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College Street Makeover: अग्निमित्रा पॉल के प्रस्ताव का विरोध, हॉकरों की आजीविका और सौंदर्यीकरण के बीच छिड़ी बहस

कोलकाता की विश्व प्रसिद्ध ‘कॉलेज स्ट्रीट’ (बौई पाड़ा) इन दिनों एक नए राजनीतिक और सामाजिक विवाद के केंद्र में है। बीजेपी नेता अग्निमित्रा पॉल द्वारा इस ऐतिहासिक बुक हब को लंदन की ऑक्सफोर्ड स्ट्रीट की तर्ज पर विकसित करने का प्रस्ताव पेश किए जाने के बाद से ही शहर में दो फाड़ हो गए हैं। जहां सरकार की ओर से इसे एक आधुनिक ‘वर्ल्ड-क्लास बुक डिस्ट्रिक्ट’ बनाने की कोशिश बताया जा रहा है, वहीं स्थानीय हॉकरों और छोटे वेंडरों में अपनी रोजी-रोटी छिनने का डर सता रहा है।

🏗️ क्या है बीजेपी का ‘रीडेवलपमेंट प्लान’?

अग्निमित्रा पॉल के विजन के अनुसार, कॉलेज स्ट्रीट को नो-व्हीकल जोन बनाना, प्रदूषण मुक्त करना, थीम-बेस्ड स्टॉल लगाना और साइकिलिंग को बढ़ावा देना मुख्य लक्ष्य है। बीजेपी नेताओं का तर्क है कि आधुनिकीकरण से यह इलाका साफ-सुथरा, सुरक्षित और पर्यटकों के लिए अधिक आकर्षक बनेगा। हालांकि, आलोचकों का मानना है कि इस चमक-धमक वाली योजना में कॉलेज स्ट्रीट की पुरानी सांस्कृतिक पहचान कहीं खो न जाए।

🗣️ टीएमसी और हॉकरों का विरोध

टीएमसी विधायक कुणाल घोष ने इस प्रस्ताव को ‘राजनीतिक ड्रामा’ करार देते हुए कहा है कि यह आम लोगों की आजीविका की कीमत पर की जा रही राजनीति है। दूसरी तरफ, कॉलेज स्ट्रीट के हॉकरों का स्पष्ट कहना है कि लंदन की तर्ज पर बदलाव से पहले उन्हें जलजमाव और कचरा प्रबंधन जैसी बुनियादी समस्याओं से मुक्ति चाहिए। हॉकरों के संगठन का तर्क है कि वे दशकों से इस मार्केट की जान रहे हैं, और किसी भी तरह का विस्थापन उन्हें भुखमरी की ओर धकेल देगा।

⚖️ विकास बनाम अस्तित्व की लड़ाई

यह विवाद अब पूरी तरह राजनीतिक रंग ले चुका है। बीजेपी जहां इसे एक आधुनिक शहरी अपग्रेड के रूप में पेश कर रही है, वहीं टीएमसी का कहना है कि यह व्यापारियों की चिंताओं को नजरअंदाज करने वाला एक हवाई प्लान है। हालांकि, कुछ स्थानीय निवासी इस पहल का स्वागत भी कर रहे हैं, उनका मानना है कि बेहतर व्यवस्था से कॉलेज स्ट्रीट की रौनक और बढ़ेगी। देखना यह है कि क्या यह योजना महज एक घोषणा बनकर रह जाएगी या वास्तव में विश्व की सबसे बड़ी पुरानी किताबों की मंडी का स्वरूप बदलेगा।

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