स्वजन की जिम्मेदारी निभा रहा नगर निगम, 110 लोगों की अस्थियां करेगा विसर्जित

ग्वालियर। कोरोना की दूसरी लहर में जान गंवाने वालों में से 156 लोगों की अस्थियों को विसर्जन के लिए उनके स्वजन का इंतजार हैं। ग्वालियर के लक्ष्मीगंज मुक्तिधाम में मिट्टी के कलशों में रखी ये अस्थियां 26 मई बुद्ध पूर्णिमा के मौके पर उप्र के कासगंज के समीप सोरों में गंगा नदी में विसर्जित की जाएंगी। नगर निगम फिलहाल 110 लोगों की अस्थियां ही विसर्जित करेगा। इनमें से 46 ऐसे लोगों की अस्थियां हैं, जिनकी अंतिम संस्कार मई माह में हुआ है। निगम के अफसरों को उम्मीद है कि इनके स्वजन अस्थियां लेने आ सकते हैं। इसलिए इनका विसर्जन एक-दो माह बाद किया जाएगा। अस्थियों के विसर्जन के संस्कार में एक दुखद पहलू भी सामने आया है। मुक्तिधाम में बनाई गई हेल्प डेस्क पर एक दर्जन से अधिक स्वजन पंचनामे पर स्पष्ट लिख गए हैं, वे अपनी मर्जी से अस्थियां छोड़कर जा रहे हैं। निगम जहां चाहें वहां इनका विसर्जन कर दे।
कोरोना की दूसरी लहर में अप्रैल के दूखरे पखवाड़े के बाद बड़ी संख्या में लोगों ने जान गंवाई। आलम यह था कि लक्ष्मीगंज मुक्तिधाम में शवों के अंतिम संस्कार के चबूतरे कम पड़ गए। जमीन पर रखकर अंतिम संस्कार करने की नौबत आ गई थी। अंतिम संस्कार करने वाले कई लोग बाहरी जिलों और आसपास के प्रदेश के थे। इसलिए अंतिम संस्कार के बाद ये लोग अस्थि संचय करने के लिए ही नहीं आए। चूंकि कोरोना प्रोटोकाल के तहत होने वाले अंतिम संस्कार के दौरान मुक्तिधाम में बनाई गई हेल्प डेस्क पर एक पंचनामा भी बनाया जा रहा है। पंचनामा बनाते समय पूछा जाता है कि आप अपने स्वजन की अस्थियों का संचय करने कब आएंगे। इस दौरान जिन्हें अस्थि संचय करने आना होता है वह समय बता देते हैं, लेकिन एक सैकड़ा से अधिक लोगों ने अपने स्वजनों की अस्थियां ले जाने से मना कर दिया। इनमें कई लोगों ने लिखकर दिया है कि वह अपनी मर्जी से स्वजनों की अस्थियों को छोड़कर जा रहे हैं। कई लोगों ने अस्थियों का संचय करने की बात कही, लेकिन वे नहीं आए। ऐसे लोगों को निगम के अधिकारियों ने उन्हें फोन किया। उनका जबाव था-आप जहां चाहें वहां विसर्जन कर दें।
अस्थि विसर्जन के लिए सामाजिक संस्थाएं आई सामनेः अस्थि संचय करने के लिए स्वजन के नहीं आने की जानकारी लगने के बाद शहर की कई संस्थाओं ने नगर निगम के सामने अस्थि विसर्जन करने का प्रस्ताव रखा। आरएसएस के अनुषांगिक संगठन सेवा भारती ने मई माह के पहले सप्ताह में 10 लोगों की अस्थियां सोरों में विसर्जित कीं। इसके अलावा हिंदू महासभा और कांग्रेस विधायक सतीश सिकरवार ने भी अस्थि विजर्सन करने की इच्छा जताई, लेकिन फिलहाल नगर निगम ने स्वयं अस्थि विसर्जन का फैसला लिया है।
विसर्जन की तैयारियां पूरीः बुधवार को बुद्ध पूर्णिमा के अवसर पर कासगंज स्थित सोरों में गंगा नदी में अस्थियों का विसर्जन किया जाएगा। इसके लिए 110 अस्थि कलशों को 12-12 का सेट बनाकर डिब्बाें में पैक कर दिया गया है। इसके साथ ही एक बड़ी गाड़ी भी निगमायुक्त ने इस कार्य के लिए बुक की है, जिसमें रखकर इन्हें ले जाया जाएगा। यह कार्य उपायुक्त अतिबल सिंह यादव की देखरेख में किया जाएगा।
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जो लोग अपने स्वजन की अस्थियां किसी कारणवश छोड़ गए हैं, उनका अंतिम संस्कार कराना निगम का दायित्व है। बुद्ध पूर्णिमा को हम अस्थियों का विसर्जन करेंगे। इसके बाद बची हुई अस्थियों का विसर्जन फिर किसी अच्छी तिथि को विधिविधान से किया जाएगा। इस कार्य में सामाजिक संस्थाएं भी आना चाहती हैं तो उनका भी स्वागत है।
शिवम वर्मा, निगमायुक्त
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जिन लोगों ने अस्थि संचय करने की बात कही और वे लेने नहीं आए, हमने ऐसे लोगों को फोन लगाया, लेकिन कुछ लोगों जबाव अया, आप जहां चाहो वहां पर बहा देना।