ब्रेकिंग
HCL मलाजखंड और आईआईटी कानपुर की SATHEE पहल ने मलाजखंड में आयोजित किया करियर काउंसलिंग एवं जागरूकता स... गाजियाबाद में निषाद पार्टी का कार्यक्रम, काफी संख्या में कार्यकर्ता हुए शामिल कवर्धा में फर्जी डिजिटल पेमेंट का भंडाफोड़: फर्जी रिसीविंग दिखाकर नकद राशि ऐंठने वाले गिरोह पर एक्शन Bhilai News: भिलाई सेक्टर-2 में गटर की सफाई के दौरान मिला नवजात का शव, इलाके में सनसनी; जांच में जुट... Barwani News: बिजासन घाट में शिमला मिर्च से भरे मिनी ट्रक में लगी भीषण आग, कूदकर बची ड्राइवर की जान;... लाठीचार्ज के बाद भड़के डॉक्टर्स, सीनियर रेजिडेंट्स ने किया OPD का बहिष्कार; JDA का समर्थन MP High Court on Dacoity Act: जब प्रदेश में डकैत ही नहीं तो 45 साल पुराना एक्ट क्यों? हाईकोर्ट ने DG... भोपाल में स्टाइपेंड बढ़ाने की मांग पर अड़े इंटर्न डॉक्टर: कमला पार्क में धरना जारी, मिला कांग्रेस का... रतलाम में मॉडिफाइड साइलेंसरों पर गरजा पुलिस का बुलडोजर: 108 साइलेंसर कुचले, ₹1 लाख का जुर्माना वसूला Gwalior Achaleshwar Mandir: अचलेश्वर महादेव मंदिर की दानपेटी से निकली अनोखी चिट्ठियां, भक्त बोला- 'क...
देश

आपातकाल के 45 साल: जेल में पत्नी से मिलने पर बीच में रखी जाती थी 20 फीट की टेबल

45 years since the Emergency देश में 45 वर्ष पूर्व लगाए गए आपातकाल के दौरान हजारों लोगों को मीसा कानून के तहत जेल में डाल दिया गया था। इनमें ज्यादातर तत्कालीन जनसंघ (मौजूदा भाजपा) और समाजवादी नेता शामिल थे। इन्हें 19 माह तक तत्कालीन इंदिरा गांधी सरकार ने जेल में बंद रखा था। मुझे आपातकाल के पहले दिन ही मसूरी से गिरफ्तार किया गया था। वहां से दिल्ली लाकर तिहाड़ जेल भेज दिया गया। फिर यहां से अंबाला जेल।

बाद में मुझे रीढ़ की हड्डी में दर्द की शिकायत पर चंडीगढ़ स्थित पीजीआइ के जेल वार्ड में रखा गया। जिस कमरे में मुझे रखा गया था उसमें मुझसे पहले जयप्रकाश नारायण जी बंद थे। उस कमरे की खिड़कियों और रोशनदान को सील कर दिया गया था। कमरे में कहीं से भी रोशनी नहीं आ सकती थी। जाते ही मैंने देखा कि कमरे तक पहुंचने के लिए तीन सुरक्षा घेरों को पार करना पड़ता था। डॉक्टर, नर्स, भोजन पहुंचाने वालों, सफाई कर्मचारियों व सुरक्षार्किमयों तक के साथ हमेशा इंटेलिजेंस के लोग रहते थे।

किसी भी प्रकार की बातचीत की अनुमति नहीं थी। जब मेरी पत्नी मुझसे मिलने जेल में जाती थीं तो हमारे बीच में 20 फीट लंबी टेबल रखकर मुलाकात कराई जाती थी। इस दौरान भी इंटेलिजेंस के तीन-चार लोग मौजूद रहते थे। मैं पत्नी के हाथों अटल जी को पत्र भेजता था और पत्र में अक्सर यह लिखता था कि हम लोग जेल में बंद हैं। इसलिए आप (अटल जी) सरकार से कोई समझौता मत करना। अंबाला जेल का सहायक सुपरिटेंडेंट एक कागज देने के लिए जब मुझसे मिलने आया तो उसने कहा खुलजा सिम-सिम और दरवाजे खुलते चले गए और वह वहां पहुंचा। एक माह तक न मैंने सूरज देखा, न चांद और न आकाश। जेल में मुझे पता चला कि यहां बंद रहने के दौरान आपातकाल के खिलाफ जयप्रकाश जी ने भूख हड़ताल कर दी थी।

उनको रिहा करने से पूर्व सरकार ने उनकी मृत्यु हो जाने की स्थिति में देश भर में संभावित आक्रोश का मुकाबला करने के लिए पूरे प्रबंध कर लिए थे। चंडीगढ़ पीजीआइ के जेल वार्ड में रहते हुए मैंने दो बार हाईकोर्ट में याचिका डाली और कहा कि मुझे कोई बीमारी नहीं है। अत: मुझे काल कोठरी से निकाला जाए। हाईकोर्ट ने पहले आदेश दिया कि मुझे प्रतिदिन एक घंटा बाहर घुमाया जाए और बाद में चंडीगढ़ जेल में भेज दिया गया। बाद में मुझे चंडीगढ़ जेल से हिसार जेल में स्थानांतरित कर दिया गया। पूरे 19 महीने बाद जब सरकार ने सभी बंदियों को छोड़ा तब मेरी रिहाई हुई।

Related Articles

Back to top button