ब्रेकिंग
सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला: कर्नाटक में UAPA मामलों की रोजाना सुनवाई के लिए बनेगा अलग स्पेशल कोर्ट जस्टिस यशवंत वर्मा मामले में बड़ी कार्रवाई, राज्यसभा में पेश की गई 3 सदस्यीय जांच समिति की रिपोर्ट देहरादून-मसूरी मार्ग पर सड़क चौड़ीकरण के दौरान भीषण भूस्खलन, सड़क पर गिरा भारी मलबा जालंधर के अवतार नगर में सनसनीखेज डबल मर्डर, कलयुगी युवक ने अपनी पत्नी और पिता की हत्या कर मचाया हड़क... 'जंतर-मंतर सीजन-2' का जल्द होगा आगाज: CJP फाउंडर अभिजीत दिपके का बड़ा ऐलान, हॉल न मिलने पर भाजपा पर ... नोएडा में 'स्पेशल 26' स्टाइल में 29 लाख की भीषण लूट, फर्जी GST अधिकारी और पुलिसकर्मी बनकर 5 शातिर गि... बिहार में शराबबंदी लागू होने के एक दशक बाद फिर छिड़ी बहस, NCAER रिपोर्ट के बाद जीतन राम मांझी का बड़... जालोर में गोमाता के प्रति अनूठी आस्था, 'राधा' गाय पहनती है 10 किलो चांदी के गहने, बन रहा 1 करोड़ का ... ग्रेटर नोएडा में भारी बारिश से नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट में जलभराव, अखिलेश यादव ने सरकार पर कसा तंज बांकीपुर विधायक प्रशांत किशोर का 10 हजार नौकरियों का बड़ा ऐलान, बिहार के सियासी गलियारों में मचा हड़...
देश

नीतीश कुमार का सराहनीय कदम, सरकारी विभागों को महिलाएं करेंगी लीड

नई दिल्ली। महिलाओं के उत्थान के लिए बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने एक सराहनीय निर्णय लिया है। इसके तहत अब प्रदेश के सभी सरकारी विभागों को महिलाएं लीड करेंगी। दरअसल बिहार सरकार अपने इस कार्यकाल में सात निश्चय भाग-2 लेकर आ रही है, जिसमें ‘सशक्त महिला, सक्षम महिला’ योजना को धरातल पर लाने की तैयारी है। उनके इस फैसले से राज्य के अलग-अलग कार्यालयों में सभी पदों पर महिलाओं की हिस्सेदारी बढ़ेगी। नीतीश कुमार के इस फैसले को महिला सशक्तीकरण की दिशा में बड़ा कदम बताया जा रहा है, लेकिन इस योजना का राज्य की कितनी प्रतिशत महिलाएं लाभ उठा पाएंगी, यह वक्त बताएगा।

गौरतलब है कि इससे पहले नीतीश कुमार ने नौकरी में महिलाओं को पहले से 35 प्रतिशत आरक्षण दिया हुआ है। इसके बावजूद बिहार सरकार के अधीनस्थ कार्यालयों में अब भी कार्यालय प्रधान के रूप में महिला पदाधिकारियों की संख्या बहुत कम पाई जा रही, जिससे आरक्षण के प्रविधानों का मौलिक उद्देश्य पूरा नहीं हो पा रहा है। इसका एकमात्र कारण प्रदेश में पुरुषों की तुलना में महिलाओं की साक्षरता दर का कम होना है।

भारत की राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय की ताजा रिपोर्ट के मुताबिक बिहार कम साक्षरता दर वाले राज्यों में तीसरे स्थान पर है। 70.9 फीसद समग्र साक्षरता दर के साथ बिहार राष्ट्रीय औसत (77.7 फीसद) से 6.8 फीसद कम है। बिहार में जहां 79.7 फीसद पुरुष साक्षर हैं, वहीं 60 फीसद महिलाएं पढ़ी-लिखी हैं। आंकड़ों के अनुसार देश भर में आज जितने भी कलेक्टर और एसपी हैं उनमें सबसे अधिक 12 से 13 प्रतिशत बिहार से हैं, लेकिन इनमें महिलाओं का प्रतिशत आज भी बेहद कम है। ऐसा इसलिए, क्योंकि बिहार में महिलाओं की शिक्षा के प्रति जागरूकता बहुत कम है। ऐसे में उन्हें इसका खामियाजा भुगतना पड़ता है, जैसे नौकरी में आरक्षण होने के बावजूद वे चाहकर भी इसका लाभ नहीं उठा पाती हैं। दरअसल महिलाओं को लेकर समाज एवं परिवार वालों की दकियानूसी सोच के चलते भी वे शिक्षा पाने के अपने अधिकार से वंचित रह जाती हैं और जीवन भर अपने पिता और उसके बाद पति पर आश्रित रहने को मजबूर रहती हैं।

यह सर्वविदित है कि एक पढ़ी-लिखी महिला अपने परिवार को सभ्य और प्रगतिशील तो बनाती ही है, इसके साथ ही समाज और देश के विकास में अप्रत्यक्ष एवं परोक्ष रूप से कई भूमिकाएं भी निभाती है। इसलिए सरकार के साथ-साथ परिवार और समाज को भी अपनी बेटियों को आगे बढ़ने में मदद करनी होगी। उम्मीद की जानी चाहिए कि बिहार सरकार ने जो सकारात्मक कदम उठाकर महिलाओं को आगे बढ़ने का मौका दिया है, उससे आने वाली पीढ़ियों का भविष्य सुनहरा होगा।

Related Articles

Back to top button