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मध्यप्रदेश

MP Government Plan: ग्वालियर को सौगात! ऋषि गालव के नाम पर बनेगा नया विश्वविद्यालय, शिक्षा के क्षेत्र में बड़ी छलांग

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि ग्वालियर प्राचीन काल से ही वीरता, विद्वता और कला का शिखर रही है. ऋषि गालव विश्वविद्यालय की स्थापना के साथ ही ग्वालियर प्रदेश के एजुकेशन हब के रूप में नई पहचान गढ़ने की ओर अग्रसर है. एक विश्वविद्यालय शिक्षा का केन्द्र होने के साथ ही राष्ट्र निर्माण का भी स्थल होता है. ऋषि गालव के नाम पर बनने वाला यह संस्थान हमारी आने वाली पीढ़ियों को संस्कार, संस्कृति और कौशल से सुसज्जित कर राष्ट्र निर्माण का अग्रदूत बनाएगा.

सीएम यादव ने कहा कि मध्य भारत शिक्षा समिति के संस्थापक श्रद्धेय सदाशिव गणेश गोखले का त्याग पूजनीय है. उन्होंने 85 वर्ष पहले 21 जुलाई 1941 को इस समिति की नींव रख पराधीनता के कठिन काल में शिक्षा की अलख जगाने का संकल्प लिया. एक स्कूल से शुरू हुआ यह सफर चार महाविद्यालयों, पांच विद्यालयों और एक खेल अकादमी तक पहुंचा. नई शिक्षा नीति के तहत विद्यार्थियों में योग्यता, दक्षता और चरित्र निर्माण पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है

विभिन्न संस्थाओं में 5 हजार से अधिक विद्यार्थी

मुख्यमंत्री मोहन यादव ने कहा कि वर्तमान में विभिन्न संस्थाओं में 5 हजार से अधिक विद्यार्थी पढ़ रहे हैं. ऋषि गालव विश्वविद्यालय में भारतीय ज्ञान परम्परा के साथ-साथ आधुनिक विज्ञान और टेक्नोलॉजी की शिक्षा भी छात्रों को मिलेगी. इसका लक्ष्य ऐसा नागरिक तैयार करना है, जो ज्ञानवान, चरित्रवान, नवाचारी और समाज के लिए उत्तरदायी हों. मुख्यमंत्री डॉ. यादव ऋषि गालव विश्वविद्यालय के भूमिपूजन कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे.

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि ऋषि गालव विश्वविद्यालय सरकार और समाज के साझा प्रयासों का एक सजीव उदाहरण बनेगा. राष्ट्रवादी विचारों को समर्पित इस विश्वविद्यालय की पूर्ण गौरव और गरिमा के साथ स्थापना में राज्य सरकार हरसंभव सहयोग प्रदान करेगी. शिक्षा जीवन की सबसे बड़ी पूंजी इै, इसे आधार मानकर उच्च शिक्षा के क्षेत्र में कई नवाचार किए हैं.

इस क्रम में विश्वविद्यालय के कुलपति को कुलगुरू का सम्मानजनक और श्रद्धापूर्ण संबोधन प्रदान किया गया है. संपूर्ण प्रदेश में गुरू पूर्णिमा का आयोजन भी इसी क्रम का नवाचार है. काले कोट के स्थान पर साफे के साथ भारतीय वेशभूषा में दीक्षांत समारोह की परम्परा आरंभ की गई. पहले कई-कई वर्षों तक दीक्षांत समारोह आयोजित नहीं होते थे, अब हर साल हर विश्वविद्यालय में दीक्षांत समारोह किए जा रहे हैं.

टोपे, टंट्या और अवंतीबाई के नाम विश्वविद्यालय

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि गुना में तात्या टोपे विश्वविद्यालय और खरगोन में क्रांतिसूर्य टंट्या भील विश्वविद्यालय स्थापित किया गया. सागर में केन्द्रीय विश्वविद्यालय पहले से ही था, इसके साथ ही राज्य सरकार द्वारा रानी अवंतीबाई लोधी विश्वविद्यालय आरंभ किया गया. प्रदेश के सभी 55 जिलों में पीएम कॉलेज ऑफ एक्सीलेंस की स्थापना कर इन्हें नई शिक्षा नीति के अनुरूप बहु संकाय कॉलेजों के रूप में विकसित किया जा रहा है.

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