Chhatarpur Jalvihar Mela News: बुंदेलखंड के ऐतिहासिक जलविहार मेले की धूम, बुंदेली राई की शानदार प्रस्तुति ने मोहा मन

छतरपुर: मध्य प्रदेश के बुंदेलखंड अंचल में दीवाली के त्योहार से पहले उत्सव का जो सिलसिला शुरू होता है, वह दीवाली के बाद तक लंबे समय तक पूरे उत्साह के साथ जारी रहता है। इस सांस्कृतिक पर्व की शुरुआत ऐतिहासिक और प्रसिद्ध ‘मेला जलविहार’ के साथ होती है। यह आयोजन केवल मनोरंजन का साधन मात्र नहीं है, बल्कि यह संपूर्ण बुंदेलखंड की समृद्ध परंपरा, कला और सांस्कृतिक पहचान का एक जीवंत प्रतीक भी है। आज से सैकड़ों वर्ष पूर्व राजे-रजवाड़ों के शासनकाल में शुरू हुई मेले की यह अनूठी परंपरा आज भी अपनी पूरी शान-ओ-शौकत और वैभव के साथ निरंतर जारी है।
छतरपुर के मेला ग्राउंड में सजा भव्य जलविहार मेला, झूले, दुकानें और सांस्कृतिक कार्यक्रमों से गुलजार है शहर
छतरपुर के मुख्य मेला ग्राउंड में हर साल की भांति इस बार भी भव्य जलविहार मेले का आयोजन किया गया है। यहाँ देश के विभिन्न हिस्सों से आए व्यापारियों और दुकानदारों ने अपनी दुकानें सजाई हैं, जो लोगों के आकर्षण का केंद्र बनी हुई हैं। इसके अलावा तरह-तरह के झूले और रंगारंग सांस्कृतिक कार्यक्रम आगंतुकों के मनोरंजन का मुख्य जरिया बने हुए हैं। वक्त और दौर भले ही बदल गया हो, लेकिन मेला जलविहार की रौनक, उमंग और लोगों का भारी उत्साह आज भी पूरी तरह बरकरार है। इस भव्य आयोजन के छठे दिन विशेष रूप से प्रस्तुत किए गए पारंपरिक बुंदेली राई नृत्य ने दर्शकों को पूरी तरह मंत्रमुग्ध कर दिया।
प्रजा को प्रसन्न करने के लिए राजा-महाराजाओं के दौर में हुई थी शुरुआत, अब नगर पालिका निभा रही है यह जिम्मेदारी
इतिहास के पन्नों को पलटें तो छतरपुर रियासत के महाराज अपनी प्रजा को आनंदित करने और उनका मनोरंजन करने के लिए महल परिसर में ही मेला जलविहार का भव्य आयोजन करवाते थे। समय बीतता गया और ब्रिटिश शासनकाल के दौरान भी यह परंपरा निरंतर आगे बढ़ती रही। आज के समय में यह छतरपुर की अमूल्य सांस्कृतिक विरासत का रूप ले चुकी है, जिसे अब नगर पालिका द्वारा पूरी भव्यता के साथ निभाया जा रहा है। वर्तमान में शहर में नगर पालिका प्रशासन की देखरेख में मेला जलविहार का बड़े पैमाने पर आयोजन किया जा रहा है।
दैनिक आधार पर हो रही हैं आकर्षक प्रस्तुतियां, नगर पालिका अध्यक्ष और सीएमओ ने किया मेला स्थल का निरीक्षण
इस ऐतिहासिक मेला जलविहार के दौरान प्रतिदिन रात्रि बेला में दूर-दराज से पहुंचे कलाकार अपनी अद्भुत और अलौकिक कलाओं से लोगों का दिल जीत रहे हैं। दिन के समय नगर पालिका अध्यक्ष ज्योति सुरेंद्र चौरसिया और सीएमओ माधुरी शर्मा ने अपने प्रशासनिक स्टाफ के साथ मेला परिसर का औचक निरीक्षण किया। इस दौरान जन उत्साह बढ़ाने के लिए अध्यक्ष और सीएमओ ने झूला झूलकर आनंद लिया, और रात के वक्त आयोजित होने वाले बुंदेली राई कार्यक्रम में भी सहभागिता निभाई।
लोक कलाकारों की रंगारंग प्रस्तुतियों से गूंजा मेला प्रांगण, प्रसिद्ध गायक जित्तू खरे बादल का किया गया सम्मान
मेले के छठे दिन बुंदेलखंड के सबसे लोकप्रिय लोक नृत्य ‘राई’ का विशेष आयोजन किया गया, जिसमें छह प्रतिभाशाली नृत्यांगनाओं ने मंच पर बेहद सुंदर और ऊर्जावान प्रस्तुतियां दीं। बुंदेली लोक राई नृत्य की इस जादुई छटा का दीदार करने के लिए सेकड़ों की संख्या में दर्शक देर रात तक मेले में डटे रहे। दर्शकों की तालियों की गड़गड़ाहट से कलाकारों का उत्साह लगातार बढ़ता रहा और पूरा नगर पालिका प्रांगण लोक संगीत के सुरों से गुंजायमान हो उठा। कार्यक्रम के दौरान उपस्थित अतिथियों ने दीप प्रज्वलित कर इसका विधिवत शुभारंभ किया तथा प्रसिद्ध लोक गायक जित्तू खरे बादल व उनके सहयोगी कलाकारों को सम्मानित किया।
राजा भवानी सिंह के समय से शुरू हुई थी जलविहार मेले की परंपरा, हर वर्ग के लोगों का रखा जाता है विशेष ध्यान
इस अवसर पर नगर पालिका अध्यक्ष ज्योति सुरेंद्र चौरसिया ने जानकारी देते हुए बताया कि जलविहार मेले की यह गौरवशाली परंपरा राजा-महाराजाओं के काल से चली आ रही है। इसकी शुरुआत मूल रूप से राजा भवानी सिंह द्वारा महल परिसर में जनता को खुशहाली देने और उनके मनोरंजन के उद्देश्य से की गई थी। समय के साथ-साथ इस मेले में आने वाले लोगों की संख्या में लगातार वृद्धि होती गई, जिसके चलते इसका दायरा भी व्यापक होता चला गया। वर्तमान में इसका आयोजन नगर पालिका द्वारा किया जाता है, जिसमें रंगारंग प्रस्तुतियों के साथ-साथ बुंदेली संस्कृति, कला और समाज के हर वर्ग की पसंद व सुविधाओं का विशेष ध्यान रखा जाता है।





