ब्रेकिंग
Haryana Education News Punjabi Language: हरियाणा में पंजाबी को शिक्षा प्रणाली में उचित स्थान देने की... Sri Ram Janmabhoomi Trust Donation Case: अनुकल्प मिश्रा समेत 8 के खिलाफ चार्जशीट दाखिल, मंदिर में चढ... Regional Parties in UP Election: यूपी की सियासत में छोटे दलों और बिहार की पार्टियों की एंट्री, बिना ... Ujjain Crime & Civic News: सिंहस्थ 2028 की तैयारी: सीएम मोहन यादव का 1974 में बना पुश्तैनी घर भी होग... MP School Education News: मध्य प्रदेश में अनुकंपा नियुक्ति के 600 आदेश जारी; सीएम मोहन यादव की पहल प... Jabalpur Crime & Civic News: गणेश पंडाल में बिजली कंपनी और आयोजकों की बड़ी लापरवाही; महाआरती के दौरा... MP News: इंदौर में 'छात्रों की गूंज' के बाद राहुल गांधी का बड़ा कदम; सीएम मोहन यादव से ओबीसी अभ्यर्थ... Hisar ACB News Haryana: फिटनेस सेंटर की अनुमति देने की एवज में ले रहा था रिश्वत, एसीबी ने बिछाया जाल MP Politics News Jitu Patwari: 'बाघों के कॉरिडोर में माइनिंग क्यों?'; कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष का सरक... Akhilesh Yadav PDA Campaign UP Election 2027: जो पीड़ित, वही पीडीए... कांग्रेस के गढ़ से सपा ने फूंक...
देश

शिक्षा के हित में चंदूलाल चंद्राकर स्मृति महाविद्यालय अधिग्रहण

रायपुर। चंदूलाल चंद्राकर स्मृति महाविद्यालय के अधिग्रहण का मामला इन दिनों चर्चा का खास विषय बना हुआ है। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने इस साल फरवरी में कालेज के अधिग्रहण की घोषणा की थी। पिछले दिनों अधिग्रहण के लिए विधेयक पेश किया गया। अधिग्रहण के बाद प्रदेश में शासकीय मेडिकल कालेजों की संख्या छह से बढ़कर सात और एमबीबीएस सीटों की संख्या 1,300 से ज्यादा हो गई है। विपक्ष ने मुख्यमंत्री पर अपने रिश्तेदार को लाभ पहुंचाने के आरोप लगाए हैं, जबकि सरकार ने अधिग्रहण के निर्णय का आधार सार्वजनिक हित और शिक्षा हित बताया है। तटस्थ होकर देखें तो यह निर्णय कल्याणकारी प्रतीत होता है। सरकार का यह कदम स्वागत योग्य है। हालांकि ऐसे दूसरे शिक्षण संस्थानों के बारे में भी विचार किया जाना चाहिए।
पिछले चार साल से चंद्राकर स्मृति महाविद्यालय की जीरो ईयर की स्थिति बनी हुई है। हालांकि इस महाविद्यालय के अधिग्रहण से राज्य शासन पर प्रति वर्ष लगभग 140 करोड़ रुपये का वित्तीय भार आएगा, लेकिन दूसरी तरफ यह भी देखा जाए कि कोई नया चिकित्सा महाविद्यालय खोला जाएगा तो उसकी अधोसंरचना तैयार करने में करीब 500 करोड़ रुपये खर्च हो जाएंगे। मेडिकल काउंसिल आफ इंडिया द्वारा मान्यता प्राप्त 150 सीट वाले चिकित्सा महाविद्यालय का तत्काल लाभ मिल सकेगा। विधेयक में कई ऐसे प्रविधान किए गए हैं, जो पारदर्शिता और गुणवत्ता सुनिश्चित करेंगे। जैसे राशि की गणना के लिए विशेष अधिकारी की नियुक्ति। विशेष अधिकारी चल और अचल संपत्ति का मूल्यांकन करेगा।
चिकित्सा महाविद्यालय की समस्त संपत्तियां सभी अधिभार से मुक्त होकर सरकार में निहित होंगी और देयता के लिए सरकार द्वारा कोई भुगतान नहीं होगा। साथ ही चिकित्सा महाविद्यालय के अधिग्रहण के बाद महाविद्यालय के कर्मचारी सरकार की सेवा में रहने का दावा नहीं कर सकेंगे। ऐसे कम ही निर्णय होते हैं, जिनमें सरकार की नीयत पर आरोप नहीं लगते हैं। विपक्ष अगर सरकार के निर्णय पर सवाल खड़े कर रहा है तो लोकतंत्र की मर्यादा इसी में है कि विपक्ष की आशंकाओं का दूर किया जाए। सरकार आश्वस्त करे कि इसमें उसकी नीयत साफ है और यह कदम राज्य के हित में है।
सरकार अगर इस चिकित्सा महाविद्यालय के साथ उन तमाम निजी प्रतिष्ठानों, संस्थानों, उद्योंगों, विद्यालयों, कालेजों आदि का भी अधिग्रहण कर लेती, जो वित्त की कमी से जूझ रहे हैं तो प्रश्न करने वालों और आरोप लगाने वालों को अवसर ही नहीं मिलता। जब बात प्रदेशवासियों के हित की है तो अन्य कर्मचारियों, अधिकारियों, शिक्षकों, विद्यार्थियों आदि के हितों को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। उन्हें भी समान और समय पर सहायता मिलनी चाहिए। साथ ही सरकार को निजी और शासकीय संस्थानों के बीच संतुलन बनाए रखना चाहिए।सरकार के किसी भी कदम का जनमानस के बीच संदेश सार्थक जाना चाहिए। इससे जनहित के काम आसान हो जाते हैं।

Related Articles

Back to top button