ब्रेकिंग
Jantar Mantar Protest: दिल्ली में SIR और चुनाव आयोग के खिलाफ MCIM का बड़ा प्रदर्शन, कई सांसद होंगे श... BJP News: 'सार्वजनिक जीवन में रखें शुचिता', पार्टी नेताओं को महंगे तोहफों से बचने की सलाह; चुनावी रा... Hyderabad Crime: मणिकोंडा के फ्लोटिला अपार्टमेंट में 'चड्डी गैंग' का धावा, महिला पर हमला कर लाखों की... Mumbai Illegal Construction: मुंबई में 14 फीट से ऊपर बने मकानों पर घमासान, कांग्रेस और शिवसेना UBT न... Kanpur Flood News: पांडु नदी के उफान में फंसा गर्भवती महिला का परिवार, 25 मिनट में NDRF ने किया सुरक... UP Politics: यूपी में राज्यसभा की 10 सीटों का सियासी गणित, 8 वोटों की खातिर क्या फिर होगी क्रॉस वोटि... Agra News: मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के पैतृक घर पर कांग्रेस का हंगामा, दीवार पर पोती कालिख; ... Traffic Challan Recovery: नहीं भरा ट्रैफिक चालान तो कट जाएगी बिजली! सुप्रीम कोर्ट का बिजली बिल से जो... Barapullah Phase 3 Inauguration: दिल्ली को मिली बड़ी सौगात, अमित शाह कल करेंगे बारापुला फेज-3 का उद्... UP Crime News: फतेहपुर के मलवां कस्बे में भीषण सिलेंडर विस्फोट, मकान मलबे में तब्दील; सीएमओ ने की 4 ...
देश

विदेश मंत्री एस जयशंकर बोले- भारतीय इतिहास में सरदार पटेल का योगदान बेहद अहम

नई दिल्ली। विदेश मंत्री एस जयशंकर ने शनिवार को कहा कि सरदार वल्लभभाई पटेल का भारतीय इतिहास में योगदान जम्मू और कश्मीर, हैदराबाद और जूनागढ़ को भारत में मिलाने की उनकी भूमिका से कहीं अधिक है। सरदार पटेल स्मृति व्याख्यान में विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने ये बात कही।

विभाजन के दौरान रियासतों को एकीकृत करने में पटेल की भूमिका के बारे में बोलते हुए जयशंकर ने कहा कि सरदार पटेल जम्मू और कश्मीर, हैदराबाद और जूनागढ़ का भारत में विलय कराने के लिए जाना जाता है, लेकिन वास्तव में उनका योगदान और भी अधिक था। उन्होंने कहा कि स्वतंत्र भारत के लिए पटेल ने सिविल सेवाओं को फिर से बनाने में योगदान दिया। वे ऐसा कर सकते थे क्योंकि उसके पास प्रशासनिक कौशल था।

जयशंकर ने कहा कि महत्वपूर्ण मुद्दों के लिए जनता की ऊर्जा का इस्तेमाल करने की उनकी क्षमता अद्भूत थी। उनकी आर्थिक समझ पर शायद इतिहास में कम ध्यान दिया गया है, जितनी वो हकदार थे। पटेल के योगदान की सराहना करते हुए, विदेश मंत्री ने कहा कि उन्होंने स्पष्ट रूप से अधिक उद्यमशीलता को बढ़ावा देकर तेजी से राष्ट्रीय क्षमताओं के निर्माण के महत्व को पहचाना। जब राष्ट्रीय सुरक्षा की बात आती है तो निस्संदेह वह सबसे कठोर और व्यावहारिक थे।

वहीं, चीन के साथ जारी सीमा विवाद पर बोलते हुए उन्होंने कहा कि सामान्य स्थिति बहाल करने के लिए, दोनों देशों के बीच हुए समझौतों का निश्चित तौर पर पूरी निष्ठा के साथ सम्मान किया जाना चाहिए। जहां तक वास्तविक नियंत्रण रेखा की बात है, तो यथास्थिति में एकतरफा बदलाव की कोई भी कोशिश अस्वीकार्य है। विदेश मंत्री ने कहा कि सीमावर्ती क्षेत्रों में शांति ने भारत और चीन के बीच विस्तारित सहयोग का आधार बनाया, लेकिन जैसे ही महामारी सामने आई, आपसी रिश्ते गंभीर तनाव में आ गए हैं।

Related Articles

Back to top button