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बारिश में भींगते हुए छत्तीसगढ़ी बोली को राजभाषा का दर्जा दिलाने की मांग

रायपुर: छत्तीसगढ़ी को राज्यभाषा की दर्जा देने की मांग को लेकर छत्तीसगढ़ी समाज ने बुधवार को प्रदर्शन किया। बूढ़ापारा धरना स्थल में सैकड़ों लोग बारिश में भींगते हुए छत्तीसगढ़ी बोली को अठवीं अनुसूची में शामिल करने जमकर हुंकार भरी। छत्तीसगढ़ी समाज के पदाधिकारियों का कहना है कि छत्तीसगढ़ के लगभग तीन करोड़ वासियों की मातृभाषा है। इस भाषा को राजभाषा का दर्ज देना सरकार का प्रथम कर्तव्य है। आज की तारीख में जिस भाषा को सिर्फ 15 लाख लोग बोलते हैं, उसको भी शामिल कर लिया गया है। फिर भी छत्तीसगढ़ी की अपेक्षा क्यों हो रही है?

भाषा शास्त्र के अनुसार छत्तीसगढ़ी 1000 वर्ष पुरानी

छत्तीसगढ़ी समाज के अध्यक्ष एमएल टिकरिहा ने कहा कि भाषा शास्त्र के अनुसार, छत्तीसगढ़ी 1000 वर्ष से पुरानी, मधुर और परिपक्व भाषा है। उन्होंने कहा, भाषा विज्ञान के अनुसार किसी भी भाषा का छह बुनियादी लक्षण रहता है। क्रिया पद, कारक रचना, सर्वनाम, शब्द भंडार, उच्चारण शैली और लिखित या मौखिक साहित्य। छत्तीसगढ़ी में ये सब विशेषताएं पहले से ही विद्यमान हैं। हमारी मांग है कि प्राथमिक स्कूल से लेकर कॉलेज तक का पढ़ाई-लिखाई छत्तीसगढ़ी भाषा में भी कराई जाए।

बताते चलें कि तत्कालीन छत्तीसगढ़ सरकार ने साल 2010 में छत्तीसगढ़ी राज्यभाषा आयोग का गठन किया था। साल 2013 के चुनावी घोषणापत्र में भी संविधान की आठवीं अनुसूची में छत्तीसगढ़ी भाषा को शामिल कराने की बात कही थी। मगर, अभी तक ऐसा नहीं हो पाया है।

ये है प्रमुख मांग

– छत्तीसगढ़ी भाषा में विधानसभा की कार्यवाही हो।

– विधानसभा में सभी विधायक एवं मंत्री छत्तीसगढ़ी में ही सवाल-जवाब करें।

– सरकारी कामकाज छत्तीसगढ़ी भाषा में किया जाए।

– स्कूल पाठ्यक्रम में छत्तीसगढ़ी भाषा अनिवार्य हो।

– संविधान की आठवीं सूची में शामिल करवाया जाए।

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