ब्रेकिंग
Maharashtra Rain Havoc: महाराष्ट्र में बारिश बनी काल, लापरवाही के चलते 9 लोगों की दर्दनाक मौत; जानें... How to Get Glass Hair: कोरियन हेयर केयर रूटीन से पाएं स्मूथ, शाइनी और हेल्दी बाल; जानें आसान तरीका Women's T20 World Cup 2026 Final: ऑस्ट्रेलिया बनाम इंग्लैंड के बीच खिताबी जंग, जानें विजेता टीम को म... Bollywood News: अक्षय कुमार की कमाई का नया जरिया, मुंबई में करोड़ों की प्रॉपर्टी बेचकर कमाए भारी मुना... Mental Health Crisis: युद्ध के मैदान से लौटे सैनिकों में PTSD का खतरा, इजराइल में 1 लाख तक पहुंच सकत... Crude Oil Prices: कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट का पेट्रोल-डीजल पर असर, सरकार ने साफ की स्थिति WhatsApp, Telegram & Signal News: यूजरनेम फीचर पर बढ़ी सरकार की सख्ती, फ्रॉड के डर से मांगा जवाब Budh Margi 2026: 25 जुलाई को बुध अपनी ही राशि में होंगे मार्गी, इन 4 राशियों को रहना होगा बेहद सावधा... Benefits of Oats: ओट्स खाने के जबरदस्त फायदे, फाइबर और प्रोटीन से भरपूर नाश्ते के लिए अपनाएं ये तरीक... Etah Road Accident: एटा में भीषण सड़क हादसा, सड़क किनारे खड़ी बस को कंटेनर ने मारी टक्कर; 5 की मौत, ...
देश

भारत में मानसून को अव्यवस्थित कर रहा जलवायु परिवर्तन, इन क्षेत्रों में गंभीर प्रभाव पड़ने की आशंका

नई दिल्ली। जलवायु परिवर्तन भारत में मानसून के दौरान होने वाली बारिश को बुरी तरह से अव्यवस्थित कर रहा है। एक अध्ययन में जानकारी सामने आई है। इसके मुताबिक आने वाले वर्षो में भी भारत में अत्यधिक बारिश होगी, जिसका देश की एक अरब से अधिक की आबादी, अर्थव्यवस्था, खाद्य प्रणाली और कृषि पर गंभीर प्रभाव पड़ने की आशंका है।

यह अध्ययन अर्थ सिस्टम डायनैमिक्स जर्नल में प्रकाशित हुआ है, जिसमें दुनिया भर से 30 से अधिक जलवायु प्रारूपों की तुलना की गई है। अध्ययन की मुख्य लेखक एवं जर्मनी स्थित पॉट्सडैम इंस्टीट्यूट फॉर क्लाइमेट इंपैक्ट रिसर्च (पीआइके) की एंजा काटाजेनबर्जर ने कहा, ‘हमने इस बारे में मजबूत साक्ष्य पाए हैं कि प्रत्येक डिग्री सेल्सियस तापमान बढ़ने से मानसून की बारिश के करीब पांच प्रतिशत बढ़ने की संभावना होगी। हम पाते हैं कि ग्लोबल वाìमग मानसून की बारिश को पहले से सोची गई रफ्तार से कहीं अधिक तेजी से बढ़ा रही है। यह (ग्लोबल वाìमग) 21 वीं सदी में मानसून की गतिशीलता को काफी प्रभावित कर रही है।

अध्ययनकर्ताओं ने इस बात का जिक्र किया कि भारत और इसके पड़ोसी देशों में अनावश्यक रूप से ज्यादा बारिश कृषि के लिए अच्छी चीज नहीं है। अध्ययन की सह लेखक जर्मनी की लुडविंग मैक्सिमिलियन यूनिवर्सिटी की जूलिया पोंग्रात्ज ने कहा, ‘फसलों को शुरुआत में आवश्यक रूप से पानी की जरूरत होती है, लेकिन बहुत ज्यादा बारिश होने से पौधे को नुकसान हो सकता है-इनमें धान की फसल भी शामिल है, जिस पर भरण-पोषण के लिए भारत की बड़ी आबादी निर्भर करती है। यह भारतीय अर्थव्यवस्था और खाद्य प्रणाली को मानसून की पद्धतियों के प्रति अत्यधिक संवेदनशील बनाती है।’

मानव गतिविधियां बारिश की मात्रा बढ़ाने के लिए जिम्मेदार

शोधकर्ताओं के अनुसार मानव गतिविधियां बारिश की मात्रा बढ़ाने के लिए जिम्मेदार हैं। उन्होंने कहा कि इसकी शुरुआत पिछली शताब्दी में चौथे दशक में ही हो गई थी। हालांकि, 1980 के बाद ग्रीन हाउस गैसों के उत्सर्जन ने मानसून को अव्यवस्थित करने में बड़ी भूमिका निभाई।’

Related Articles

Back to top button