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आंदोलन से दिल्ली और आस पास करीब 27 हजार करोड़ का नुकसान

देश की राजधानी की सीमाओं पर जारी किसान आंदोलन का सबसे बुरा असर कारोबारियों पर पड़ा है। किसान आंदोलन का आज 37वां दिन है और इस दौरान दिल्ली या उससे सटे राज्यों खासकर उत्तर प्रदेश, हरियाणा, पंजाब एवं राजस्थान को करीब 27 हजार करोड़ रुपए के व्यापार का नुकसान हो चुका है।

कन्फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स (CAIT) का कहना है कि कैट और ट्रांसपोर्ट सेक्टर के सबसे बड़े संगठन आल इंडिया ट्रांसपोर्ट वेल्फेयर एसोसिएशन (एटवा)  के संयुक्त प्रयासों से आवश्यक वस्तुओं की सप्लाई बिना रुकावट जारी है। संगठन के मुताबिक आगे भी जरूरी वस्तुओं की सप्लाई में कोई कमी नहीं आने दी जाएगी। हालांकि सप्लाई चेन दुरुस्त रखने के लिए दूसरे राज्यों से यहां आने वाले वाहनों को नेशनल हाईवे छोड़कर वैकल्पिक मार्गों से लंबा चक्कर लगा कर दिल्ली आना पड़ता है।

पंजाब और हरियाणा से दिल्ली आने वाले माल की आपूर्ति पर काफी बुरा असर पड़ा है। दोनों राज्यों से मशीनरी सामान, कल पुर्जे, पाइप फिटिंग, सैनिटेरी फिटिंग, अन्य स्पेयर पार्ट्स, बिजली एवं पानी की मोटर, बिल्डिंग हार्डवेयर और कृषि वस्तुओं की आपूर्ति प्रभावित हुई है। अन्य राज्यों की बात करें तो हिमाचल, जम्मू कश्मीर, मध्य प्रदेश , गुजरात, महाराष्ट्र एवं अन्य राज्यों से दिल्ली आने वाले सामान में प्रमुख रूप से FMCG प्रोडक्ट, कंज्यूमर डयूरेबल, खाद्धान, कॉस्मेटिक्स, कपड़ा, फल एवं सब्जी के साथ बाकी किराने का सामान, ड्राई फ्रूट्स, इलेक्ट्रॉनिक गुड्स, दवाइयां और सर्जिकल सामान, भवन निर्माण का सामान, रेडीमेड कपड़े ,फोटोग्राफिक इक्विपमेंट जैसे उत्पाद शामिल हैं। यानी इन चीजों का व्यापार करने वालों को तगड़ा नुकसान हुआ है।

दिल्ली में थोक और खुदरा कारोबार का गणित
दिल्ली न तो कोई इंडस्ट्रियल स्टेट है और न ही कृषि राज्य लेकिन ये देश का सबसे बड़ा सप्लाई सेंटर है। यहां पूरे देश से माल आता और जाता है। एक रिपोर्ट के मुताबिक राजधानी में रोजाना करीब 50 हजार ट्रक देश के विभिन्न राज्यों से सामान लेकर दिल्ली आते हैं। वहीं 30 हजार ट्रक रोज दिल्ली से बाहर अन्य राज्यों में डिलीवरी के लिए निकलते हैं। किसान आंदोलन के चलते न केवल दिल्ली सामान आने पर बल्कि दिल्ली से बाकी देश में सामान जाने पर भी असर पड़ा है। दिल्ली में प्रतिदिन करीब 5 लाख व्यापारी अन्य राज्यों से सामान की खरीदी करने आते हैं और ये काम फिलहाल ठप पड़ा है। देश को हो रहे भारी आर्थिक नुकसान को देखते हुए अधिकांश व्यापारी संगठन और छोटे-बड़े सभी कारोबारी जल्द से जल्द सरकार और किसान नेताओं के बीच चर्चा के जरिये समाधान निकलने की उम्मीद कर रहे हैं।

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