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सरकार के अंतिम संस्कार का चेक पीएम-एचएम को भेजें देवजी: मुख्यमंत्री बघेल

रायपुर।  कोरोना संकट के बीच भाजपा के पूर्व विधायक देवजीभाई पटेल ने सरकार के अंतिम संस्कार के लिए मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के पते पर 2500 रुपये का चेक भेजा था। देवजी के पत्र का मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने टि्वटर पर जवाब दिया।

मुख्यमंत्री ने ट्वीट किया- प्रिय देवजी भाई पटेल, आपकी सूचना गलत है। राज्य सरकार ने कोई कानून कोरोना के लिए नहीं बनाया है। दूसरे राज्यों की तरह हम भी आपदा प्रबंधन कानून के तहत केंद्र के आदेशों का पालन कर रहे हैं। आपने पत्र और धनराशि गलत पते पर भेजा है। इसे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी या गृह मंत्री अमित शाह को भेजें।

इससे पहले देवजी ने पत्र भेजकर ट्वीट किया था- अनियंत्रित कोविड-19 से वेंटिलेटर पर पड़ी राज्य सरकार की दुखद मृत्यु हो गई है। अंतिम संस्कार के लिए अपनी ओर से वे 2500 रुपये दे रहे हैं। देवजी ने सीएम बघेल को 12 मई को पत्र भी भेजा था।

इसमें कहा था कि छत्तीसगढ़ का जिम्मेदार नागरिक होने के नाते आपकी सरकार द्वारा बनाए निष्ठुर कानून को समाहित करते हुए छत्तीसगढ़ की कांग्रेस सरकार के अंतिम संस्कार के लिए 2500 रुपये का चेक सौंपने खुद आना चाहता था।

पता चला कि मुख्यमंत्री तो नेता प्रतिपक्ष और मुख्य विपक्षी दल के अध्यक्ष को भी मिलने का समय नहीं देते तो मुझ सामान्य नागरिक से कौन मिलेगा। ऐसे में चेक पत्र व्यवहार के जरिए भेज रहा हूं। दरअसल यह पत्र भाजपा और मुख्यमंत्री कार्यालय के बीच बैठक को लेकर उठे विवाद के बाद आया था।

भाजपा प्रदेश अध्यक्ष विष्णुदेव साय ने आठ मई को मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर नौ मई को बैठक का समय मांगा था। इसमें उनके साथ नेता प्रतिपक्ष धरमलाल कौशिक, सांसद सुनील सोनी, विधायक अजय चंद्राकर और बृजमोहन अग्रवाल को शामिल होने का प्रस्ताव था। मुख्यमंत्री ने इसका स्वागत किया, लेकिन बैठक को वर्चुअल बैठक का प्रस्ताव दे दिया।

देवजी का मानसिक संतुलन बिगड़ गया: मरकाम

प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष मोहन मरकाम ने कहा कि ऐसा लगता है कि हार के बाद बेरोजगारी झेल रहे देवजी पटेल का मानसिक संतुलन बिगड़ गया है। इसकी वजह से वे केंद्र के कानून की विफलता का ठीकरा राज्य सरकार पर फोड़ना चाहते हैं। वे राज्य सरकार से अनुरोध करेंगे कि सरकारी खर्च से देवजी पटेल का इलाज कराने की व्यवस्था की जाए। कोरोना काल में किस कानून से देश चल रहा है, इसका ज्ञान यदि देवजी जैसे वरिष्ठ नेता को नहीं है तो यह बहुत दुखद स्थिति है।

कोरोना में क्या करना है, क्या दवाइयां देनी है और ट्रीटमेंट का क्या प्रोटोकोल है, यह भी केंद्र सरकार ही तय करती है। मैं याद दिलाना चाहूंगा कि आज तो देश में एक ही कोरोना कानून प्रभावी है और वह कानून वही है, जिसका नियंत्रण केंद्र सरकार यानी नरेंद्र मोदी और अमित शाह के पास है। यह इस बात का भी सबूत है कि गैर भाजपा शासित राज्यों में राज्य सरकारों के खिलाफ भाजपा के नेता किस तरह से गैर जिम्मेदाराना बातें कहकर आपदा के समय संवैधानिक व्यवस्था और आपदा राहत और प्रबंधन की व्यवस्था को बिगाड़ने में लगे हुए हैं।

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