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धार्मिक

जानें इस साल हज यात्रा में किस देश के लोगों को मिलेगी इंट्री, 88 साल बाद होगा ऐसा

नई दिल्ली। कोरोनावायरस के मद्देनजर इस बार सऊदी अरब हज यात्रा में दुनियाभर के लाखों मुस्लिम हिस्सा नहीं ले सकेंगे। सऊदी अरब सरकार की ओर से सोमवार को ये घोषणा की गई कि इस साल बहुत ही सीमित संख्या में लोग हज यात्रा कर सकेंगे। इसमें सऊदी अरब में ही रहने वाले लोग प्रमुख रूप से शामिल होंगे।

अगले माह हज यात्रा होने वाली है। मुस्लिमों के लिए जीवन में एक बार हज यात्रा करना जरूरी माना जाता है, इस वजह से पूरी दुनिया के मुस्लिम समाज के लोग इस यात्रा के शुरू होने का इंतजार करते हैं। यात्रा के लिए कई माह पहले ही रजिस्ट्रेशन की प्रक्रिया शुरू हो जाती है, इस साल भी ये प्रक्रिया चल रही थी मगर अब इस पर रोक लग गई है।

रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया पर लगी रोक  

यात्रा के लिए कई माह पहले ही रजिस्ट्रेशन की प्रक्रिया शुरू हो जाती है, इस साल भी ये प्रक्रिया चल रही थी मगर अब इस पर रोक लग गई है। एक बात और भी है कि इस यात्रा को करने के लिए समाज के लोग अपनी कमाई का एक हिस्सा बचाकर रखते हैं, ऐसे लोगों के लिए ये निराशा वाली खबर है।

साल 1932 के बाद सीमित संख्या में कर पाएंगे हज 

सऊदी अरब की ओर से कहा गया है कि साल 1932 के बाद पहली बार हज यात्रा पर इस तरह से प्रतिबंध लगाया गया है। इससे पहले भी युद्ध और भयंकर छुआछूत वाली बीमारियों के कारण इस यात्रा को रद्द किया गया है लेकिन 1800 के बाद से इस पर कोई खास असर नहीं पड़ा था। उस समय हैजा और प्लेग जैसी बीमारियों का प्रकोप फैला था। इस वजह से भी लोग बड़ी संख्या में इस यात्रा से दूर थे।

हालांकि इस बार यात्रा को पूरी तरह से रद्द नहीं किया गया है बल्कि सुरक्षा की दृष्टि से तीर्थयात्रियों की कुल संख्या को जरूर कम किया जा रहा है। तीर्थयात्रा की देखरेख करने वाले हज मंत्रालय और उमराह राज्य सरकार द्वारा संचालित सऊदी प्रेस एजेंसी की ओर से दिए गए एक बयान में कहा गया है कि इस साल केवल सऊदी अरब और अन्य राष्ट्रीयताओं के तीर्थयात्रियों का स्वागत किया जाएगा जो पहले से ही राज्य के अंदर रह रहे हैं।

पिछले साल 24.9 लाख ने की थी तीर्थयात्रा 

सऊदी जनरल अथॉरिटी फॉर स्टैटिस्टिक्स के अनुसार पिछले साल, 24.9 लाख तीर्थयात्रियों ने हज यात्रा की थी। हज करने के लिए 18.6 लाख यात्री सऊदी अरब के बाहर से आए थे। तीर्थ यात्रा में शामिल होने के लिए दुनिया भर के देशों से हवाई जहाज और अन्य माध्यम से यहां पहुंचते हैं और कई दिनों तक धार्मिक संस्कारों की एक श्रृंखला का पालन करते हैं। इस वजह से यहां पर काफी भीड़ हो जाती है। रात में कई लोग टेंट या अन्य भीड़ भरे आवासों में एक साथ सोते हैं और भोजन भी साथ ही करते हैं। इसके अलावा जब ये लोग हज करके वापस घर लौटते हैं तो उस इलाके के लोग काफी संख्या में जमा होकर उनका स्वागत भी करते हैं।

सऊदी अरब के लिए बड़े मेले जैसा होता हज  

हज यात्रा सऊदी अरब के लिए एक बड़े व्यापार जैसा होता है, ऐसे में यहां पर दुनियाभर से लाखों लोग पहुंचते हैं, इससे सऊदी अरब को काफी इनकम भी होती है। मगर इस बार हज यात्रियों को रोके जाने से सऊदी अरब की आर्थिक स्थिति पर भी असर पड़ेगा। सरकारी आंकड़ों के अनुसार हज यात्रा और उमरा से सऊदी अरब प्रति वर्ष लगभग 1200 करोड़ डॉलर कमाता हैं।

सऊदी अरब के शासक क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान ने कहा कि अर्थव्यवस्था को देखते हुए यात्रियों को बढ़ाने की संख्या पर विचार किया जाए। राज्य को उस आय की और भी अधिक आवश्यकता है क्योंकि कम तेल की कीमतों ने राज्य को आय से वंचित कर दिया है और बजट घाटे का निर्माण किया है। सऊदी अरब ने अर्थव्यवस्था को होने वाले नुकसान के साथ लॉकडाउन को संतुलित करते हुए वायरस को नियंत्रित करने के लिए संघर्ष किया है।

लॉकडाउन ने डाला आर्थिक गतिविधियों पर असर 

कोरोनावायरस पर नियंत्रण के लिए सऊदी सरकार की ओर से भी कई हिस्सों में लॉकडाउन किया गया था जिससे सरकार को आर्थिक नुकसान हुआ है। उम्मीद थी कि हजयात्रा से इसकी भरपाई हो जाएगी मगर अब उस पर भी ग्रहण लग गया है। वायरस के प्रसार को धीमा करने के लिए राज्य की ओर से फरवरी में मक्का और मदीना में पवित्र स्थलों को बंद कर दिया गया है।

अप्रैल में एक सऊदी अधिकारी ने तीर्थयात्रियों को चेतावनी दी कि वे इस साल हज के लिए बना रही अपनी यात्रा को रद्द कर दें। अब सऊदी सरकार की इस घोषणा ने उन लोगों को और भी निराश किया है जो इस साल हज यात्रा की योजना बना रहे थे। इसलिए जिन मुसलमानों ने यात्रा के लिए वर्षों की बचत और बुकिंग के लिए पैसे जमा किए थे उन्हें अब अगले साल तक इंतजार करना होगा।

हज यात्रा दुनिया के सबसे बड़े धार्मिक आयोजनों में एक है 

जुलाई के आखिर में होने वाली यह तीर्थयात्रा दुनिया के सबसे बड़े धार्मिक आयोजनों में एक है। इस दौरान 20 लाख से अधिक मुस्लिम सऊदी अरब की यात्रा कर धार्मिक आयोजन में भाग लेते हैं। इंडोनेशिया, जहां दुनिया की सबसे बड़ी मुस्लिम आबादी रहती है, ने इस साल अपने नागरिकों के हज में भाग लेने से मना कर दिया है। इंडोनेशिया से लगभग 2,20,000 लोग सालाना कार्यक्रम में भाग लेते हैं।

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