रीसाइक्लिंग तभी सफल हो सकती है जब नागरिक, सरकार, उत्पादक और ब्रांड्स साथ मिलकर काम करें – अजय माथुर

अपने आसपास के पर्यावरण को साफ और सुंदर बनाने के लिए हर किसी को आगे आना चाहिए, क्योंकि जब प्रत्येक व्यक्ति इस तरह की मुहिम से जुड़ेगा, तभी हम पर्यावरण को वर्तमान और भविष्य के लिए संरक्षित कर पाएंगे। पर्यावरण पर नीति अनुसंधान करने व जागरूकता फैलाने वाली संस्था TERI (दि एनर्जी एंड रिसोर्सेज इंस्टीट्यूट) भी इस दिशा में सालों से काम कर रही है और ज़मीनी सच्चाइयों का भी अध्ययन करती है । ऐसी ही एक पहल के अंतर्गत TERI हर 3 साल में यूज़ किये हुए कार्टन, यानी दूध जूस आदि के डिब्बे या टेट्रा पैक पैकेज की रीसाइक्लिंग को भी स्टडी करती है जिससे यह निर्धारित किया जा सके कि रीसाइक्लिंग किस हद तक बढ़ रही है, इसके बढ़ने में क्या रुकावटें है, और इन रुकावटों को कैसे हटाया जा सकता है। 2020 में पूरी हुई स्टडी के विषय में श्री अजय माथुर- डायरेक्टर जनरल, TERI ने कहा, “हम Tetra Pak जैसे कॉरपोरेट्स के प्रयासों की सराहना करते हैं, जो इस तरह के व्यापक स्टडी को शुरू करने के लिए स्वेच्छा से आगे आते हैं।”
Tetra Pak ने पर्यावरण को संरक्षित करने के लिए लगातार अपनी सक्रियता दिखाई है और कई शहरों में इस्तेमाल किए गए पेय कार्टन्स के लिए संग्रह केंद्र स्थापित करने के साथ-साथ सूचना, शिक्षा और क्षमता निर्माण कार्यक्रमों के माध्यम से जनता को जागरूक करने में अपना योगदान दिया है। बता दें कि TERI ने पेय कार्टन का प्रबंधन और रीसाइक्लिंग को लेकर Tetra Pak के सहयोग से एक स्टडी किया है, जिसे साल 2020 के शुरुआत में जारी किया गया। इस अध्ययन में भारत के 20 शहरों को चयनित किया गया। UBC प्रबंधन पर TERI द्वारा किए गए पहले की स्टडी की तुलना में यह देखा गया कि 2011 में रीसाइक्लिंग दर लगभग 29% थी, 2015 में लगभग 43% और 2019 में बढ़कर चुने गए 20 शहरों में 54% हो गई।
पर्यावरण के लिए रीसाइक्लिंग कितना महत्वपूर्ण है, इस मुद्दे पर कुछ महीने पहले TERI के डायरेक्टर जनरल, अजय माथुर, से बातचीत की गई। पेश है बातचीत के कुछ अंश –
सवाल – कृपया 2020 में रिलीज़ कि गयी स्टडी के कुछ मुख्य तथ्य हमारे साथ बाटें।
एक बात तो स्पष्ट है और यह हर स्टडी से ज्ञात हुआ है कि समय के साथ कार्टन्स कि रीसाइक्लिंग बढ़ती हुई पायी गयी। यह हमारी चौथी ऐसी स्टडी है और रीसाइक्लिंग का रेट लगातार बेहतर होता आया है; यह समझना ज़रूरी है कि यह बेहतर क्यों हो रहा है। मेरी समझ से इसके दो मुख्य कारण हैं – जानकारी और जागरूकता। लोग रीसाइक्लिंग को लेकर जागरूक हुए हैं और उनकी जानकारी भी बढ़ी है। लोग अब जानते हैं कि कार्टन्स या कचरे को इकट्ठा और उसका निपटान कैसे किया जाए। उधर कूड़ा बीनने वाले श्रमिक भी जानते हैं कि कचरा इकट्ठा करके कैसे ज्यादा पैसे कमाया जा सकता है। मुख्य मुद्दा यह है कि जब नगर निकाय कूड़ा बीनने वाले श्रमिक और उपभोक्ता के साथ मिलकर काम करते हैं, तो बदलाव होता है। हमने बैंगलोर और मैसूर जैसे शहरो में सौ प्रतिशत रीसाइक्लिंग देखी है। ऐसा इसलिए हुआ, क्योंकि स्थानीय निकाय, कूड़ा बीनने वाले श्रमिक और उपभोक्ता रीसाइक्लिंग को बढ़ावा देने के लिए मिलकर काम कर रहे हैं। निश्चित ही सौ प्रतिशत रीसाइक्लिंग संभव है।
सवाल – रीसाइक्लिंग को सफल बनाने के रास्ते में क्या अहम चुनौतियां हैं?
रीसाइक्लिंग के लिए सबसे बड़ी चुनौती, कचरे का संग्रह है, और उसे रीसाइक्लिंग सेंटर तक पहुंचाने का है। क्योंकि कई स्थानों पर लोगों को जानकारी नहीं है कि कचरा संग्रह से भी फायदा हो सकता है। ऐसी जगहों पर कचरा मकान के आसपास और रोड पर बिखरे हुए मिलते हैं। अगर हम कचरा संग्रह के निस्तारण की प्रक्रिया से सम्बंधित लाभ को साथ जोड़ लें, तो बदलाव जरूर दिखेगा। मुझे लगता है कि समय के साथ यह बदलाव बढ़ता रहेगा। चाहे यह कानून के कारणों के लिए हो, या पर्यावरणीय चेतना के लिए हो, जैसा कि Tetra Pak के मामले में देखने को मिल रहा है, ये ऐसी चीजें हैं जो रीसाइक्लिंग को बढ़ावा देंगी ।
सवाल – इसमें सिविक बॉडीज या स्थानिय निकायों की भूमिका क्या है?
स्थानीय नगर निकाय महत्वपूर्ण हैं- क्योंकि ये वो लोग हैं जो उपभोक्ताओं तक पहुंच के लिए सप्लाई चेन बनाने की दिशा में काम करते हैं। इसलिए स्थानीय सरकार को इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार करना होगा, ताकि रीसाइक्लिंग में मदद मिल सके। मुख्य मुद्दा यह है कि हमने कूड़ा संग्रह की मात्रा में वृद्धि देखी है, जो इस तथ्य को बताता है कि कूड़ा बीनने वालों को एहसास हो गया है कि इससे पैसे कमाया जा सकता है। इसलिए यदि वो इकट्ठा किए गए कचरे को डीलरों को बेचते हैं और डीलर उसे रिसाइकिल करने वालों के पास भेज देते हैं, तो इससे वो मुनाफा कमा सकते हैं। इससे संग्रह श्रंखला से जुड़ा हुआ हर व्यक्ति लाभ प्राप्त कर सकता है। यही वजह है कि आज हमें रीसाइक्लिंग में बड़ी सफलता मिल रही है।
सवाल – सरकार इस में किस तरह मदद कर सकती है?
मैं चाहूंगा कि बहुत जल्द सरकार कहे कि रीसाइक्लिंग एक ‘नॉर्म’ बन रही है , एक आदर्श बन रही है । वह कहें की हम रीसाइक्लिंग चाहते हैं, और हम जो सहायता कर सकतें हैं, हम वह करने के लिए तत्पर है। और हम चाहते हैं कि बाजार में रीसाइकल्ड चीज़ों का व्यापार बढ़े।
मैं आशा करता हूँ कि प्रमाणित करने वाली एजेंसी भी सामने आएँगी जोकि रीसाइकल्ड सामान की मात्रा और गुणवत्ता को प्रमाणित करेंगी। इस विषय पर चर्चा शुरू हो चुकी है, और मैं आशा करता हूँ कि एक पॉजिटिव परिणाम ज़रूर निकल कर आएगा, और रीसाइक्लिंग को बढ़ावा मिलेगा।
सवाल – टेट्रा पैक के पिछले 16 वर्षों के प्रयासों के बारे में आपका क्या कहना है? आने वाले समय में वह क्या बेहतर कर सकते हैं?
Tetra Pak ने अभी तक सही और ज़ोरदार प्रयास किये हैं, इसमें कोई शक नहीं। क्या बेहतर किया जा सकता है, या यूं कहें कि क्या करते रहना होगा – डीलर और रीसाइक्लर के बीच की जो कड़ी है, उसको और मज़बूत करते जाएं। यह पहले से ही काफी मज़बूत है, पर आगे भी मज़बूत बना रहना आवश्यक है। कूड़ा बीनने वाले श्रमिकों और रद्दीवालों का डीलर के साथ लिंक होना भी बहुत ज़रूरी है और यहाँ भी Tetra Pak ने काफी काम किया है। जब इन श्रमिकों को विश्वास होगा कि उनके संग्रह किये हुए यूज़्ड कार्टन्स का खरीदार तैयार बैठा है, तो वह बढ़ चढ़ कर इन्हे एकत्रित करेंगे। इसके अलावा म्युनिसिपेलिटी के साथ मिलकर काम करते रहना होगा ताकि रीसाइक्लिंग के रास्ते में कोई अड़चन न आ सके।





