ब्रेकिंग
शहडोल हादसा: निर्माणाधीन मकान की छत गिरी, 3 मजदूर घायल; 2 की हालत गंभीर दतिया में भाजपा की मुसीबत: नरोत्तम मिश्रा का टिकट कटने के बाद उपजे विरोध और डैमेज कंट्रोल की रणनीति इंदौर में 'माय यूथ-माय प्राइड कॉन्क्लेव-2026': सीएम मोहन यादव बोले- वर्ष 2027 होगा युवा शक्ति को समर... बाबा महाकाल के खजाने का सच: करोड़ों की संपत्ति, बेशकीमती जमीन और लाखों श्रद्धालुओं की आस्था दतिया उपचुनाव: नरोत्तम मिश्रा की समर्थकों से शांति की अपील, कहा- 'पार्टी का फैसला सर्वोपरि' Vietnam Boat Accident: वियतनाम में भारतीय पर्यटकों के साथ बड़ा हादसा, बचाव अभियान जारी नरोत्तम मिश्रा को टिकट न मिलने पर कैलाश विजयवर्गीय की दो टूक, कहा- आशुतोष तिवारी भारी मतों से जीतेंग... दतिया उपचुनाव: नरोत्तम मिश्रा का टिकट कटने पर भाजपा में घमासान, समर्थकों का प्रदर्शन और पथराव MP Crime News: लवकुशनगर में 8वीं के छात्र के साथ कुकर्म, आरोपी सरकारी कर्मचारी सलाखों के पीछे मुजफ्फरनगर: कांवड़ यात्रा के दौरान डीजे पर चढ़कर युवक ने कोतवाल को दी वर्दी उतरवाने की धमकी, वीडियो व...
देश

इस वित्त वर्ष के अंत तक राज्यों पर कर्ज का बोझ उनकी सकल जीडीपी के 36 फीसद तक पहुंचने की आशंका

नई दिल्ली। आखिरकार विपक्षी सत्ता वाली अंतिम राज्य सरकार झारखंड भी जीएसटी क्षतिपूर्ति पर केंद्र सरकार के फार्मूले को स्वीकार करने को तैयार हो गई है। झारखंड की हेमंत सोरेन सरकार ने केंद्र सरकार को जीएसटी क्षतिपूर्ति के लिए प्रस्तावित पहले फार्मूले को हरी झंडी दे दी है। अब राज्य को केंद्र सरकार की अनुशंसा पर 1689 करोड़ रुपये का विशेष कर्ज उपलब्ध कराया जाएगा। कर्ज की अदाएगी के लिए राज्य सरकार अब ज्यादा लंबे समय तक कुछ विशेष उत्पादों पर अतिरिक्त टैक्स वसूल सकेगी। वैसे अब देश के सभी 28 राज्यों और तीन केंद्र शासित प्रदेशों को ऐसा करना होगा क्योंकि सभी ने इसी फार्मूले को अपनाने की मंजूरी दी है।

वित्त मंत्रालय की तरफ से बताया गया है कि, ”झारखंड की स्वीकृति के बाद सभी राज्य व केंद्र शासित प्रदेशों ने जीएसटी क्षतिपूर्ति पर केंद्र के प्रस्ताव को स्वीकार कर लिया है। पूर्व में जिन राज्यों ने इस फार्मूले को स्वीकार किया है उनके लिए 30 हजार करोड़ रुपये कर्ज की व्यवस्था पहले ही किया जा चुकी है। इसका वितरण भी 26 राज्यों व दूसरे केंद्र शासित प्रदेशों में हो चुका है। अब अगले चरण में जो कर्ज लिया जाएगा उसमें से छत्तीसगढ़ व झारखंड का भी हिस्सा होगा। 7 दिसंबर, 2020 को अगले चरण के लिए कर्ज उपलब्ध कराया जाएगा।”

कर्ज की इस अतिरिक्त राशि की अदाएगी के लिए भले ही राज्यों को लंबे समय तक विशेष टैक्स वसूलने की इजाजत होगी लेकिन इसके बावजूद राज्यों पर समग्र कर्ज का बोझ काफी बढ़ जाएगा। सभी राज्यों पर इस वित्त वर्ष के अंत तक कर्ज का बोझ उनके संयुक्त सकल घरेलू उत्पाद का 36 फीसद हो जाएगा। यह आकलन आर्थिक शोध एजेंसी क्रिसिल की तरफ से जारी एक रिपोर्ट में की गई है।

इसमें कहा गया है कि पिछले एक दशक में राज्यों को इतना ज्यादा कर्ज कभी नहीं लेना पड़ा है। कोविड-19 की वजह से जीएसटी कलेक्शन में भारी कमी का खामियाजा राज्यों को उठाना पड़ रहा है। उस पर उन्हें अतिरिक्त कर्ज भी लेना पड़ रहा है। रिपोर्ट के मुताबिक राज्यों का वित्तीय स्वास्थ्य अगले कुछ वर्षो तक काफी मुश्किल में होगा। वजह यह है कि सभी राज्यों के कुल राजस्व संबंधी व्यय में 75 फीसद हिस्सा ऐसा है जिसमें कोई कटौती नहीं की जा सकती क्योंकि इसमें वेतन, पेंशन व अन्य आवश्यक मद में खर्च किये जाने वाले व्यय हैं।

Related Articles

Back to top button