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जिस महिला ने आइटीआइ के लिए सरकार को दी पांच एकड़ जमीन, उन्‍हीं का शव पांच दिन तक पड़ा रहा अस्पताल में

रायपुर। समाज सेविका और प्रधानपाठिका गुणवती बघेल के शव को लेकर आंबेडकर अस्पताल में बड़ी लापरवाही सामने आई है। राजधानी से सटे बंगोली गांव में रहने वाली जिस समाजसेविका ने आइटीआइ खोलने के लिए सरकार को पांच एकड़ जमीन और 40 लाख रुपये दान में दिए थे।
जिसके दान से कई छात्र तकनीकी शिक्षा ले रहे हैं, उस समाजसेविका का शव पांच दिनों तक अंबेडकर अस्पताल की मरच्‍यूरी में पड़ा रहा। तर्क दिया जा रहा है कि जिन्होंने महिला को कोरोना संक्रमण के चलते एडमिट करवाया था, वे जब स्वयं संक्रमित हो गए तब शव लेने अस्पताल नहीं पहुंच पाए।
गांव के तहसीलदार भी संक्रमित होने से शव को नहीं ले जा सके। मामले में मानिकपुरी समाज ने नाराजगी जताई है। इसकी सूचना जब मानिकपुरी पनिका समाज के पदाधिकारियों को मिली, तब उन्होंने कागजी कार्रवाई करके शव हासिल किया और अंतिम संस्कार कराया।
मानिकपुरी समाज के अध्यक्ष ओमप्रकाश मानिकपुरी ने बताया कि समाजसेविका गुणवती बघेल को 20 मार्च को अंबेडकर अस्पताल में एक ग्रामीण तुलसी खुंटे ने भर्ती करवाया था। इलाज के दौरान पांच अप्रैल को महिला की मौत हो गई। जो व्यक्ति महिला को अस्पताल लेकर आया था, उसके घर में शादी होने से वह नहीं आ सका।

गांव के तहसीलदार को सूचना दी गई तो वह भी कोरोना पॉजिटिव होने से अस्पताल नहीं पहुंचे और गांव वालों को पत्र दे दिया। गांव वालों ने रायपुर में रहने वाली बहनों से संपर्क किया, लेकिन उन्होंने आने से इन्‍कार कर दिया। आखिरकार शव को अस्पताल से लेने में महंत उमेश मानिकपुरी ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई और टिकरापारा श्मशान घाट में अंतिम संस्कार किया गया।
एक वाहन में चार शव लादकर ले गए श्मशान
अस्पताल में वाहन की कमी होने से चार शव को एक के ऊपर एक रखकर श्मशान घाट तक लाया गया। इसमें समाजसेवी महिला का शव भी था। श्मशान में लकड़ी की कमी के कारण सभी का संस्कार एक साथ किया गया। बताया जाता है कि समाजसेवी महिला ने बिरगांव में ब्लाइंड स्कूल के कमरों का निर्माण भी करवाया था। साथ ही सरकार को आइटीआइ खोलने पांच एकड़ जमीन और 40 लाख रुपये दिए थे। उनकी कोई संतान नहीं थी।

‘हमारी ओर से देरी नहीं की गई है। मृत्यु के बाद प्रशासन को सूचना दे दी गई। जिसके बाद उनके स्वजनों तक जानकारी भेजी जाती है।’

– विनीत जैन, अधीक्षक, अंबेडकर अस्पताल, रायपुर

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