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विदेश

तालिबान को अफगानिस्‍तान में एक अवसर के रूप में देखता है पाकिस्‍तान- अमेरिकी रिपोर्ट का खुलासा

वाशिंगटन। अफगानिस्‍तान को लेकर सामने आई एक रिपोर्ट में कहा गया है कि तालिबान की बढ़त के चलते पाकिस्‍तान के संबंध अफगानिस्‍तान और अमेरिका से खराब हो सकते हैं। आपको बता दें कि अमेरिका ने जब से अफगानिस्‍तान से अपनी फौज को वापस ले जाने की शुरुआत और घोषणा की है तभी से तालिबान यहां पर लगातार पांव पसारने में लगा हुआ है। मई से लेकर अब तक कई जिले उसकी पकड़ में आ चुके हैं। संयुक्‍त राष्‍ट्र भी तालिबान की बढ़त को लेकर पूरी दुनिया को आगाह कर चुका है।

इंटरनेशनल क्राइसिस ग्रुप की इस रिपोर्ट में कहा गया है कि अमेरिका की गैर मौजूदगी में अफगानिस्‍तान में फिर से अस्थिरता आ सकती है जिसका फायदा तालिबान उठा सकता है। इसमें ये भी कहा गया है कि ऐसा होने पर जहां पाकिस्‍तान की सुरक्षा को खतरा हो सकता है वहीं पाकिस्‍तान के आतंकी तालिबान से गठबंधन कर सकते हैं। इसमें कहा गया है कि पाकिस्‍तान को तालिबान से अपने संबंधों का फायदा उठाना चाहिए और उनसे हिंसा न करने की अपील करनी चाहिए।

रिपोर्ट के मुताबिक अस्थिर अफगानिस्‍तान पाकिस्तानी आतंकी संगठनों विशेष रूप से पाकिस्तानी तालिबान को अपने साथ आने के लिए प्रोत्साहित कर सकता है। इसकी वजह से अफगानिस्‍तान में बड़े पैमाने पर हिंसा फैल सकती है जिसके चलते बड़ी संख्‍या में अफगान शरणार्थियों की संख्‍या में इजाफा हो सकता है।

रिपोर्ट में कहा गया है कि पाकिस्‍तान तालिबान पर अपने प्रभाव का इस्‍तेमाल करने में नाकाम रहा है। पाकिस्‍तान तालिबान को हिंसा में कमी लाने के लिए मनाने में भी नाकामयाब रहा है। इतना ही नहीं वो तालिबान को शांति स्‍थापित करने के लिए मनाने में भी पूरी तरह से असफल रहा है। हालांकि रिपोर्ट में कहा गया है कि पाकिस्‍तान अफगानिस्‍तान के लिए होने वाली शांति वार्ता का समर्थन करता है क्‍योंकि वो तालिबान को एक अवसर के तौर पर देख रहा है और वो तालिबान को अफगानिस्‍तान की सत्‍ता के करीब या उस पर बिठाना चाहता है।

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