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केरल में जनसंख्या के आधार पर अल्पसंख्यक स्कॉलरशिप का फैसला, IUML ने जताई राज्य में विद्रोह की आशंका

तिरुअनंतपुरम। केरल में अल्पसंख्यकों के स्कॉलरशिप अनुपात में फेरबदल को लेकर खलबली मची है। आयूएमएल के विधायक पीके कुन्हलिकुट्टी (PK Kunhalikutty) ने आज कहा, केरल मंत्रिमंडल ने चौंकाने वाला फैसला लेते हुए सच्चर कमिटी को रद कर दिया। सभी संस्थान इसका विरोध कर रहे हैं। केरल सरकार को इस गलत फैसले के लिए विद्रोह का सामना करना पड़ेगा।’  दरअसल केरल सरकार ने गुरुवार को 2011 की जनगणना के आधार पर अल्पसंख्यक स्कॉलरशिप प्रदान करने के हाई कोर्ट के आदेश को लागू करने का फैसला किया है।

सरकार ने ईसाई, बौद्ध, सिख और जैन समुदायों को लाभान्वित करने के लिए जनसंख्या के आधार स्कॉलरशिप प्रदान करने के लिए 6.2 करोड़ रुपये के अतिरिक्त कोष का आवंटन भी किया है। इससे पहले स्कॉलरशिप का अधिकतर हिस्सा मुस्लिम समुदाय को मिलता था। हाई कोर्ट के आदेश को लागू किए जाने के बाद अन्य अल्पसंख्यक समुदायों को भी उनकी जनसंख्या के आधार पर अतिरिक्त लाभ मिलेगा।

उल्लेखनीय है कि जस्टिस राजिंदर सच्चर कमिटी के तहत राज्य सरकार ने 5000 मुस्लिम छात्राओं को छात्रवृत्तियां दी थी। इसके बाद 2011 में स्कीम में लैटिन कैथोलिक ईसाई और धर्मांतरित ईसाई छात्र भी शामिल किए गए। इस फैसले को 2015 में सरकार ने बदल दिया और कहा गया कि मुसलमानों और अन्य अल्पसंख्यक समुदायों के बीच आरक्षण 80:20 के अनुपात में होगा। इसके तहत मुसलमानों के लिए 80 फीसद, लैटिन कैथोलिक ईसाई और अन्य समुदायों के लिए सिर्फ 20 फीसद और इसी फैसले को हाईकोर्ट में चुनौती दी गई थी।

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