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लोकतंत्र पर जासूसी की छाया, सच सामने लाने के लिए CM बघेल ने की पहल

रायपुर। पेगासस फोन जासूसी विवाद सियासी संग्राम में बदल गया है। इसकी आंच छत्तीसगढ़ तक पहुंच गई है। प्रदेश कांग्रेस ने आरोप लगाया कि पूर्ववर्ती भाजपा सरकार वर्ष 2017 में इस साफ्टवेयर को खरीदना चाहती थी। इसके लिए पुलिस मुख्यालय में कंपनी के प्रतिनिधियों ने साफ्टवेयर का प्रदर्शन भी किया था। कंपनी ने दावा किया था कि इस साफ्टवेयर से वाट्सएप पर होने वाली बातचीत की भी प्रतिलिपि तैयार की जा सकती है। साफ्टवेयर की कीमत 60 करोड़ रुपये होने के कारण वरिष्ठ अधिकारियों ने करार करने से इंकार कर दिया था।

इस पर जवाबी हमला करते हुए भाजपा ने कहा है कि कांग्रेस तो इंदिरा गांधी के जमाने से जासूसी करती आ रही है। इस बीच मुख्यमंत्री ने गृह विभाग के अपर मुख्य सचिव की अध्यक्षता में चार अधिकारियों की जांच कमेटी गठित कर दी है, जो तत्कालीन मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह के लिए मुश्किलें खड़ी कर सकती हैं। कमेटी में डीजीपी, आईजी इंटेलिजेंस और जनसंपर्क आयुक्त शामिल हैं। विधानसभा सत्र शुरू होने से पहले सरकार के इस फैसले से प्रदेश में नया राजनीतिक विवाद शुरू होना तय माना जा रहा है।

प्रदेश में सत्तारूढ़ कांग्रेस के नेता पूर्व मुख्यमंत्री और भाजपा के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष डॉ. रमन सिंह पर जासूसी कराने का आरोप लगा रहे हैं। इसके साथ ही मामले में वह नौकरशाह भी घिरेंगे, जिन पर हाल के दिनों में कांग्रेस ने सरकार को अस्थिर करने की साजिश रहने का आरोप लगाया है। आरोपों में निहित सच्चाई समय के साथ सामने आएगी। राष्ट्रीय स्तर पर देखा जाए तो संसद के मानसून सत्र से पहले एक वेब पोर्टल पर 18 जुलाई की रात पेगासस से संबंधित संवेदनशील स्टोरी प्रकाशित कर देश में चर्चा की दिशा ही बदलने की कोशिश की गई है।

उक्त रिपोर्ट में राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर के कई बड़े आरोप लगाए गए हैं। रिपोर्ट में नेताओं, जजों, पत्रकारों से लेकर अलग-अलग क्षेत्रों के 300 से अधिक लोगों के फोन की जासूसी करने का दावा है। जवाब में केंद्र सरकार का दावा है कि देश विरोधी ताकतें साजिश के तहत भारतीय लोकतंत्र पर आघात पहुंचाने का काम कर रही हैं और विपक्ष तथ्यों को समझे बिना ही ऐसे तत्वों के हाथ की कठपुतली बना हुआ है।

दिल्ली से लेकर रायपुर तक एक ही मुद्दा चर्चा के केंद्र में आ गया है। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने जांच कमेटी गठित कर वास्तविकता की पड़ताल का मार्ग प्रशस्त कर दिया है। उम्मीद की जानी चाहिए कि समय के साथ सच्चाई सामने आएगी और जांच के आधार पर आवश्यक कार्रवाई की जाएगी तथा इस मुद्दे की वजह से विधानसभा की कार्यवाही नहीं प्रभावित होगी।

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