ब्रेकिंग
Kolkata Blast 1993: सुप्रीम कोर्ट ने दोषी मोहम्मद राशिद खान की रिहाई पर लगाई रोक, जारी किया नोटिस Shala Praveshotsav 2026: गुजरात में शिक्षा का महाकुंभ; सीएम भूपेंद्र पटेल ने किया 'निपुण गुजरात' कार... Bhawanipur Election Case: ममता बनर्जी की याचिका पर कलकत्ता हाई कोर्ट का बड़ा आदेश; सुरक्षित रखे जाएंग... Jammu News: अमरनाथ यात्रियों के लिए तैयार हुआ आधार शिविर; भगवती नगर यात्री निवास में सुरक्षा और सुवि... Coaching Center Fire Safety: लखनऊ हादसे के बाद दिल्ली के कोचिंग सेंटरों का रियलिटी चेक; दांव पर है ह... Bharat Bhushan Tiwari Encounter: बिहार मानवाधिकार आयोग सख्त; प्रशासन से तलब की रिपोर्ट, पुलिस ने मान... Maharashtra Anti-Drug Drive: नशा तस्करों पर सीएम फडणवीस का बड़ा एक्शन; 254 करोड़ से ज्यादा का ड्रग्स... Dr. Syama Prasad Mookerjee: भाजपा नेता तरुण चुघ ने की बलिदान से जुड़े रिकॉर्ड सार्वजनिक करने की मांग Indore News: एंबुलेंस में न्याय मांगने पहुंची 80 वर्षीय बुजुर्ग; गांधी नगर में संपत्ति हड़पने का सनसन... Uttarakhand News: सीएम धामी की उच्चस्तरीय बैठक; चारधाम और हेमकुंट साहिब आने वाले पर्यटकों से की शांत...
देश

Air pollution impact: जंगलों की आग कैसे आपकी सेहत को प्रभावित करती हैं? जानिए इससे बचाव

नई दिल्ली। गर्मी के मौसम में जंगलों में आग लगना आम बात है। हमारे देश में देहरादून के आसपास अक्सर जंगल में आग लग जाती है। इसके बाद जैसे ही गर्मी खत्म होती है नवंबर के आसपास ही हरियाणा और पंजाब में किसान खेतों में पराली जलाने लगते हैं। इन घटनाओं से जबरदस्त वायु प्रदूषण होता है।

यूनिवर्सिटी ऑफ वाशिंटन में ऑक्यूपेशनल हेल्थ साइंस के प्रोफेसर जोएल कोफमान ने अपने अध्ययन के आधार पर बताया है कि 2.5 माइक्रोन से ज्यादा बड़े प्रदूषण के कण स्वास्थ्य पर बहुत बुरा असर डालते हैं। इसका तुंरत असर यह होता कि आंखों में जलन के साथ खुजली होने लगती है, गला सूखने लगता है और सूखी खांस तेज होने लगती। प्रदूषण के ये कण फेफड़े में घुस जाते हैं, जिससे सांस संबंधी दिक्कतों का सामना कर रहे लोगों को भारी नुकसान होता है। इस प्रदूषण से अस्थमा रोगियों को सबसे ज्यादा परेशानी होती है।

कोविड सक्रमण का भी खतरा ज्यादा:

अध्ययन के मुताबिक जंगल में आग लगने या खेत में पराली जलाने के तुरंत बाद अस्थमा के मरीजों को अस्पताल में भर्ती कराने की संख्या में 8 प्रतिशत की बढोतरी हो जाती है। अध्ययन में यह भी पाया गया कि जैसे ही पर्यावरण में 2.5 पार्टिकुलेट मैटर (पीएम) से ज्यादा प्रदूषण बढ़ता है तो हार्ट अटैक, स्ट्रोक, अस्थमा और सांस से संबंधित रोगियों की संख्या में इजाफा होना शुरू हो जाता है। अध्ययन में पाया गया कि जिस क्षेत्रों में आग लगती है वहां से सौ किलोमीटर दूर तक बच्चों में इसके कारण अंगों में सूजन होते देखा गया। यहां तक कि इम्यून सिस्टम भी कमजोर पाया गया। अध्ययन के मुताबिक जंगल में आग लगने का प्रभाव बहुत दिनों तक इंसानों पर रहता है। अध्ययन में यह भी कहा गया कि आग लगने वाले क्षेत्रों में कोविड संक्रमण के बढ़ने का भी जोखिम ज्यादा हो जाता है, क्योंकि इससे लोगों में इम्युननिटी कम होती है।

इससे कैस बचें

  • अगर पराली जलाने से प्रदूषण बढ़ता है तो जहां तक संभव हो बाहर न निकलें, खासकर सांस की परेशानी से संबंधित लोग।
  • हमेशा खिड़की बंद कर रखें।
  • अगर आप खरीद सकते हैं तो घर में एयर प्यूरीफायर का इस्तेमाल करें। अगर एयर प्यूरीफायर नहीं खरीद सकते तो घर में एग्जॉस्ट फैन का इस्तेमाल कर सकते हैं।
  • अगर आप एसी इस्तेमाल करते हैं तो इसे रिसर्कुलेट मोड में रखें यानी सिर्फ कुलिंग ही हो। इसके पंखे न चलाएं।
  • एसी के फिल्टर को रोजाना चेक करें।

Related Articles

Back to top button