकर भी पैसों के अभाव में अपने बच्चों का ऑपरेशन नहीं करा पाते, ऐसे जरूरतमंदों को इस अनूठी पहल से जोड़ा जाना बेहद जरूरी है. सरकार का यह खुला प्रयास है कि किसी मां की गोद सूनी न हो और किसी भी बच्चे का उज्ज्वल बचपन इलाज के आभाव में न छिने पाए.
एक साल के भीतर रिम्स में नियुक्त होंगे विशेषज्ञ चिकित्सक, अपर मुख्य सचिव ने दी जानकारी
स्वास्थ्य विभाग के अपर मुख्य सचिव अजय कुमार सिंह ने इस दौरान जानकारी दी कि बच्चों के इलाज की यह सुविधा केवल एक दिवसीय शिविर तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि इसे रिम्स में स्थाई रूप से स्थापित किया जाएगा. उन्होंने घोषणा की कि आगामी एक वर्ष के भीतर रिम्स में इस गंभीर बीमारी के उपचार के लिए देश के नामचीन विशेषज्ञ चिकित्सकों की नियुक्ति कर ली जाएगी तथा अन्य जरूरी चिकित्सीय उपकरणों की खरीदी भी सुनिश्चित की जाएगी, ताकि भविष्य में राज्य के बच्चों को इलाज के लिए अन्य राज्यों पर निर्भर न रहना पड़े.
जांच से लेकर घर वापसी तक की हर सुविधा पूरी तरह निःशुल्क, गणमान्य लोग रहे उपस्थित
‘गिफ्ट ऑफ लाइफ’ अभियान के तहत लाभान्वित होने वाले बच्चों और उनके परिजनों को कई प्रकार की निःशुल्क सुविधाएं मिलेंगी, जिसमें कार्डियक जांच, मेडिकल टेस्ट, सर्जरी, दवाइयां, अस्पताल में खान-पान और आवास शामिल हैं. इसके अलावा, कोच्चि तक की आने-जाने की यात्रा का किराया, ऑपरेशन के बाद का मेडिकल फॉलोअप और बच्चे की सकुशल घर वापसी तक की निगरानी की पूरी जिम्मेदारी शासन ने उठाई है. इस गरिमामयी कार्यक्रम में स्वास्थ्य विभाग के अपर मुख्य सचिव अजय कुमार सिंह, रिम्स निदेशक डॉ. डीके सिन्हा, एनएचएम अभियान निदेशक शशि प्रकाश झा और अमृता हॉस्पिटल के डॉ. ब्रजेश सहित तमाम वरिष्ठ चिकित्सक और स्वास्थ्य कर्मी उपस्थित रहे.





