ब्रेकिंग
HCL मलाजखंड और आईआईटी कानपुर की SATHEE पहल ने मलाजखंड में आयोजित किया करियर काउंसलिंग एवं जागरूकता स... गाजियाबाद में निषाद पार्टी का कार्यक्रम, काफी संख्या में कार्यकर्ता हुए शामिल कवर्धा में फर्जी डिजिटल पेमेंट का भंडाफोड़: फर्जी रिसीविंग दिखाकर नकद राशि ऐंठने वाले गिरोह पर एक्शन Bhilai News: भिलाई सेक्टर-2 में गटर की सफाई के दौरान मिला नवजात का शव, इलाके में सनसनी; जांच में जुट... Barwani News: बिजासन घाट में शिमला मिर्च से भरे मिनी ट्रक में लगी भीषण आग, कूदकर बची ड्राइवर की जान;... लाठीचार्ज के बाद भड़के डॉक्टर्स, सीनियर रेजिडेंट्स ने किया OPD का बहिष्कार; JDA का समर्थन MP High Court on Dacoity Act: जब प्रदेश में डकैत ही नहीं तो 45 साल पुराना एक्ट क्यों? हाईकोर्ट ने DG... भोपाल में स्टाइपेंड बढ़ाने की मांग पर अड़े इंटर्न डॉक्टर: कमला पार्क में धरना जारी, मिला कांग्रेस का... रतलाम में मॉडिफाइड साइलेंसरों पर गरजा पुलिस का बुलडोजर: 108 साइलेंसर कुचले, ₹1 लाख का जुर्माना वसूला Gwalior Achaleshwar Mandir: अचलेश्वर महादेव मंदिर की दानपेटी से निकली अनोखी चिट्ठियां, भक्त बोला- 'क...
देश

कभी नीतीश के करीबी थे उदय नारायण चौधरी, अब तेजस्‍वी के साथ मिल कर मांझी को दे रहे टक्‍कर

पटना। उदय नारायण चौधरी का जन्म पटना के पास ही मसौढ़ी में हुआ है। उदय नारायण चौधरी को पहचान तब मिली जब उन्‍होंने 1984 में बंधुआ मंजदूरी के खिलाफ आवाज बुलंद की। इस पर उन्‍होंने कहा था कि मैं हमेशा से दलित वर्ग के लिए खड़ा हूं। जदयू से राजनीति में लंबी पारी खेलने वाले उदय नारायण चौधरी कभी नीतीश कुमार के करीबी माने जाते थे। हालांकि वक्‍त के साथ हालात बदले और अब वह  महागठबंधन की तरफ से ताल ठोक रहे हैं। चौधरी जद (यू) से एक प्रमुख दलित नेता थे और 1990-95 तक इमामगंज विधानसभा क्षेत्र का प्रतिनिधित्व किया। इसके बाद फिर 2000–2015 तक इसके बाद पूर्व मुख्यमंत्री जीतन राम मांझी से 2015 के चुनाव हार गए थे। इस बार फिर से वह मांझी के खिलाफ गया की इमामगंज सीट से ताल ठोकेंगे। उन्होंने 2005-2015 से बिहार विधान सभा के अध्यक्ष के रूप में कार्य किया। इसके साथ ही वे पद संभालने वाले बिहार के पहले दलित शख्‍स बने थे।

कभी हुआ था उन पर हमला 

बता दें कि 2018 की फरवरी में बिहार के पूर्व विधानसभा अध्‍यक्ष और जदयू नेता उदय नारायण चौधरी पर नवादा जिले में कुछ असमाजिक तत्‍वों ने हमला कर दिया था। बकौल चौधरी वे वहां से किसी तरह बच कर निकले। हालांकि, प्रशासन ने इस तरह की घटना से इनकार कर दिया था। इस बाबत पूर्व विस अध्यक्ष उदय नारायण ने कहा कि उनपर हमला किया गया। पीड़ित परिवार से मिलने नहीं दिया गया। साथ रहे सुरक्षा कर्मी ने बीच बचाव किया, अन्‍यथा कोई बड़ी घटना हो सकती थी। जान भी जा सकती थी। एनडीए की सरकार में महादलित के असुरक्षित होने का आरोप लगाया था।

क्‍यों गए थे नवादा 

उदय नारायण चौधरी नवादा जिले के अपसड़ गांव में महादलित टोले में एक मांझी की हत्‍या के बाद मामले की जांच के सिलसिले में वहां पहुंचे थे। इस दौरान उन्‍हें पीड़ित परिजनों से बातचीत करने से रोका गया। तब उन्‍होंने उसे नवादा चलने को कहा। उनके इस बात पर कुछ लोगों ने रोका-टोकी की। इसके बाद बात बढ़ते गई और किसी ने उनके ऊपर हाथ चला दिया। मामले को बिगड़ता देख चौधरी वहां से निकल गए।

Related Articles

Back to top button