ब्रेकिंग
International Yoga Day 2026 Kolkata: हुगली नदी में 500+ बोट्स पर एक साथ योग; पीएम मोदी करेंगे कोलकात... Abhishek Banerjee vs NCPI: टीएमसी सांसदों के विलय को अभिषेक बनर्जी ने दी लोकसभा स्पीकर के सामने चुनौ... Shiv Sena Foundation Day: शिवसेना की 60वीं वर्षगांठ; दो गुटों में बंटी पार्टी, उद्धव और शिंदे का अलग... Chronic Kidney Disease and Diabetes: डायबिटीज और हाई बीपी कैसे बढ़ाते हैं किडनी फेलियर का खतरा? जानें... Rahul Gandhi Politics Analysis: राहुल गांधी का मिशन 2029; मोदी के करिश्मे और गठबंधन की राजनीति के बी... Uttarakhand Corruption News: भ्रष्टाचार के खिलाफ CM धामी की बड़ी कार्रवाई; हरिद्वार के पूर्व अधिकारिय... Deoria Medical Negligence: मेडिकल कॉलेज की बड़ी लापरवाही; टूटे दाहिने हाथ की जगह बाएं हाथ में चढ़ाया प... Varanasi Elevated Corridor: वाराणसी में 25 हजार करोड़ से बनेगा वरुणा और गंगा एलिवेटेड रोड; जाम से मि... Andhra Pradesh Crime News: पारिवारिक विवाद में पिता का खौफनाक कदम; तीन बेटियों की हत्या के बाद खुद द... Telangana Hospital Negligence: महिला की अस्थियों में मिली कैंची; सरकारी अस्पताल की लापरवाही से मां-ब...
देश

शिक्षा के हित में चंदूलाल चंद्राकर स्मृति महाविद्यालय अधिग्रहण

रायपुर। चंदूलाल चंद्राकर स्मृति महाविद्यालय के अधिग्रहण का मामला इन दिनों चर्चा का खास विषय बना हुआ है। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने इस साल फरवरी में कालेज के अधिग्रहण की घोषणा की थी। पिछले दिनों अधिग्रहण के लिए विधेयक पेश किया गया। अधिग्रहण के बाद प्रदेश में शासकीय मेडिकल कालेजों की संख्या छह से बढ़कर सात और एमबीबीएस सीटों की संख्या 1,300 से ज्यादा हो गई है। विपक्ष ने मुख्यमंत्री पर अपने रिश्तेदार को लाभ पहुंचाने के आरोप लगाए हैं, जबकि सरकार ने अधिग्रहण के निर्णय का आधार सार्वजनिक हित और शिक्षा हित बताया है। तटस्थ होकर देखें तो यह निर्णय कल्याणकारी प्रतीत होता है। सरकार का यह कदम स्वागत योग्य है। हालांकि ऐसे दूसरे शिक्षण संस्थानों के बारे में भी विचार किया जाना चाहिए।
पिछले चार साल से चंद्राकर स्मृति महाविद्यालय की जीरो ईयर की स्थिति बनी हुई है। हालांकि इस महाविद्यालय के अधिग्रहण से राज्य शासन पर प्रति वर्ष लगभग 140 करोड़ रुपये का वित्तीय भार आएगा, लेकिन दूसरी तरफ यह भी देखा जाए कि कोई नया चिकित्सा महाविद्यालय खोला जाएगा तो उसकी अधोसंरचना तैयार करने में करीब 500 करोड़ रुपये खर्च हो जाएंगे। मेडिकल काउंसिल आफ इंडिया द्वारा मान्यता प्राप्त 150 सीट वाले चिकित्सा महाविद्यालय का तत्काल लाभ मिल सकेगा। विधेयक में कई ऐसे प्रविधान किए गए हैं, जो पारदर्शिता और गुणवत्ता सुनिश्चित करेंगे। जैसे राशि की गणना के लिए विशेष अधिकारी की नियुक्ति। विशेष अधिकारी चल और अचल संपत्ति का मूल्यांकन करेगा।
चिकित्सा महाविद्यालय की समस्त संपत्तियां सभी अधिभार से मुक्त होकर सरकार में निहित होंगी और देयता के लिए सरकार द्वारा कोई भुगतान नहीं होगा। साथ ही चिकित्सा महाविद्यालय के अधिग्रहण के बाद महाविद्यालय के कर्मचारी सरकार की सेवा में रहने का दावा नहीं कर सकेंगे। ऐसे कम ही निर्णय होते हैं, जिनमें सरकार की नीयत पर आरोप नहीं लगते हैं। विपक्ष अगर सरकार के निर्णय पर सवाल खड़े कर रहा है तो लोकतंत्र की मर्यादा इसी में है कि विपक्ष की आशंकाओं का दूर किया जाए। सरकार आश्वस्त करे कि इसमें उसकी नीयत साफ है और यह कदम राज्य के हित में है।
सरकार अगर इस चिकित्सा महाविद्यालय के साथ उन तमाम निजी प्रतिष्ठानों, संस्थानों, उद्योंगों, विद्यालयों, कालेजों आदि का भी अधिग्रहण कर लेती, जो वित्त की कमी से जूझ रहे हैं तो प्रश्न करने वालों और आरोप लगाने वालों को अवसर ही नहीं मिलता। जब बात प्रदेशवासियों के हित की है तो अन्य कर्मचारियों, अधिकारियों, शिक्षकों, विद्यार्थियों आदि के हितों को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। उन्हें भी समान और समय पर सहायता मिलनी चाहिए। साथ ही सरकार को निजी और शासकीय संस्थानों के बीच संतुलन बनाए रखना चाहिए।सरकार के किसी भी कदम का जनमानस के बीच संदेश सार्थक जाना चाहिए। इससे जनहित के काम आसान हो जाते हैं।

Related Articles

Back to top button