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कोरोना वायरस से लड़ने के लिए लोग कर रहे सूर्य स्नान

रायपुर।  कोरोना वायरस संक्रमण से लड़ने के लिए प्राकृतिक चिकित्सा पद्धति का भी जोरों से इस्तेमाल किया जा रहा है। प्राकृतिक चिकित्सा में सूर्य स्नान एक महत्वपूर्ण विधि है, जिससे हम रोगों से लड़ सकते हैं। सूर्य चिकित्सा के सिद्धान्त के अनुसार रोगोत्पत्ति का कारण शरीर में रंगों का घटना-बढना है। सूर्य किरण चिकित्सा के अनुसार अलग‍-अलग रंगों के अलग-अलग गुण होते हैं।

लाल रंग उत्तेजना और नीला रंग शक्ति पैदा करता है। इन रंगों का लाभ लेने के लिए रंगीन बोतलों में आठ-नौ घंटे तक पानी रखकर उसका सेवन किया जाता है। मानव शरीर रासायनिक तत्वों का बना है। रंग एक रासायनिक मिश्रण है। जिस अंग में जिस प्रकार के रंग की अधिकता होती है, शरीर का रंग उसी तरह का होता है।

जैसे त्वचा का रंग गेहुंआ, केश का रंग काला और नेत्रों के गोलक का रंग सफेद होता है। शरीर में रंग विशेष के घटने-बढ़ने से रोग के लक्षण प्रकट होते हैं। जैसे खून की कमी होना। शरीर में लाल रंग की कमी का लक्षण है। सूर्य स्वास्थ्य और जीवन शक्ति का भंडार है। मनुष्य सूर्य के जितने अधिक संपर्क में रहेगा। उतना ही अधिक स्वस्थ रहेगा, जो लोग अपने घर को चारों तरफ से खिड़कियों से बंद करके रखते हैं और सूर्य के प्रकाश को घर में घुसने नहीं देते वे लोग सदा रोगी बने रहते हैं।

जहां सूर्य की किरणें पहुंचती हैं, वहां रोग के कीटाणु स्वत: मर जाते हैं और रोगों का जन्म ही नहीं हो पाता। सूर्य अपनी किरणों द्वारा अनेक प्रकार के आवश्यक तत्वों की वर्षा करता है और उन तत्वों को शरीर में ग्रहण करने से असाध्य रोग भी दूर हो जाते हैं।

शरीर को कुछ ही क्षणों में झुलसा देने वाली गर्मियों की प्रचंड धूप से भले ही व्यक्ति स्वस्थ होने की बजाय उल्टे बीमार पड़ जाए, लेकिन प्राचीन ग्रंथ अथर्ववेद में सबेरे धूप स्नान हृदय को स्वस्थ रखने का कारगर तरीका बताया गया है। उसमें कहा गया है कि जो व्यक्ति सूर्योदय के समय सूर्य की लाल रश्मियों का सेवन करता है उसे हृदय रोग कभी नहीं होता।

सूर्य पृथ्वी पर स्थित रोगाणुओं ‘कृमियों’ को नष्ट करके प्रतिदिन रश्मियों का सेवन करने वाले व्यक्ति को दीर्घायु भी प्रदान करता है। सूर्य की रोग नाशक शक्ति के बारे में अथर्ववेद के एक मंत्र में स्पष्ट कहा गया है कि सूर्य औषधि बनाता है, विश्व में प्राण रूप है तथा अपनी रश्मियों द्वारा जीवों का स्वास्थ्य ठीक रखता है, किन्तु ज्यादातर लोग अज्ञानवश अन्धेरे स्थानों में रहते है और सूर्य की शक्ति से लाभ नहीं उठाते।

वेद में कहा गया है कि सूर्योदय के समय सूर्य की लाल किरणों के प्रकाश में खुले शरीर बैठने से हृदय रोगों तथा पीलिया के रोग में लाभ होता है। प्राकृतिक चिकित्सा में आन्तरिक रोगों को ठीक करने के लिए भी नंगे बदन सूर्य स्नान कराया जाता है।

इंडियन मेडिकल एसोसिएशन के सचिव डॉ. अजय सहगल का कहना है कि आजकल जो बच्चे पैदा होते ही पीलिया रोग के शिकार हो जाते हैं, उन्हें सूर्योदय के समय सूर्य किरणों में लिटाया जाता है। इससे अल्ट्रा वायलेट किरणों के संपर्क में आने से उनके शरीर के पिगमेंट सेल्स पर रासायनिक प्रतिक्रिया प्रारंभ हो जाती है और बीमारी में लाभ होता है।

डाक्टर भी नर्सरी में कृत्रिम अल्ट्रावायलेट किरणों की व्यवस्था लैम्प आदि जला कर भी करते हैं। वेदों में सूर्य पूजा का महत्व है। प्राचीन ऋषि-मुनियों ने सूर्य शक्ति प्राप्त करके प्राकृतिक जीवन व्यतीत करने का संदेश मानव जाति को दिया था।

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