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अनहोनी की आशंका के बीच यंगून में अब तक का सबसे बड़ा प्रदर्शन, पुलिस से बचने को सड़क के बीच खड़े किए वाहन

यंगून। म्यांमार में हुए तख्तापलट के खिलाफ विरोध-प्रदर्शनों का दौर जारी है। संयुक्त राष्ट्र के मानवाधिकार विशेषज्ञ द्वारा दी गई चेतावनी के बावजूद यंगून में बड़ी संख्या में प्रदर्शनकारी सड़कों पर उतरे। इसे अब तक का सबसे बड़ा प्रदर्शन बताया जा रहा है। इस दौरान लोगों ने सेना के उन आरोपों का खंडन किया, जिसमें कहा गया था कि उसे जनता का समर्थन हासिल है।

बता दें कि संयुक्त राष्ट्र से जुड़े टॉम एंड्रयूज मंगलवार देर रात कहा था कि वह म्यांमार के सबसे बड़े शहर यंगून में सैनिकों की बढ़ती संख्या को देखकर परेशान हैं और उन्हें कुछ अनहोनी होने की आशंका है। इससे पूर्व जेनेवा स्थित संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार कार्यालय ने एक बयान में कहा था कि सेना द्वारा विरोध दबाने के लिए बंदूक का सहारा लिया जा सकता है।

सिर्फ यंगून ही नहीं देश के दूसरे सबसे बड़े शहर मांडले और राजधानी नेपिता में भी लोगों ने सड़कों पर उतरकर विरोध प्रदर्शन किया। दरअसल, सेना ने पांच या उससे अधिक लोगों के एक साथ एकत्र होने पर प्रतिबंध लगा दिया है, लेकिन इसके बावजूद लोग विरोध-प्रदर्शन में शामिल हो रहे हैं। अपदस्थ नेता आंग सान सू की नेशनल लीग फॉर डेमोक्रेसी पार्टी के प्रवक्ता केई टो ने लोगों से प्रदर्शन में शामिल होने का आग्रह किया। प्रदर्शनकारियों ने पुलिस-प्रशासन से बचने के लिए अपने वाहन सड़क के बीच खड़े कर दिए।

उल्‍लेखनीय है कि म्यांमार की अपदस्थ नेता आंग सान सू की हिरासत बुधवार तक बढ़ा दी गई है। उन पर एक नया आरोप भी लगाया गया है। कानून के जानकारों का कहना है कि नए आरोपों के तहत कोर्ट की अनुमति के बिना भी देश की पूर्व सर्वोच्च नेता को अनिश्चितकाल के लिए हिरासत में रखा जा सकता है। आंग सान सू की के वकील का कहना है कि सर्वोच्च नेता पर प्राकृतिक आपदा प्रबंधन कानून के अनुच्छेद-25 का उल्लंघन करने का नया आरोप लगाया गया है।

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