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कोरोना को लेकर सावधानी की जरूरत, नहीं तो होगी और सख्ती

चंडीगढ़: कोरोना महामारी को लेकर बेशक केंद्र सरकार ने सभी राज्य सरकारों व केंद्र शासित प्रदेशों के प्रशासकों को अपनी सुविधा और जरूरत अनुसार कोरोना के दृष्टिगत प्रतिबंध लगाने के निर्देश दे दिए हैं लेकिन हैल्थ माहिरों के अनुसार सच्चाई यह है कि जब तक सरकार की ओर से सख्ती नहीं होती, सार्थक परिणम आने मुश्किल हैं।

पंजाब केेसरी अपने पुराने संस्करणों में पहले ही खुलासा कर चुका है कि आने वाले समय में नागरिकों ने कोविड-19 के प्रोटोकॉल का अनुपालन न किया तो सरकार सख्त कदम उठाने के लिए बाध्य हो जाएगी। हालांकि सरकारी रिपोर्ट्स के अनुसार करवाचौथ और दीपावली उत्सवों के बाद राज्य में कोरोना संक्रमितों की संख्या में दिन-प्रतिदिन बढ़ौतरी दर्ज हो रही है लेकिन नकेल कसने के लिए प्रयासों की जरूरत पर जोर दिया जा रहा है। शहरों और कस्बों में रात का कफ्र्यू लगाए जाने का मतलब यही है।

हालांकि प्रशासन से जुड़े सूत्रों का कहना है कि स्थिति में सुधार नहीं हुआ तो और सख्त प्रतिबंध लागू किए जा सकते हैं। हालांकि दूसरे लॉकडाऊन की संभावना कम है, लेकिन मार्कीट विशेष की स्थिति को देखकर स्थानीय निकाय विभाग आवश्यक निर्णय ले सकता है। केंद्र सरकार द्वारा मामले पर राज्य सरकारों व केंद्र शासित प्रदेशों के प्रशासकों को निर्णय लेने के लिए अधिकृत करने से साफ जाहिर है कि अब कोरोना महामारी को लेकर केंद्र आॢथकता के कोण से मामला राज्यों के सिर पर डालना चाहता है। लॉकडाऊन की संभावनाएं निर्मूल करते हुए राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों से कहा गया है कि जरूरत पड़ी तो केंंद्र की मंजूरी लेना जरूरी होगा।

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