ब्रेकिंग
Parsva Ekadashi 2026: भाद्रपद शुक्ल पक्ष की परिवर्तिनी एकादशी की तिथि, मुहूर्त और धार्मिक मान्यता Cesarean Delivery Care Tips: सी-सेक्शन के बाद टांके ठीक होने में कितना समय लगता है? जानें महिलाओं की... Jashpur News: जशपुर के ऐतिहासिक रानीसती (डोंगा) तालाब का बदलेगा स्वरूप; ₹4.17 करोड़ से होगा जीर्णोद्... Raipur Minor Rescued: चलती ट्रेन में मिला मौदहापारा का लापता नाबालिग जीशान; रायपुर पुलिस और RPF का ब... Korba Fertilizer Crisis: दावों की खुली पोल! कोरबा में DAP और NPK खाद की भारी किल्लत, लक्ष्य से आधा भ... Dhamtari Elephant Alert: पैरी नदी पार कर धमतरी पहुँचा चंदा दल का दंतैल हाथी; भालू की मौजूदगी से ग्रा... Kawardha News: कवर्धा में शराबियों और चखना सेंटरों पर गाज; सिटी कोतवाली इलाके में दर्ज हुए आबकारी के... Balodabazar News: बलौदाबाजार में मीडिया से विवाद और शराबी शिक्षक मामले में बड़ी कार्रवाई; प्राचार्या... Jharkhand Congress News: नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी का झारखंड दौरा तय; खूंटी और रांची में दो बड़े का... Ranchi Railway News: रांची रेल मंडल में ऐतिहासिक पहल; पहली बार 'इंटर डिपार्टमेंटल स्पोर्ट्स मीट-2026...
देश

नहीं माने किसान, कई जगह पुलिस से झड़पें, निरंकारी मैदान में धरने की पेशकश ठुकराई, दिल्ली में बढ़ा तनाव

नई दिल्ली। केंद्रीय कृषि कानूनों के खिलाफ दिल्ली का घेराव करने पर आमादा किसान किसी भी सूरत में मानने को तैयार नहीं हैं। पुलिस ने बुराड़ी स्थित निरंकारी मैदान में धरने के लिए जगह देने की पेशकश की थी, लेकिन किसानों ने उसे ठुकरा दिया। उनका कहना था कि उन्हें जंतर-मंतर ही जाकर धरना देना है। फिलहाल वे सिंघू बार्डर पर धरने पर बैठ गए और कहा कि जिसको बात करनी है वह यहीं आए। शुक्रवार को दूसरे दिन भी जगह-जगह जाम से लोगों को भारी मुश्किलें पेश आईं। कई लोगों की फ्लाइट छूट गई। एनसीआर को जोड़ने वाले रूटों पर मेट्रो नहीं चलीं, दैनिक जरूरत की वस्तुओं की आपूर्ति पर भी असर पड़ा। राजनीति भी चरम पर पहुंच गई। कांग्रेस और आम आदमी पार्टी ने खुलकर आंदोलनकारियों का समर्थन किया है।

लगातार दूसरे दिन दिल्ली की हरियाणा और उत्तर प्रदेश से लगने वाली सभी सीमाओं पर जाम से लोग परेशान हुए। फरीदाबाद, गुरुग्राम और नोएडा से दिल्ली आने वाले यात्रियों को कई घंटे तक जाम से जूझना पड़ा। सबसे ज्यादा असर दिल्ली-गुरुग्राम के रजोकरी बॉर्डर और नोएडा-दिल्ली के कालिंदी कुंज बॉर्डर पर दिखाई दिया। वाहनों की जांच के चलते भीषण जाम लग गया। गाजियाबाद में पुलिस ने किसानों को यूपी गेट तक पहुंचने ही नहीं दिया, लेकिन मोदीनगर और हापुड़ में किसानों ने हाईवे को करीब तीन घंटे तक जाम रखा।

हरियाणा की तरफ से रहे किसान शुक्रवार सुबह सिंघु बॉर्डर पहुंचते ही उग्र हो गए। उन्होंने बैरिकेड तोड़कर दिल्ली की सीमा में घुसने का प्रयास किया। सुरक्षा बलों ने रोकने की कोशिश की तो उनसे भिड़ गए। आखिर पुलिस ने आंसू गैस के गोले दाग उन्हें खदेड़ दिया। इसके बाद दोपहर करीब एक बजे सबसे पहले सिंघु बॉर्डर से सोनीपत की ओर जाने वाले रास्ते पर लगाए बैरिकेड को किसानों ने तोड़ा। जवाबी कार्रवाई में पुलिस की ओर से उन्हें रोकने के लिए वाटर कैनन व आंसू गैस के गोलों का इस्तेमाल किया गया। एक किसान ने सीमेंट के बैरिकेड पर ट्रैक्टर चढ़ा दिया। सुरक्षा बल के जवानों ने जब उसे रोकने का प्रयास किया तो किसानों ने उनपर लाठी-डंडों से हमला कर दिया। करीब एक घंटे तक किसानों और पुलिस, सुरक्षा बल के जवानों के बीच झड़प चलती रही। इसके बाद सुरक्षा के दूसरे घेरे में लगे सीमेंट के बैरिकेड को किसानों ने पार कर लिया। जवाबी कार्रवाई में कुछ पुलिस कर्मियों ने भी किसानों पर पथराव किया। किसानों को रोकने में पुलिस को जबरदस्त बैरिकेडिंग की। उन पर ड्रोन ने नजर रखी गई

दिल्ली सरकार ने नहीं दी अनुमति

जरूरत पड़ने पर हिरासत में लिए गए किसानों को रखने के लिए पुलिस ने दिल्ली सरकार से नौ स्टेडियमों को अस्थायी जेल के रूप में इस्तेमाल की अनुमति मांगी थी, लेकिन सरकार ने इन्कार कर दिया।

तैयारी के साथ हैं किसान

पंजाब के किसानों केपास महीनों का राशन है। गैस सिलेंडर है। वाहनों के पेट्रोल-डीजल के ड्रम हैं। यहां तक कि आटा चक्की भी है। दिल्ली में जमे रहने की उन्होंने महीन भर की तैयारी कर रखी है।

जंतर-मंतर पर सुरक्षा-व्यवस्था रही सख्त

संसद मार्ग की ओर जाने वाले रास्तों को सुबह से बंद कर दिया गया था। टॉलस्टॉय मार्ग, बाराखंभा रोड पर भी पुलिस ने जगह-जगह बैरिके¨डग कर रखी थी। सख्त सुरक्षा व्यवस्था के कारण कोई भी किसान जंतर-मंतर तक नहीं पहुंच पाया।

आखिर खोल दिए सभी बार्डर

सबसे ज्यादा मुश्किलें हरियाणा में आईं। पंजाब से एक दिन पहले दिल्ली के लिए रवाना हुए किसानों को रोकना मुश्किल साबित हुआ। हरियाणा पुलिस के बैरिकेड आदि तोड़ते हुए किसान आगे बढ़ते गए। शाम होते-होते राज्य सरकार के निर्देश पर सभी बार्डर खोल दिए गए और किसानों को जाने दिया जाने लगा। इसके बाद हरियाणा में यातायात सामान्य हो गया। किसान पानीपत से चलकर सोनीपत के कुंडली बार्डर और सिरसा से चलकर बहादुरगढ़ में टिकरी बार्डर पहुंचे और दिल्ली में प्रवेश कर गए। बहादुरगढ़ में किसानों और पुलिस के बीच टकराव भी हुआ। पुलिस ने किसानों को रोकने के लिए वाटर कैनन से पानी की बौछार की और आंसू गैस के गोले छोड़े। लेकिन इससे पहले सिरसा से हांसी, रोहतक, बहादुरगढ़ होकर दिल्ली जाने वाले रूट पर किसानों को रोकने की कोशिश नहीं की गई। हालांकि सिरसा के डबवाली में पंजाब के किसानों को हरियाणा में प्रवेश करने के लिए संघर्ष करना पड़ा। उन्होंने बैरिकेड तोड़ दिए और हरियाणा में प्रवेश कर गए। सिरसा में वाहन पलट जाने से दबकर पंजाब के एक किसान कान्हा सिंह की मौत भी हो गई।

मुरैना से ग्वालियर तक हाईवे जाम

राजस्थान-उत्तर प्रदेश बॉर्डर पर आगरा के सैंया-मनिया में समाजसेविका मेधा पाटकर के साथ किसान हाईवे पर बैठ गए। इस कारण आगरा-दिल्ली की ओर जाने वाले वाहनों को मुरैना से ग्वालियर और ग्वालियर से सरायछौला चंबल पुल के बीच रोक दिया गया। मुरैना-बानमोर-ग्वालियर के बीच कई किलोमीटर लंबी वाहनों की कतार नजर आ रही है तो इधर सरायछौला से मुरैना और दूसरी ओर चंबल पुल की ओर तीन से चार किलोमीटर लंबी वाहनों की कतार लग गई।

खुलकर आई कांग्रेस

किसानों के समर्थन में कांग्रेस खुलकर आ गई। पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी ने ट्वीट कर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर हमला किया। कहा कि दुनिया की कोई भी सरकार सच्चाई की लड़ाई से लड़ने वाले किसानों को नहीं रोक सकती है। प्रधानमंत्री को याद रखना चाहिए कि जब भी अहंकार सच्चाई पर ले जाता है, वह हार जाता है। मोदी सरकार को काले कानूनों को वापस लेना होगा। यह सिर्फ शुरुआत है! कांग्रेस प्रवक्ता रणदीप सुरजेवाला पानीपत में पहुंचकर किसानों को समर्थन दिया तो हरियाणा के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने ट्वीट कर लोगों से अपील की कि किसानों के रुकने-ठहरने, खाने-पीने तथा डाक्टरी इलाज की व्यवस्था करने में सहयोग करें। पंजाब के मुख्यमंत्री अमरिंदर सिंह ने दिल्ली में प्रवेश करने की अनुमति देने के केंद्र सरकार के फैसले का स्वागत किया।

मनोहर ने वार्ता का प्रस्ताव रखा

हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने ट्वीट किया कि हमने बातचीत के दरवाजे खोल रखे हैं और केंद्र व राज्य सरकार किसानों से उनके मसलों पर बातचीत को तैयार है।

Related Articles

Back to top button