मध्य प्रदेश स्थापना दिवस के अवसर पर आयोजित कृषि लोकोत्सव में फैली भारी अव्यवस्थाओं को लेकर भड़के बीजेपी विधायक, जिला प्रशासन की कार्यशैली पर खड़े किए गंभीर सवाल

सीधी: मध्य प्रदेश के स्थापना दिवस के उपलक्ष्य में सीधी जिले में आयोजित ‘कृषि लोकोत्सव’ कार्यक्रम के दौरान प्रशासनिक स्तर पर भारी कुप्रबंध और लापारवाही देखने को मिली, जिससे स्थानीय जनप्रतिनधियों में भारी आक्रोश फैल गया है। कार्यक्रम में मौजूद व्यवस्थाओं से असंतुष्ट नजर आए भारतीय जनता पार्टी के विधायकों ने सीधे तौर पर जिला प्रशासन को आड़े हाथों लिया, जबकि कार्यक्रम में शामिल हुए सांसद भी व्यवस्थाओं से नाखुश दिखाई दिए। जनप्रतिनिधियों का मुख्य रोष इस बात को लेकर था कि इतने महत्वपूर्ण और बड़े राजकीय उत्सव के लिए एक अत्यंत छोटे से सभागार का चयन किया गया, और उस छोटे से हॉल को भी भरने के लिए मजबूरन स्कूली छात्र-छात्राओं को बुलाकर बैठाना पड़ा।
सीधी विधायक रीति पाठक ने मंच से प्रशासन को लगाई कड़ी फटकार, अधिकारियों की गैरमौजूदगी पर जताई गहरी नाराजगी
समारोह के दौरान फैली अव्यवस्थाओं से खिन्न सीधी की विधायक रीति पाठक ने मंच से ही जिला प्रशासन की लचर तैयारियों पर खुलकर सवालिया निशान खड़े किए। उन्होंने तीखे शब्दों में कहा कि मध्य प्रदेश स्थापना दिवस जैसे गरिमामयी और बड़े अवसर पर किसी कार्यक्रम के आयोजन के लिए इतने छोटे परिसर को चुना जाना पूरी तरह अनुचित है। उन्होंने स्पष्ट किया कि इस संबंध में उन्होंने अधिकारियों को पहले ही आगाह कर दिया था और आयोजन स्थल को लेकर अपनी आपत्ति भी दर्ज कराई थी, लेकिन लापरवाह अधिकारियों ने उनकी इस बात पर बिल्कुल ध्यान नहीं दिया। इसके अलावा, समारोह में कई प्रमुख विभागों के जिला अधिकारियों के गायब रहने पर भी रीति पाठक ने जमकर खरी-खोटी सुनाई।
सभी विभागों के अधिकारियों की उपस्थिति थी अनिवार्य, ध्वजारोहण के प्रोटोकॉल को लेकर भी प्रशासन पर बरसीं विधायक
विधायक रीति पाठक ने आगे कहा कि इस तरह के बड़े और महत्वपूर्ण आयोजनों में जिले के सभी विभागों के वरिष्ठ अधिकारियों की उपस्थिति अनिवार्य रूप से सुनिश्चित होनी चाहिए थी, लेकिन कार्यक्रम स्थल पर अधिकांश अधिकारी नदारद दिखे। उन्होंने कहा कि कृषि लोकोत्सव को केवल एक साधारण संगोष्ठी या रस्म अदायगी वाला औपचारिक कार्यक्रम बनाकर नहीं छोड़ना चाहिए था, बल्कि इसमें भव्य सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन होना चाहिए था और सभी विभागों की सक्रिय सहभागिता भी तय की जानी चाहिए थी। इसके साथ ही, उन्होंने समारोह के दौरान ध्वजारोहण की प्रक्रिया को लेकर भी जिला प्रशासन की व्यवस्थाओं पर सवाल उठाए और कहा कि सभी लोग सांसद के हाथों ध्वजारोहण किए जाने का इंतजार कर रहे थे, परंतु प्रशासन ने इसके लिए कोई उचित और समयबद्ध इंतजाम नहीं किए थे।
सांसद डॉ. राजेश मिश्रा ने दी सफाई, धौहनी और सिहावल के विधायकों ने भी व्यवस्थाओं पर जताया असंतोष
कार्यक्रम में मौजूद सांसद डॉ. राजेश मिश्रा ने उत्कृष्ट कार्य करने वाले किसानों को प्रदान किए गए पुरस्कारों की जानकारी देते हुए प्रशासनिक अधिकारियों का अप्रत्यक्ष रूप से बचाव करने की कोशिश की। उन्होंने कहा कि उन्हें इस बात की कोई पूर्व जानकारी नहीं थी कि इस कार्यक्रम का निर्धारित प्रोटोकॉल क्या था और इसके तहत ध्वजारोहण होना था अथवा नहीं। उल्लेखनीय है कि इस पूरे कार्यक्रम में कुल मिलाकर बमुश्किल 150 लोग ही मौजूद थे, जिनमें किसानों की संख्या केवल 30 से 35 के आसपास सिमट कर रह गई थी और बाकी कुर्सियां भरने के लिए स्कूल-कॉलेज के छात्र-छात्राओं को बुलाया गया था। दूसरी ओर, धौहनी से भाजपा विधायक कुंवर सिंह टेकाम ने भी इस लचर व्यवस्था पर अपना खुला असंतोष व्यक्त किया, जबकि सिहावल विधायक विश्वामित्र पाठक कार्यक्रम के समापन के पश्चात स्थल पर पहुंचे।
जिला पंचायत की सीईओ सौम्या आनंद का बयान— मामले की उच्चस्तरीय जांच कराई जाएगी और दोषी पाए जाने वालों पर होगी सख्त कार्रवाई
कार्यक्रम के दौरान मचे इस सियासी घमासान और प्रशासनिक चूक पर प्रतिक्रिया देते हुए जिला पंचायत की मुख्य कार्यपालन अधिकारी (CEO) सौम्या आनंद ने कहा कि इस प्रकार की अव्यवस्थाओं के संबंध में उन्हें पहले से कोई आधिकारिक जानकारी नहीं थी। उन्होंने मीडिया को आश्वस्त किया कि वे इस पूरे मामले से जुड़े सभी तथ्यों की बारीकी से जांच करवाएंगी, और यदि जांच के दौरान कोई भी अधिकारी या कर्मचारी दोषी पाया जाता है, तो उसके विरुद्ध नियमानुसार सख्त अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी।





