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जगरगुड़ा सड़क पर 14 पुल स्वीकृत

सुकमा। पिछले 10 साल से जगरगुड़ा सड़क निर्माण का कार्य चल रहा है। लेकिन आज पर्यंत तक पूरा नहीं हुआ है। पिछले पांच साल में महज 25 किमी ही सड़क बन पाई है। जबकि इस सड़क की खासबात यह है कि एक भी पुल स्वीकृत नहीं किया गया लेकिन शासन ने अब 14 पुल स्वीकृत किए जिसकी निविदा आमंत्रित की जा रही है। लेकिन इन पुल को लोहे के पुल में बदलने का प्रस्ताव सुकमा पुलिस ने भेजा है। क्योंकि नक्सल इलाके में पुल का निर्माण करना है, ऐसे में कम समय व कम लागत में लोहे के पुल का निर्माण होगा जिससे सुरक्षा बल के जवानों को सुरक्षा देने में सुविधा होगीs।

दोरनापाल से जगरगुड़ा की दूरी 58 किमी.है। जिसका निर्माण 2010 से शुरू हुआ था। लेकिन इस सड़क की स्वीकृति हुई लेकिन एक भी पुल सेक्शन नहीं किया गया। लेकिन अब इस सड़क पर 14 पुल स्वीकृत हुए है। जिसकी निविदा आमंत्रित की गई है। लेकिन ये पुल स्लैब वाले है ऐसे में पुलिस विभाग ने इन पुलों को लोहे में बदलने का प्रस्ताव भेजा है। सूत्रों की माने तो बुर्कापाल तक सड़क का निर्माण हुआ है उसके आगे पूरा इलाका नक्सल प्रभावित है। हालांकि कैंप स्थापित किए गए है और सड़क निर्माण के लिए सुरक्षा दिया जा रहा है।

लोहे के बना सकते हैं पुल

बावजूद इन स्लैब वाले पुलों के बदले लोहे के पुल बना सकते है। क्योंकि लोहे के पुल निर्माण में बहुत ही कम समय लगता है। इसके साथ ही लागत भी कम होती है। क्योंकि लोहे के पुल को सिर्फ इंस्टाल ही करना पड़ता है। लिहाजा सुरक्षा के दृष्टिकोण से भी लोहे के पुल निर्माण में आसानी होगी। लेकिन इसका फैसला उच्च अधिकारी लेंगे।

सीमावर्ती जिले मे बन रहे पुल

सीमातर्वी जिला दंतेवाड़ा जहां नक्सल प्रभावित इलाकों में लोहे के पुल निर्माण कराए जा रहे है। बताया जाता है कि ये पुल सिर्फ 10 दिनों में बनकर तैयार हो जाते है। साथ ही लागत तो कम रहती है और मजबूती ज्यादा रहती है। क्रांक्रिट ब्रिज निर्माण में समय लगता है और इस बीच नक्सली बाधा उत्पन्नाा कर सकते है। लेकिन इन पुलों के निर्माण में पहले अलग-अलग हिस्सों को तैयार कर लिया जाता है और फिर सभी हिस्सों को जोड़कर पुल तैयार कर लिया जाता है। दंतेवाड़ा जिले में 45 लाख के पुल जो कि 70 टन क्षमता वाले निर्माण कराए जा रहे है। जगरगुड़ा सड़क निर्माण कार्य चल रहा है वहां कुछ पुल स्वीकृत हुए है।

कम समय में पुल का निर्माण

चर्चा की गई है कि स्वीकृत उन पुलों को लोहे में बदला जाएं, क्योंकि नक्सल प्रभावित इलाक है और कम समय में पुल का निर्माण व सड़क का निर्माण पूरा करना है। हमारा प्रयास है कि आने वाले कुछ महिनों में जगरगुड़ा तक सड़क का काम पूरा हो सके।

सुनील शर्मा, एसपी सुकमा

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