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मां-बाप के बाद दादी थीं सहारा, उन्हें भी कोरोना ने छीना, अब भटक रहे बच्चे

रायपुर: कोरोना काल में जिन बच्चों के मां-बाप या दोनों में से कोई एक की मौत हो चुकी है, उनके लिए सरकार महतारी दुलारी योजना चला रही है। इस योजना के तहत बच्चों की पूरी पढ़ाई की जिम्मेदारी सरकार लेगी। मगर, अभी एक ऐसा मामला सामने आया है, जिसमें सरकार की योजना बच्चों की मदद करने में असफल साबित हो रही है। नयापारा, राजिम रायपुर में दो बच्चे ऐसे हैं जिनके मां-बाप पहले ही गुजर गए थे।

उनको दादी पाल रहीं थीं, लेकिन कोरोना से दादी की भी मौत हो गई है। अब बच्चों के परिवार में कोई नहीं बचा है। बच्चों के फूफा ने मुख्यमंत्री, स्कूल शिक्षा मंत्री, कलेक्टर रायपुर और जिला शिक्षा अधिकारी को पत्र लिखकर बच्चों को महतारी दुलारी योजना का लाभ दिलाने की मांग की है।

छह हजार बच्चे हो चुके हैं निराश्रित

विभिन्न विभागों से मिली जानकारी के मुताबिक, प्रदेश में छह हजार बच्चे अनाथ या निराश्रित हो चुके हैं। इसके तहत प्रदेशभर के 171 स्वामी आत्मानंद अंग्रेजी माध्यम स्कूलों में 337 बच्चों का दाखिला हो गया है। रायपुर में 54 बच्चे इस योजना के तहत अंग्रेजी स्कूल में दाखिल हुए हैं। बाकी अन्य बच्चे जिस स्कूल में पढ़ रहे हैं वहीं पढ़ेंगे और उनकी फीस राज्य सरकार देगी। रायपुर में 709 ऐसे बच्चों की जानकारी राज्य सरकार को भेजा गया है जो कि निजी स्कूलों में पढ़ रहे हैं।

केस 01 : सरकार फीस देगी या नहीं असमंजस में बच्चे

राजधानी के रायपुरा स्थित एक निजी स्कूल में पढ़ने वाले एक बच्चे की पढ़ाई को लेकर चिंता सामने आई है। बच्चे के पिता की मौत हो चुकी और महतारी दुलारी योजना के तहत लाभ के लिए उनकी मां ने आवेदन किया है। घर की माली हालत खराब है। कमाने वाला कोई नहीं है और अभी तक यह तय नहीं हो पाया है कि सरकार उनके बच्चों की फीस देगी या नहीं ।

केस 02 : फीस तो देना ही पड़ेगा

टांटीबंध में एक निजी विद्यालय के प्रबंधक ने कोरोना से निराश्रित हुई बच्ची की मां से कहा कि फीस तो देनी पड़ेगी। मां कहती हैं कि घर में कोई कमाने वाला नहीं हैं। भाई की मदद से घर तो चल रहा है, पर सरकार की मदद के बिना बच्ची को पढ़ाना मुश्किल हो जाएगा।

केस 03 : बालगृह में मिला 32 बच्चों को आसरा

रायपुर के माना में 50 बेड का बालगृह चल रहा हैं। यहां कोरोना से अनाथ हुए 32 बच्चों को आसरा दिया गया है। महिला एवं बाल विकास विभाग के अधिकारी अशोक कुमार पाण्डेय ने बताया कि अभी और सीटें खाली हैं, बच्चों के रहने-खाने, पीने, पढ़ने, सोने और उनके स्वास्थ्य की पूरी देखभाल कर रहे हैं।

वर्जन

मां-बाप के अलावा उनके संरक्षक के मौत पर भी इस योजना का लाभ दिलाने के लिए प्रक्रिया की जाएगी। मामले को दिखवाता हूं।

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