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राज्य के अनुसूचित क्षेत्रों में बनाए गए 34 नगर पंचायत असंवैधानिक, राज्यपाल ने लिखा सीएम बघेल को पत्र

रायपुर। छत्तीसगढ़ में अनुसूचित क्षेत्रों में बनाए गए 34 नगर पंचायत असंवैधानिक हैं। 14 से 15 वर्ष पहले गठित इन नगर पंचायतों को कानूनी मान्यता नहीं मिली है। राज्यपाल अनुसुईया उइके ने मुख्यमंत्री भूपेश बघेल को पत्र लिखकर इस पर ध्यान दिलाया है। साथ ही उन्होंने पंचायत (अनुसूचित क्षेत्रों में विस्तार) अधिनियम 1996 (पेसा एक्ट) के तहत इन नगर पंचायतों को संवैधानिक दर्जा दिए जाने के उपाय भी सुझाए हैं।

इस वजह से वैध नहीं है नगर पंचायतें

राज्यपाल ने पत्र में कहा है कि सरकार ने 2003 से 2009 तक अनुसूचित क्षेत्र के ग्राम पंचायतों को, जनगणना, 2001 की जनसंख्या को आधार मानकर नगर पालिका अधिनियम 1961 के तहत कार्यवाही करते हुए ग्राम पंचायतों को विघटित कर वर्ष 2003 में 16 नगर पंचायत तथा 2007 से 2009 तक 18 नगर पंचायत के रूप में पुनर्गठित किया गया था। राज्यपाल ने बताया है कि जिन प्रविधानों के तहत इन नगर पंचायतों का गठन किया गया है वे जनजाति क्षेत्रों में लागू ही नहीं होती है।

ऐसे विधिसम्मत हो सकते हैं अनुसूचित क्षेत्रों के नगर पंचायत

राज्यपाल ने पत्र में बताया है कि संविधान के अनुच्छेद 243 यग (3) के तहत संसद द्वारा अनुसूचित क्षेत्र के नगर पालिकाओं के लिए कानून पारित करने (मेसा एक्ट) के बाद विधि संगत हो सकता है या पांचवीं अनुसूची अनुच्छेद 244 (1) भाग-ख 5 (1) के तहत राज्यपाल को प्रदत्त विशेष शक्तियों का उपयोग करते हुए अनुमोदन लेने के बाद विधिसम्मत हो सकता है।

मरवाही नगर पंचायत का भी उल्लेख

राज्यपाल ने मौजूदा सरकार के कार्यकाल में गठित मरवाही नगर पंचायत का भी विशेष रूप से उल्लेख किया है। उन्होंने लिखा है कि अनुसूचित क्षेत्र के गौरेला-पेंड्रा-मरवाही जिले में तीन पंचायतों को विघटित कर मरवाही नगर पंचायत बनाए जाने की प्रक्रिया करने दावा-आपत्ति प्रस्तुत करने अधिसूचना दिनांक 18 अगस्त 2020 को जारी किया गया है। यह भी उचित प्रक्रिया नहीं है।

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